scriptComplaint of plight of the workers of the Mineral Corporation to NHRC | खनिज निगम के मजदूरों की बदहाली की शिकायत मानवाधिकार आयोग से | Patrika News

खनिज निगम के मजदूरों की बदहाली की शिकायत मानवाधिकार आयोग से

समाजिक कार्यकर्ता ने की शिकायत, आयोग ने लिया संज्ञान में

 

छतरपुर

Updated: February 21, 2022 02:49:10 pm

छतरपुर। खनिज विकास निगम और फॉर्चून कंपनी की पार्टनरशिप में लवकुशनगर के कटहरा में संचालित ग्रेनाइट खदान के मजदूरों की परेशानी की शिकायत मानवाधिकार आयोग को की गई है। आयोग ने शिकायत को संज्ञान में लिया है। पत्रिका में खदान मजदूरों के साथ कोरोना काल में की गई नाइंसाफी की खबरों के आधार पर छतरपुर की समाजिक कार्यकर्ता दीपाली चौधरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है। जिसे आयोग ने गंभीरता से लेते हुए प्रकरण को पंजीबद्ध किया है।
मजदूरों को बेसहारा कर रही कंपनी
मजदूरों को बेसहारा कर रही कंपनी
मजदूरों को बेसहारा कर रही कंपनी
कोरोना संकट की शुरुआत में मध्यप्रदेश खनिज निगम की 20 फीसदी हिस्सेदारी वाली कंपनी के मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया गया। मजदूरों ने 19 महीने केस लड़ा और श्रम न्यायालय के आदेश पर नौकरी में उनकी वापसी भी हो गई। लेकिन फार्चून स्टोन प्राइवेट लिमटेड अब उन मजदूरों को जबरन 700 से 800 किलोमीटर दूर दिल्ली और उदयपुर ट्रांसफर पर भेजने में लगी है। मजदूरों ने अपनी व्यथा कंपनी को सुनाई और फिर 16 जनवरी को जनसुनवाई में आवेदन देकर जिला प्रशासन व खनिज विभाग से मदद की गुहार लगाई। उसके बाद कंपनी ने सभी मजदूरों को नोटिस थमा दिया है।
अपनी व्यथा सुनाने पर थमाए नोटसि
कंपनी में डंपर ड्राइवर के रुप में 12 साल से काम कर रहे चरन सिंह का कहना है कि कंपनी ने 24 जनवरी को तीन नोटिस एक साथ थमा दिए। एक पत्र में कंपनी की गोपनीय जानकारी शेयर करने और संस्थान की छबि खराब करने का आरोप लगाया है। चरन सिंह का कहना है कि अपनी नौकरी बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाने की वजह से उन्हें नोटिस देकर बाहर निकालने की तैयारी की गई है। उनके अलावा रामविशाल, महाप्रसाद, एवं रसीद मुहम्मद ड्राइवर, मोहम्मद नसीम खान वेल्डिंग हेल्पर, हरगोविंद पटेल मशीन ऑपरेटर को भी कंपनी परेशान कर रही है।
कोर्ट केस के बाद भी राहत नहीं
लवकुशनगर इलाके के कटहरा में एमपी फार्चून की ग्रेनाइट खदान है। मध्यप्रदेश खनिज विकास निगम की इस खदान को फार्चून स्टोन ने ज्वाइंट वेंचर में संचालन के लिए लिया हुआ है। सरकारी हिस्सेदारी वाली इस खदान के मजदूरों को कोरोना संकट शुरु होने पर जून 2020 में नौकरी से निकाल दिया गया था। जिसके बाद 7 मजदूर श्रम पदाधिकारी (केन्द्रीय) सतना में 19 महीने तक केस लड़ते रहे। श्रम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी ने मजदूरों को दोबारा काम पर रखने का लिखित आश्वासन दिया। लेकिन एक महीने के अंदर ही मजदूरों को दिल्ली और उदयपुर ट्रांसफर का लेटर थमा दिया। जिसका मजदूर विरोध कर रहे हैं।

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