हर दिन मिल रहे 61 अति गंभीर कुपोषित बच्चे, एनआरसी पहुंचाए जा रहे मात्र चार

बच्चों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़, औपचारिकता में पूरा हो बच्चों का पोषण, आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं मिल पाती पर्याप्त व्यवस्था, पिछले 9 महीने के आंकड़ों में खुली पोल, विभाग बरत रहा लापरवाही

छतरपुर. कुपोषण को खत्म करने चल रहा सरकार का अभियान सिर्फ कागजों तक बना रहे, इसके लिए जिले में काफी काम हो रहा हैं। पिछले 9 महीने का आंकड़ा काफी हैं यह बताने के लिए कि कैसे योजना के फंड पाने आंकड़े तो बन रहे हैं, लेकिन हकीकत में अति कुपोषितों को पोषित करने कोई पहल नहीं हैं।


जिले में हर दिन 61 बच्चों अति गंभीर कुपोषण का शिकार ब'चे मिल रहे हैं, जबकि इनमें से महज 4 से 5 बच्चों को ही प्रतिदिन पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाया जा रहा हैं। 56 अति गंभीर कुपोषितों को आंगनबाड़ी से ही पोषण आहार देकर रवानगी दी जा रही हैं। जो एक गंभीर लापरवाही हैं। ऐसे में जिला कुपोषण मुक्त हो जाएं, संभव नहीं हैं। जबकि सरकार हर ब'चे पर सालाना 4 हजार से अधिक रुपए खर्च कर रही हैं।


लंबाई, चौड़ाई और वजन के आधार पर सामने आती हैं स्थिति
आकांक्षी जिलों में शामिल छतरपुर में सी-सेम कार्यक्रम पिछले अनेक महीनों से चल रहा हैं। जिसके तहत शून्य से पांच वर्ष के ब'चों का लंबाई, चौड़ाई और वजन के आधार पर स्तर पर तय किया जाता हैं। सी-सेम के तहत पहले बच्चों के भूख की जांच की होती हैं। इसके बाद अन्य मेडिकल जांचें होती हैं। तीन में से एक जांच में भी फेल होने पर उसे अति कुपोषित की श्रेणी में रखा जाता हैं और सीधे एनआरसी रेफर किया जाता हैं, लेकिन अभियान के दौरान इसमें लापरवाही बरती गई। नतीजतन, आज भी आंकड़ों में अति कुपोषितों की संख्या बढ़ती जा रही हैं।


मध्यम गंभीर कुपोषितों की संख्या भी नहीं कम
महिला एवं बाल विकास द्वारा हर माह के तैयार किए जा रहे आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के 2 हजार 58 आंगनबाड़ी केंद्रों पर रोजाना करीब 100 ब'चों की स्क्रीनिंग की जा रही हैं। जिनमें से 85 बच्चों सामान्य पोषण स्तर के मिल रहे हैं तो 15 ब'चे मध्यम गंभीर कुपोषण और अति गंभीर कुपोषण मिल रहे हैं। मध्यम गंभीर कुपोषण हर महीने में 19 से 20 हजार की संख्या में मिल रहे हैं। जिनकी संख्या भी लगातार बढ़ रही हैं।


नियमों की अवहेलना, ब'चों की जान से खिलवाड़
अति गंभीर कुपोषण ब'चों को एनआरसी में भर्ती कराने और उसे व उसकी मां को प्रॉपर उपचार दिलाने का नियम हैं, लेकिन जिले में नियमों की अवहेलना की जा रही हैं। जो नन्हे ब'चों की जान की जान से खिलवाड़ हैं। अति गंभीर कुपोषण के शिकार 5 प्रतिशत ब'चों को भी एनआरसी नहीं भेजा रहा हैं। जिसका कारण आंगनबाड़ी के नाम पर आ रहे फंड को जारी रखना हैं। जबकि एनआरसी का संचालन दूसरे विभाग द्वारा किया जाता हैं। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के हाल भी किसी से छिपे नहीं हैं। ऐसे में इन अति गंभीर कुपोषित ब'चों का क्या होता होगा, अंदाजा लगाया जा सकता हैं।
फैक्ट फाइल ( अपै्रल से दिसंबर 2019)
माह सामान्य पोषण मध्यम कुपोषण अति गंभीर कुपोषण एनआरसी भेजे गए
अप्रैल 168558 19442 2158 163
मई 164575 19162 1796 234
जून 163158 18538 1835 134
जुलाई 171200 20628 1931 180
अगस्त 163761 20322 1970 99
सितंबर 171447 20522 1855 141
अक्टूबर 170874 20314 1851 94
नवंबर 171888 20191 1678 102
दिसंबर 172303 20194 1550 93

वर्जन
हमारी टीम जिले भर में अति गंभीर कुपोषित ब'चों को फाउंड करती आ रही हैं। एनआरसी भेजने लायक प्रकरणों को वहां भेजा जाता हैं। सभी को नहीं भेज सकते हैं। आंगनबाड़ी से ब'चों और उनकी माताओं तक पोषण आहार पहुंचाया जाता हैं।
संजय जैन, महिला बाल विकास अधिकारी

Samved Jain Desk/Reporting
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