आमरण अनशन के दौरान हुई किसान की मौत की जांच के लिए कांग्रेस ने बनाई समिति

डुमरा गांव के किसान की मौत को दबाने की कोशिश में है प्रशासन

By: Neeraj soni

Published: 24 Jul 2018, 12:49 PM IST

छतरपुर। डुमरा गांव में सूखा राहत की राशि नहीं मिलने से आमरण अनशन पर बैठे ६५ वर्षीय किसान मंगल यादव की मौत के मामले को एक ओर जहां प्रशासन स्तर पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर अब इस मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। किसान की मौत आमरण अनशन के कारण होने की बात को भले ही स्थानीय प्रशासन बार-बार झुठलाता रहे और पीडि़त परिवार का मुंह बंद कराने का प्रयास कर रहा हो, लेकिन गांव के लोग अब भी इस घटना को नहीं भूल पाए हैं। गांव के लोगों का आरोप है कि पटवारी से लेकर प्रभारी तहसीलदार तक पीडि़त किसान के घर जाकर उन्हें बार-बार यह बयान देने के लिए दवाब डाल रहे हैं कि किसान मंगल सिंह की मौत स्वभाविक हुई है।
डुमरा गांव के गुलाब त्रिपाठी, जगदीश यादव, अखिलेश यादव, हाकम सिंह यादव, हेमंत त्रिपाठी, सुरेंद्र पटेल, रामचरण पाल, भगवान दास पटेल, भगवानदास साहू आदि ने बताया कि गांव के किसानों को पिछले साल की सूखा राहत की राशि आज तक नहीं दी गई। १४ जुलाई को गांव के पंचायत भवन में पटवारी जगदीश अहिरवार ने इसलिए बुलाया था कि सभी को तहसीदार के हाथों सूखा राहत की राशि वितरित कराई जाएगी। लेकिन शाम तक तहसीलदार नहीं आए। दिनभर किसान भूखे-प्यासे बैठे रहे। लेकिन जब उन्हें वापस जाने के लिए कह दिया गया तो वे गुस्से में अनशन पर बैठ गए। पटवारी और तहसीलदार को भी इस बारे में बताया गया। इन किसानों में शामिल ६५ वर्षीय मंगल यादव ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ी तो उसे १०८ वाहन से जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया। बाद में उसे ग्वालियर रैफर किया तो परिजन गरीबी के कारण उसे वापस गांव ले आए। जहां रात में उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद गांव के लोगों ने जाम लगाकर 10 घंटे तक प्रदर्शन किया था। लेकिन न तो कोई अफसर पहुंचे और न ही जनप्रतिनिधि। इसके बाद गांव के लोगों ने जाम हटाकर मंगल यादव की अंत्येष्टि कर दी। जब अंतिम संस्कार हो गया तो पुलिस और प्रभारी तहसीलदार गांव पहुंच गए। इसके बाद से ही मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
गौरतलब है कि इस मामले को सबसे पहले पत्रिका ने उठाया था। किसान की मौत के पहले ही उसके आमरण अनशन पर होने की खबर दी थी। इसके बाद किसान की जब मौत हो गई तो गांव वालों ने सड़क पर शव रखा और जाम लगाकर प्रदर्शन किया। चूंकि 20 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को खजुराहो में आचार्यश्री के दर्शन करने आना था, लिहाजा प्रशासन ने पूरी दम लगाकर इस मामले को दबाने का कुछ हद तक सफल प्रयास कर लिया। लेकिन पत्रिका ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया।
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने गठित की जांच समिति :
जिले के ग्राम डुमरा के किसान मंगल यादव की आमरण अनशन के बाद मौत की जांच के लिए नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने कांग्रेस विधायकों की दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति 2 दिन में अपनी रिपोर्ट नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को सौपेंगी। इनमें जिले के राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा एवं खरगापुर विधानसभा की विधायक चंदा गौर शामिल हैं।
अंतिम समय तक नहीं खाया था अन्न-जल :
किसान मंगल सिंह यादव के बेटे भान सिंह और नाती जगदीश व हल्ले ने बताया कि 14 तारीख से ही उन्होंने खाना-पानी बंद कर दिया था। तबियत बिगडऩे पर भी वे कुछ भी खाने से मना करते रहे। उन्होंने भूखा-प्यासा रहकर अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने बताया कि वे डॉक्टरों ने ग्वालियर ले जाने के लिए कहा था, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वे चाहकर भी उनका इलाज नहीं करवा पाए। मजबूरी में उन्हें घर ले जाना पड़ा।

किसान की मौत स्वाभाविक ही हुई है :
पहले भी कहा था कि किसान की मौत आमरण अनशन के कारण नहीं हुई है। यह बात सही है कि १४ जनवरी ग्राम पंचायत स्तर पर लोक कल्याणकारी शिविर का आयोजन किया गया था। उस शिविर में किसान मंगल यादव आया था और कुछ देर बाद चला गया था। इसके बाद वह बीमार हो गया तो उसे अस्पताल भेजा गया। दो-तीन दिन वह अस्पताल में रहा। बाद में उसे रैफर किया गया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। गांव में भूख हड़ताल जैसी कोई बात नहीं हुई। उस दिन शिविर में नायब तहसीलदार परशुराम शुक्ला की ड्यूटी थी, लेकिन वे अवकाश पर होने के कारण शिविर में नहीं पहुंचे थे। वृद्धावस्था के कारण किसान की स्वाभाविक मौत हुई है। मैं खुद गांव गया था पर गांव में लोग वृद्ध की अंत्येष्टि करते मिले थे।
- वेदप्रकाश सिंह, प्रभारी तहसीलदार, राजनगर

Neeraj soni Reporting
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