कोरोना ने सबकुछ बदला, लेकिन नहीं डिगी आस्था

कोविड के बीच सावधानी के साथ निभाई कार्तिक व्रत की परंपरा
कोविड के असर से जलाशयों में सामूहिक स्नान नहीं, लेकिन सामूहिक पूजा अर्चना जारी

By: Dharmendra Singh

Published: 30 Nov 2020, 09:24 PM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। कोरोना ने आम आदमी के जीवन व आदतों में बड़ा परिवर्तन किया है। खान-पान और समाजिक मेलजोल तक पर असर पड़ा है। लेकिन संकटकाल में आस्था व परंपरा पर लोगों का विश्वास आज भी कायम है। कार्तिम मास व्रत व स्नान की पुरातन परंपरा का गांव-गांव में पालन किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण काल में लोगों को पहनावे में शामिल हुए मास्क के सहारे आस्था की डूबकी एक माह से लगाई जा रही है। गांव-गांव में महिलाएं कार्तिक व्रत कर रही है। वही संभाग के के बड़े धाॢमक स्थलों निवाड़ी जिले के ओरछा, छतरपुर जिले के जटाशंकर धाम और खजुराहो के मतंगेश्वर, दमोह के बांदकपुर में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

60 हजार से ज्यादा महिलाएं कर रही काॢतक व्रत
कार्तिक मास का पूजन कराने वाले पंडित गुलाब रावत और श्याम बिहारी चौबे ने बताया कि बुंदेलखंड के सागर संभाग में कार्तिक मास के व्रत का बड़ा महत्व है। हर गांव-हर घर की महिलाएं कार्तिक व्रत से जुड़ी हुई है। सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना और निवाड़ी में करीब-करीब 60 हजार महिलाएं कार्तिक व्रत कर रही हैं। चौबे का कहना है कि कोरोना के चलते भले ही लोगों की आदतों में बदलाव आया है, लेकिन परंपरा और आस्था ज्यों की त्यों है। बल्कि ज्यादातर महिलाओं ने कोरोना संकटकाल से उबरने के लिए पहले से भी ज्यादा मनोभाव के साथ कार्तिक स्नान किया है।

बड़े धार्मिक स्थलों में पहले की तरह नजर आ रही टोलियां
बुंदेलखंड में कार्तिक मास के व्रत के तहत व्रत करने वाली कतकारियां भगवान कृष्ण की खोज में पहले अपने मोहल्ले, गांव और शहर में कृष्ण की भक्ति में रमी हुई उनकी खोज में निकलती है। हर रोज खोज का दायरा भी बढ़ता जाता है। फिर महिलाओं की टोली बड़े धार्मिक स्थल भी कृष्ण की खोज में जाती हैं। जहां आस्था का मेला लगता है। ओरछा में न केवल मध्यप्रदेश बल्कि उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के जिलों की कतकारियां कृष्ण की खोज मे आती हैं। इसी तरह छतरपुर जिले के जटाशंकर में छतरपुर और दमोह की कतकारियों का मेला लगता है। वहीं, पन्ना में जुगल किशोर मंदिर में पूरे माह कतकारियों का जमावड़ा रहता है। पूरे माह ब्रम्हचर्य के साथ कठिन व्रत करने वाली कतकारियां आखिरकाल पूर्मिमा को कृष्ण की भक्ति का रसपान करती हैं। एक माह के कठिन व्रत के बाद व्रति महिलाओं को कृष्ण की प्राप्ति होती है।

शिव की नगरी हुई कृ ष्णमय, कतकारियों के व्रत के तेज से दमक रहा प्रांगण
कृष्ण की उपासना के कार्तिक मास में कतकारी महिलाएं गांव-गांव उनकी तलाश करती है, लेकिन जब कृष्ण नहीं मिलते तो महिलाओं की टोली जिले व आसपास के जिलों के बड़े धार्मिक स्थलों तक कृष्ण की खोज में जाती हैं। 10 साल से कार्तिक स्नान कर रही रोरा गांव की हरबाई यादव ने बताया कि कार्तिक मास का व्रत बुंदेलखंड में महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। कोविड काल में संक्रमण का खतरा है, ऐसे में कार्तिक स्नान के दौरान सावधानी के लिए मास्क या चेहरा ढंकने की आदत दिनचर्या में शामिल हो गई है। लेकिन ईश्वर पर आस्था में संक्रमण का कोई असर नहीं है। जैसे 10 साल से कार्तिक व्रत कर रहे हैं, इस साल भी व्रत का पालन किया। गांव की महिलाएं सुबह से ही मंदिर में एकत्र हो जाती है और विधि विधान से पूजा अर्चना होती है, कान्हा की खोज का ये सिलसिला निर्बाध रुप से एक माह से चल रहा है। परंपरा अनुसार महिलाएं जटाशंकर धाम भी पहुंची और कान्हा की खोज करने के साथ परिक्रमा व भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। कुछ महिलाओं की टोली कृष्ण की खोज में चित्रकूट भी गई।

कोविड का असर, लेकिन पंरपरा बरकरार
6 साल से कार्तिक स्नान कर रही ममता यादव ने बताया कि कोविड का कार्तिक स्नान की प्रक्रियाओं पर कुछ असर हुआ है, सुरक्षा के लिए महिलाएं अपने घरों से ही स्नान कर मंदिर आती है। तालाबों-नदियों में एक साथ स्नान नहीं किया जा रहा है। लेकिन व्रत के विधिविधान में कोई परिवर्तन नहीं है। परंपरा अनुसार ही महिलाएं रोजाना कान्हा की खोज में मंदिर-मंदिर जा रही है। वहीं, जटाशंकर और खजुराहो के मंदिर पहुंचकर भी कार्तिक व्रत के तहत पूजा अर्चना, परिक्रमा और कथा वाचन किया जा रहा है।

संकट में गहरी हो जाती है आस्था
भागवती सेन व रामसखी यादव ने बताया कि जब जब संकट आता है, तब-तब हमारी धार्मिक आस्था और प्रबल हो जाती है। हमें मामलू है कि ईश्वर पर आस्था के सहारे ही हम भवसागर की मुश्किलों को पार सकते हैं। डॉक्टर्स व शासन ने सुरक्षा के जो उपाय बताए हैं, उनका पालन तो कर ही रहे हैं। लेकिन संकट से उबरने के लिए और अधिक आस्था के साथ ईश्वर की शरण में है। ताकि वैश्विक महामारी के संकट से सभी को निजात मिले सके।

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