बेटियों ने मां को जंजीरो में जकड़ा

लॉकडाउन में छिना रोजगार तो बिगड़ गई महिला की मानसिक स्थिति, खुद को पहुंचाने लगी नुकसान
लॉकडाउन में रोजगार छिनने से गरीब परिवार पर टूटा आफत का पहाड़
परिवार का भरणपोषण करने वाला न होने से भूखे मरने की आ गई नौबत

By: Dharmendra Singh

Published: 16 Sep 2020, 06:00 AM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। कोरोना व लॉकडाउन गरीबों की जिंदगी में आफत बनकर टूटा है। लॉकडाउन में बेरोजगार हुई महिला की मानसिक स्थिति अपने परिवार के भरण पोषण की फिक्र में बिगड़ी गई। नौबत यहां तक आ गई है कि महिला खुद को नुकसान पहुंचाने लगी है, वह विक्षिप्तों जैसा व्यवहार करने लगी है। अकेले बड़बड़ाते रहना, दिन-रात जागते रहना और खुद को नुकसान पहुंचाना उसकी दिनचर्या हो गई। जिसके चलते उसके नाबालिग बच्चों ने ही मां को जंजीरो में जकड़ लिया है। ताकि वो खुद को नुकसान न पहुंचा सके।

परिवार के पालन की चिंता में बिगड़ गई मानसिक स्थिति
लॉकडाउन के चलते काम-काज बंद होने से शीला मेहनत-मजदूरी को भी नहीं जा पा रही थी। बच्चों का लालन-पालन, पढ़ाई-लिखाई, बूढ़ी सास की देखभाल और बेटियों के भविष्य की चिंता में शीला की मानसिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। वक्त गुजरने के साथ शीला की विक्षिप्तता बढ़ती गई। हालत यह हो गई कि उसने अपने कच्चे मकान का छप्पर गिराना शुरू कर दिया। इसमें वह खुद भी चोटिल हो गई। तब बच्चों ने पड़ोसियों से मदद मांगी और मां को जंजीरों से जकड़ दिया, ताकि वह खुद को और दूसरों को नुकसान न पहुंचा सकें। हरबाई का कहना है कि उनकी बहू की अब यही दिनचर्या हो गई है। न चाहते हुए भी शीला को जंजीरों में जंकड़ कर रखना पड़ रहा है।

10 माह पहले पति का हो गया था निधन
छतरपुर शहर के सिटी कोतवाली थानांतर्गत अमानगंज मोहल्ला में रहने वाली 48 वर्षीय शीला कुशवाहा के पति हलकाईं कुशवाहा का 10 माह पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद से परिवार की सारी जिम्मेदारी शीला के ही कंधों पर आ गई थी। वह मेहनत-मजदूरी कर जैसे-तैसे अपने बच्चों और बूढ़ी सास का पालन-पोषण कर रही थी। उसके परिवार में 80 वर्षीय बूढ़ी सास हरबाई कुशवाहा, तीन नाबालिग बेटियां 16 वर्षीय कविता, 14 वर्षीय मंजू, 8 वर्षीय कल्पना और 12 वर्षीय एक बेटा चंचल हैं। दो बड़ी बेटियों की शादियां हो चुकीं हैं जो अब अपने ससुराल में रह रहीं हैं।

चावल खाकर पेट भर रहे बच्चे
शीला के काम पर न जाने से परिवार की माली हालत और बिगड़ गई है। बूढ़ी सास कुछ करने लायक नहीं हैं। नाबालिग बच्चे अभी कमाने लायक नहीं हैं। एक मात्र कमाने वाली शीला की हालत बिगडऩे से सबके भूखों रहने की नौबत आ गई है। बच्चे घर में रखे सूखे चावल खाकर गुजर बसर कर रहे हैं। कविता ने बताया कि हमारी मदद के लिए कोई भी नहीं आया है। ऐसे में हमसे जो बन पा रहा कर रहे हैं।

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