आफत में किसान: पककर खड़ी हुई फसल, कटाई और थ्रेसिंग किसानों के लिए चुनौती

इधर मौसम विभाग के बारिश के अलर्ट से बढ़ाई चिंता

छतरपुर. कर्ज, बीज, खाद, यूरिया, पानी और मौसम की बार-बार मार झेलने के बाद किसान की फसल अब खड़ी हो चुके हैं, लेकिन अब भी बस बड़े संकट से जूझ रहा हैं। अब किसान के सामने फसल की कटाई और थ्रेसिंग से लेकर उसे बेचने तक का संकट फिलहाल हैं। इस चुनौतीपूर्ण भरे समय में किसान अकेला ही खेतों पर देखने मिल सकता हैं। लॉक डाउन के चलते उसे न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही को मशीनरी का इस्तेमाल कर पा रहा हैं। इधर मौसम के अलर्ट ने किसान की चिंता को दोगुना कर रखा हैं।
रबी सीजन की फसल गेहूं, चना और मसूर अब पूरी तरह पक चुकी हैं। कुछ किसानों ने फसलों को काट लिया हैं तो कुछ अब भी समस्याओं के चलते यह कार्य हर दिन टाल रहे हैं। जैसे फसल की खटाई अब चुनौती हो गई हैं। लॉक डाउन का असर ऐसा है कि लोग अपने बचाव के लिए घर से बाहर भी नहीं निकलना चाहते हैं। ऐसे में किसान के पास मजूदरों का संकट हो गया हैं। दूसरी तरफ कटाई के लिए आवश्यक दूसरी व्यवस्थाएं भी जुटाना लॉक डाउन के समय संभव नहीं हो पा रहा हैं।
कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश, आज का भी अलर्ट
खड़ी फसल के बीच आसमान पर मंडरा रहे बादलों ने किसानों की चिंता को और अधिक बढ़ाकर रखा है। इधर मंगलवार को बक्स्वाहा, बड़ामलहरा, घुवारा क्षेत्र में करीब 10 से 15 मिनट की बारिश ने किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया हैं। जबकि छतरपुर सहित अन्य जगहों पर हल्की बूंदाबांदी और हवा ने किसानों को परेशान किया। बुधवार को भी जिले भर में बादल लुका-छिपी का खेल खेलते रहे। जबकि 27 मार्च को भी बादल छाए रहने की उम्मीद मौसम विभाग जता चुका हैं। ऐसे में किसान खेतों में खुद ही काम के लिए जुटे नजर आ रहे हैं। हालांकि, लॉक डाउन के चलते कम ही किसान खेत में दिख रहे हैं।
साढ़े तीन लाख हैक्टेयर में लगी हैं गेहूं की फसल
रबी सीजन की सबसे बड़ी फसल गेहूं इस बार जिले में अ'छा पानी होने की वजह से 3 लाख 52 हजार हैक्टेयर में किसानों ने लगाई हुई हैं। जो कि पिछले वर्ष से 60 हजार हैक्टेयर तक अधिक हैं। जिसमें से अब तक 10 प्रतिशत फसल की कटाई हो सकी है, शेष का काम 25 मार्च से शुरू होकर 15 अप्रैल तक तक होना था। इस बीच सौ प्रतिशत फसल की कटाई और थ्रेसिंग का काम हो जाता हैं। जबकि इसके बाद किसानों की फसल समर्थन मूल्य या बाजार में नजर आने लगती हैं। अप्रैल और मई में गेहूं की फसल का विक्रय भी अधिक होता हैं।
कोरोना ने बढ़ाई टेंशन, इन समस्याओं से जूझ रहा किसान
कोरोना के संक्रमण को रोकने देश भर में चल रहे लॉकडाउन का सबसे Óयादा असर किसान पर हैं। किसान इस समय फसल कटाई के लिए मजदूर ढंूढने वाला था, नहीं मिलने पर हार्वेस्टर से कटाई कराता, लेकिन इस समय दोनों व्यवस्था नहीं हैं। जो मिल रहे हैं वह भी महंगे। ऐसे में बजट भी बिगड़ रहा हैं। बड़ामलहरा के किसान मुकेश कुशवाहा ने बताया कि फसल अगर जल्द नहीं काटी जाती हैं तो नुकसान हो सकता हैं। अनाज का बीज खेत में गिरना शुरू हो जाएगा। जिससे बड़ा नुकसान होगा। मजदूर नहीं मिलना सबसे बड़ी समस्या हैं। बारिश हुई तो नुकसान कोई नहीं रोक पाएगा। ऐसे में बड़ी चुनौती इस समय सामने हैं।

अब लॉकडाउन में भी मिलेगा हार्वेस्टर, मांगें अनुमति
कोरोना वायरस के कारण जिले में लॉकडाउन और कफ्यऱ्ू की घोषणा की गई है। वर्तमान में प्रदेश में फसलों की कटाई और उससे संबंधित कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जा रहा है। इन कार्यों हेतु प्रदेश में उपलब्ध मशीनों का उपयोग होने के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में कंबाईन हार्वेस्टर, स्ट्रा रीपर और थ्रेशर आदि मशीन प्रदेश में आकर कार्य कर रही है, लॉकडाउन और कफ्र्यू के कारण फसलों की कटाई आदि का कार्य प्रभावित न हो इस हेतु उपाय किए जा रहे हैं। उक्त सम्बन्ध में बताया गया कि प्रदेश में कंबाइन हार्वेस्टर, स्ट्रा रीपर तथा थ्रेसर आदि मशीनों के परिवहन और संचालन को प्रतिबंध से शिथिल रखा जाएगा। उपरोक्त प्रत्येक मशीन के साथ संचालन हेतु 2-5 व्यक्ति होते है, उन्हें भी समुचित सावधानियां रखने के निर्देशों के साथ अनुमति प्रदान की जाएगी।

Samved Jain Desk/Reporting
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