एक अधीक्षक के पास कई छात्रावासों के प्रभार, गंदगी व अव्यवस्था से छात्र-छात्राएं परेशान

Dharmendra Singh

Updated: 05 Dec 2019, 06:00:00 AM (IST)

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। जिले में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को सुविधा देने के लिए शासन के द्वारा शहर में 21 और जिले में 84 छात्रावास संचालित हैं। लेकिन अधीक्षकों की कमी के चलते ज्यादातर के पास एक से ज्यादा का प्रभार है। महिला अधीक्षकों के पास तो 4 जगह के चार्ज हैं। अधीक्षक चार्ज के नाम पर अक्सर गायब रहते हैं। छात्रावासों की व्यवस्था चौकीदारों के भरोसे हैं। छात्रावास में गंदगी सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा छात्रावासों में पीने के पानी और खाना की क्वालिटी को लेकर भी छात्र-छात्राएं परेशान हैं। स्थिति ये है कि जिला मुख्यालय के छात्रावासों में भी छात्र-छात्राओं को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जबकि छात्रावास के बच्चे इसको लेकर कई बार प्रदर्शन कर ज्ञापन दे चुके हैं।
लाइव 01-
सीनियर बालक छात्रावास, महोबा रोड
समय- 04.30 बजे
अक्सर व्यवस्थाओं को लेकर शहर के छात्रावासों के अधीक्षकों की शिकायत प्रशासन से होती है। प्रशासन भी समस्या हल कर लेने का दावा करता है। लेकिन समस्याएं सहीं मायने में हल नहीं होती है। बुधवार को महोबा रोड स्थित सीनियर बालक छात्रावास का जायजा लेने पर बच्चों की समस्याएं सामने आईं। छात्रों ने बताया कि खाना की क्वालिटी इतनी खराब है कि ज्यादातर बच्चे खाना छोड़ देते हैं। पीने की पानी की व्यवस्था भी गड़बड़ है, पानी की टंकी में गंदगी है। बाथरुम तो इतना गंदा है कि बच्चे इस्तेमाल तक नहीं कर पा रहे हैं। नाली की सफाई नहीं होने से परिसर में ही गंदगी फैली रहती है। छात्रों ने ये भी बताया कि अधीक्षक सुनील खरे अक्सर छात्रावास से बाहर रहते हैं। छात्रों ने ये तक आरोप लगाया कि अधीक्षक अपना आवास महोबा उत्तरप्रदेश में बनाए हुए हैं।
लाइव 02-
शासकीय महाविद्यालीन बालिका छात्रावास, कॉलेज तिराहा
समय- 4.45 बजे
महाराजा कॉलेज तिराहा स्थित शासकीय महाविद्यालीन बालिका छात्रावास की बालिकाएं भी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। छात्राओं ने बताया कि अधीक्षका सावित्री अहिरवार के पास 4 जगह का जार्ज है। आज वे यहां मौजूद नहीं है। छात्राओं ने ये भी बताया कि उनके हॉस्टल में सबसे बड़ी समस्या खाना की क्वालिटी को लेकर हैं। खाना ऐसा है, कि ज्यादातर छात्राएं खाना फेंक देती हैं। खाने में गंदगी की समस्या हमेशा रहती है। जिससे बच्चे खाना खाने से कतराते हैं। यहां सबसे अलग बात ये दिखाई दी कि छात्रावास का मेन गेट खुलते ही जानवर परिसर से बाहर निकलने लगे। साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर भी छात्राओं ने असंतोष जताया।
सिटी कोतवाली में हुई एफआइआर
इधर, प्रभार व्यवस्था के कारण बच्चों और अधीक्षकों के बीच भी संबंधों को लेकर समस्या है। कुछ इसी तरह की समस्याओं के चलते 20 नवंबर को जिला मुख्यालय के सीनियर बालिका छात्रावास में छात्रा ने खुदकुशी कर ली। जिस मामले में मंगलवार को छात्र-छात्राओ ने कलेक्ट्रेट में हंगामा किया, जिसके बाद सीनियर छात्रावास की पूर्व अधीक्षक सुशीला पाठक व उनके पति के खिलाफ सिटी कोतवाली में मारपीट करने का केस दर्ज किया गया है। अधीक्षका को घटना के बाद बच्चों के प्रदर्शन के चलते प्रशासन पहले ही निलंबित कर चुका है।
बेमानी हैं सुधार के वायदे
एक अधीक्षक से भरोसे कई छात्रावासों की व्यवस्था के कारण छात्रावासों के हाल बदहाल हैं। कई छात्रावासों की स्थिति तो काफी चिंताजनक हैं। जब हंगामा होता है तो व्यवस्थाएं सुधारने की बात कही जाती है लेकिन बाद में कुछ होता नहीं है। जिले में कुल 84 छात्रावास हैं और 62 अधीक्षक लेकिन तीन अधीक्षक निलंबित हैं इसलिए सिर्फ 59 अधीक्षकों को ही सभी छात्रावासों की जिम्मेदारी दी गई है। शहर में ही मौजूद छात्रावासों की व्यवस्था देखने की किसी को फुर्सत नहीं है। वहीं, ग्रामीण इलाके के छात्रावासों को तो कभी कोई देखने जाता ही नहीं है। हालांकि कागजों में इनका निरीक्षण और व्यवस्था दुरुस्त होने की रिपोर्ट बन जाती है। आदिमजाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक आरपी भद्रसेन ने बताया कि जिले में अनुसूचित जाति के 80 छात्रावास हैं जबकि ओबीसी के 4 छात्रावास हैं। अनुसूचित जाति के छात्रावास 50 सीटर हैं। शहर में इनकी संख्या 21 है।
जिला पंचायत सीइओ के कहने तक पर नहीं हुई कार्रवाई
22 सितंबर को जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती अनुरागी ने चार छात्रावासों का निरीक्षण किया था। सभी जगह समस्याएं मिली, वहीं उत्कृष्ट बालक छात्रावास लवकुशनगर, सीनियर बालक छात्रावास लवकुशनगर के प्रभारी जेडी शुक्ला निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिले थे। यहां की व्यवस्थाएं काफी खराब थीं। अध्यक्ष ने प्रतिवेदन बनाकर कार्यवाही के लिए जिला पंचायत सीईओ हिमांशु चन्द्र के पास भेजा। लेकिन आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती अनुरागी का कहना है कि वे छात्रावासों की व्यवस्थाएं सुधारने का प्रयास कर रही हैं लेकिन प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं दिया जा रहा।
सभी जगह हैं अव्यवस्थाएं
जिला मुख्यालय के छात्रावासों के हाल इतने खराब हैं, कि बच्चे गंदगी, असुविधा से परेशान हैं। खाना की क्वालिटी बहुत खराब है। छात्र-छात्राओं ने कई बार प्रदर्शन किया, सुधार के आश्वासन तो मिले, लेकिन आजतक सुधार नहीं हो पाया है।
लोकेन्द्र वर्मा, जिला अध्यक्ष, युवक कांग्रेस
जिले अधीक्षकों की कमी है, जिसके चलते जार्च दिए गए हैं। रही बात व्यवस्थाओं की तो जो मौजूदा स्टाफ है, उनके जरिए बेहतर व्यवस्था बनाने की हमेशा कोशिश रहती है। छात्र-छात्राओं द्वारा कोई समस्या बताई जाती है, तो प्राथमिकता से निराकरण किया जाता है। फिर भी कहीं कोई कमी है,को सुधार किया जाएगा।
आरपी भद्रसेन, उपसंचालक, आदिम जाति कल्याण विभाग

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