scriptCrops started getting damaged due to cold wave | शीतलहर से फसलों को होने लगा नुकसान, चना, अरहर, मसूर के अलावा सब्जियां भी हो रही प्रभावित | Patrika News

शीतलहर से फसलों को होने लगा नुकसान, चना, अरहर, मसूर के अलावा सब्जियां भी हो रही प्रभावित

5 डिग्री से कम तापमान पर पड़ता है पाला, खजुराहो 3.2 और नौगांव 3.3 डिग्री रहा न्यूनतम तापमान

कृषि विभाग ने बताए फसलों को बचाने के उपाय, मौसम विभाग ने जताई पारा चढऩे की उम्मीद

छतरपुर

Updated: December 22, 2021 03:44:12 pm

छतरपुर। पिछले पांच दिनों से जिला शीलतहर की चपेट में है, हालांकि बुधवार से न्यूनतम व अधिकतम तापमान में बढोत्तरी हुई है, नौगांव में न्यूनतम तापमान 3.3 और खजुराहो में 3.2 डिग्री दर्ज किया गया। लेकिन अभी भी शीतलहर का असर जारी है। मौसम विभाग ने भी जिले में शीतलहर का अलर्ट बढ़ा दिया है। शीतलहर के चलते तापमान गिरने से फसलों में पाला लग रहा है। पिछले दिनों 2 डिग्री तक पारा पहुंच जाने से फसलें प्रभावित हुई हैं। चना, अरहर, मसूर के अलावा सब्जियों में भी व्यापक असर देखने को मिला है।
पाला से उत्पादन पर पड़ेगा असर
पाला से उत्पादन पर पड़ेगा असर
पाला से उत्पादन पर पड़ेगा असर
तापमान गिरने से चना, मसूर, मटर के अलावा आलू, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च आदि की फसलें पाला की चपेट में आ गई हैं। सुबह ओस बर्फ के रूप में जमती नजर आ रही है। इस वर्ष समय पर बारिश होने से किसानों ने उत्साह के साथ फसलों की बुआई की थी वहीं अरहर की फसल काफी अच्छी स्थिति में देखी गई, लेकिन तापमान के लुढ़कने से फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। सब्जी उगाने वाले किसान काशीराम पटेल, अनिरुद्ध दुबे, राजू अहिरवार आदि ने बताया कि फसलों की पैदावार में अधिक लागत आ रही है। पाला पडऩे से उत्पादन घटेगा, ऊपर से नुकसान होने पर मुआवजा नहीं मिलता। चने की फसल बोए अरविंद तिवारी ने बताया कि मसूर, चना और मटर की फसल में काफी नुकसान हुआ है।
पश्चिमी विक्षोभ से चढ़ेगा पारा
मौसम केन्द्र खजुराहो के आरएस परिहार ने बताया कि वर्तमान में उत्तरी पाकिस्तान और उससे लगे उत्तर भारत पर एक पश्चिमी विक्षोभ हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में मौजूद हैं। बुधवार को यह सिस्टम हिमालयीन क्षेत्र में पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त 24 और 26 दिसंबर को भी दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में प्रवेश करेंगे। इनके प्रभाव से राजस्थान पर प्रेरित चक्रवात बनने की संभावना है। जिसके चलते हवाओं का रुख बदलेगा। हवाओं के साथ नमी आने से बादल छाने लगेंगे। इससे न्यूनतम तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। इससे ठंड से काफी राहत मिल जाएगी।
हवा रुकने से पड़ता है पाला
कृषि विभाग ने सलाह जारी करते हुए कहा है कि जब तापमान 5 डिग्री से कम होने लगे तब पाला पड़ऩे की पूर्ण संभावना होती है। हवा का तापमान जमाव बिन्दु से नीचे गिर जाये, दोपहर बाद अचानक हवा चलना बंद हो जाये तथा आसमान साफ रहे या उस दिन आधी रात से ही हवा रूक जाये, तो पाला पडऩे की संभावना अधिक रहती है। रात को विशेष कर तीसरे एवं चौथे प्रहर में पाला पडऩे की संभावना रहती है। साधारणतया: तापमान चाहे कितना भी नीचे चला जाये, यदि शीत लहर हवा के रूप में चलती रहे तो कोई नुकसान नहीं होता है। परंतु यदि इसी बीच हवा चलना रूक जाये तथा आसमान साफ हो तो पाला पड़ता है जो फसलों के लिये नुकसानदायक है।
खेतों की सिचाई जरूरी
कृषि उपसंचालक मनोज कश्यप ने बताया कि जब भी पाला पडऩे की संभावना हो या मौसम पुर्वानुमान विभाग से पाले की चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिचाई दे देनी चाहिए। जिससे तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है सिंचाई करने से 0.5-2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में बढ़ोत्तरी हो जाती है। पाले से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है। नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढकने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से प्लास्टिक के अन्दर का तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। जिससे सतह का तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंच पाता और पौधे पाले से बच जाते हैं। पॉलीथीन की जगह पर पुआल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
खेत की मेंढ़ों पर धुंआ करें
फसल को पाले से बचाने के लिए आप अपने खेतों की मेढ़ों पर घास कचरा जलाकर धुंआ करें, जिससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है। जिस दिन पाला पडऩे की संभावना हो उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिये। इस हेतु एक लीटर गंधक के तेजाब को 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में प्लास्टिक के स्प्रेयर से छिड़कें। ध्यान रखें कि पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगे। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीतलहर व पाले की संभावना बनी रहे तो गंधक के तेजाब को 15 से 15 दिन के अंतर में दोहराते रहें।

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