उंचे मनोबल से करें कोरोना संक्रमण का मुकाबला, रखे सावधानी, मिलेगी जीत

कोविड संक्रमण के चलते अस्पताल में इलाज कराकर लौटे लोग बढ़ा रहे हौसला
समय से हो जांच और इलाज तो कोविड संक्रमण को हराना आसान

By: Dharmendra Singh

Updated: 17 Apr 2021, 09:38 PM IST

छतरपुर। कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों ने सभी के मन में घबराहट पैदा कर दी है। वहीं, संक्रमित होने वाले व्यक्तियों के इलाज में संसाधनों की कमी की सोशल मीडिया में चल रही अफवाहों के चलते लोग डरे हुए हैं। ऐसे में संक्रमण को मात दे चुके जिले के दो युवा लोगों को बीमारी के अपने अनुभव के साथ बीमारी से जीतने की कहानी बताकर लोगों की हिम्मत बढ़ा रहे हैं। समय से जांच, इलाज, डॉक्टर की सलाह के मुताबिक भोजन व दिनचर्या के अपनाकर कोविड संक्रमण को युवाओं ने मात दी है।

उंचे मनोबल से करें कोरोना संक्रमण का मुकाबला, रखे सावधानी, मिलेगी जीत

घबराए नहीं, हो जाएंगे स्वस्थ
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह 11 अक्टूबर 2020 को कोविड पॉजिटिव पाए गए। शरीर में संक्रमण 40 प्रतिशत तक फैल गया, जिसके बाद वे भोपाल के चिरायु अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुए। उन्होंने अपना मनोबल बनाए रखा और 27 अक्टूबर को संक्रमण को मात देकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए और अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है। लेकिन फिर भी संक्रमित हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। मनोबल उंचा रखे और समय से जांच व इलाज कराए। डॉक्टर के बताए अनुसार दिनचर्या को ढाले और खाना-दवा समय-समय पर लेते रहे। उनका कहना है कि बीमारी को छिपाएं नहीं, इससे न केवल मरीज खुद गंभीर हो जाता है, बल्कि आसपास के लोगों को भी संक्रमित करता है। अस्पताल से आने के बाद उन्होंने रोज एक घंटा व्यायाम करना शुरु कर दिया है। वहीं, चाय पीना छोड़ दिया है। उनका कहना है कि अनुशासित दिनचर्या से संक्रमण का मुकाबला आसानी से किया जा सकता है।

डर का सामना करने से मिलेगी जीत
लवकुशनगर निवासी शिक्षक योगेन्द्र खरे 30 अक्टूबर 2020 को पॉजिटिव पाए गए। उनकी पत्नी पारुल खरे में भी संक्रमण पाया गया। जिसके बाद दोनो भोपाल इलाज के लिए अस्पातल पहुंच गए। उनके साथ उनकी मात्र 4 माह की बेटी अनिष्का भी थी। योगेन्द्र को फेफंड़े में 40 फीसदी तक संक्रमण हो गया था, लेकिन योगेन्द्र ने हौसले का दामन नहीं छोड़ा। डॉक्टरों की सलाह पर रोजाना सुबह 5 बजे उठते, गर्म पानी-चाय पीते, सुबह टहलते और 8 बजे डॉक्टर के बताए अनुसार नाश्ता व दवा लेते रहे। इसी तरह पारुल भी करती रहीं। दिन में 1 से 2 बजे पौष्टिक आहार और शाम 4 बजे हल्का नाश्ता लेने के बाद रात में 8 बजे तय मीनू अनुसार भोजन और दवा लेते। इस तरह 13 नवंबर को पति-पत्नी स्वस्थ होकर घर लौट आए। योगेन्द्र का कहना है कि संक्रमण होने पर भी घबराना नहीं है। माहौल को बोझिल न होने दें। उन्होने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाला मरीज नए आने वाले मरीज को ये कहकर हौसला बढ़ाता रहा कि देखों में ठीक होकर जा रहा, आप भी इसी तरह घर जाएंगे। यही मनोबल कोरोना के खिलाफ जीत का सबसे बड़ा आधार है।

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