नर्सो की हड़ताल से जिला अस्पताल की व्यवस्था लडख़ड़ाई

व्यवस्था बिगड़ी तो वार्ड सर्वेन्ट लगा रहा बच्चों को इंजेक्शन
अनुभवी नर्सो की हड़ताल से टाल रहे सर्जरी, मरीजों के इलाज में हो रही देरी

By: Dharmendra Singh

Updated: 03 Jul 2021, 06:42 PM IST

छतरपुर। जिला अस्पताल की नर्सों के हड़ताल पर जाने से हालात धीरे-धीरे बिगडऩे लगे हैं। वार्डो में भर्ती मरीजों के इलाज में भी देरी हो रही है। स्वास्थ विभाग ने व्यवस्था बनाने के लिए निजी अस्पतालों से नर्सो की व्यवस्था की है। लेकिन जिला अस्पताल की अनुभवी नर्से न होने से डॉक्टर भी सर्जरी टाल रहे हैं। परिजन भी मरीजों को डिस्चार्ज करा दूसरे अस्पतालों में ले जा रहे हैं। जिला अस्पताल की बिगड़ी व्यवस्थाओं के बीच बच्चा वार्ड में वार्ड सर्वेन्ट द्वारा बच्चे को इंजेक्शन लगाने की फोटो सोशल मीडिया पर सामने आई है। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ की इस तस्वीर के बाद अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को लेकर लोग आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।

शराब के नशे में लगाया इंजेक्शन
जिला अस्पताल में बच्चा वार्ड में बतौर सर्वेन्ट वर्ष 2005 से सेवाएं दे रहे कृष्ण कुमार सेन उर्फ मुन्नीलाल इन दिनों 24 घंटे सेवाएं दे रहे हैं। वे बच्चों का उपचार करने से लेकर उन्हें इंजेक्शन लगाने तक के सारे कार्य कर रहे हैं जबकि यह कार्य उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन शीला और गोविंददास ने बताया कि वार्ड सर्वेन्ट कृष्ण कुमार सेन द्वारा शराब के नशे में उनके बच्चों को इंजेक्शन लगाने और बोतल चढ़ाने का कार्य किया जा रहा था और नशे के कारण वह बोतल नहीं चढ़ा पा रहे थे।


वार्ड में व्यवस्था बनाने बुलाई नर्से
जिला अस्पताल परिसर में 12 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले भर की स्टाफ नर्सें अनिश्चित काल तक हड़ताल पर बैठी हैं। जिला अस्पताल की चौथी मंजिल पर मौजूद महिला व पुरुष वार्ड में एक संविदा स्टाफ नर्स के हवाले है। इस कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस वार्ड में करीब 100 मरीज भर्ती हैं। पर इन मरीजों के इलाज के लिए एक संविदा स्टाफ नर्स ड्यूटी कर रही है। 30 जून और 1 व 2 जुलाई को स्टाफ नर्सों के हड़ताल पर होने से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने अब कोविड कार्यो में तैनात 25 नर्सो व निजी अस्पताल से बुलाई गई 15 नर्सो को व्यवस्था संभालने में लगाया है।

इलाज के लिए इंतजार कर रहे मरीज
गोरा गांव के 11 वर्षीय राजराजा सड़क दुर्घटना के बाद जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन नर्सो की हड़ताल के चलते ट्रामा वार्ड में भर्ती बच्चों का इलाज नहीं हो पाया और दोपहर तीन बजे उसकी मौत हो गई। वहीं, टिकरिया गांव की प्रमोद कुमारी को हार्ट की बीमारी के चलते 30 जून को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पर स्टाफ नर्सों की हड़ताल के चलते इस महिला को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। बिलहरी गांव के गुड्डू सोनकर ने बताया कि उसकी पत्नी लक्ष्मी सोनकर को पथरी की शिकायत होने पर शुक्रवार की दोपहर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जांच के बाद स्टाफ नर्स ने महिला को 2 इंजेक्शन दिए। इसके बाद न ही चैकअप करने डॉक्टर आए और न ही नर्सें मिल रही हैं।


इनका कहना है
वार्ड सर्वेन्ट का कार्य डॉक्टर और नर्स की सहायता करना होता है, उसे इंजेक्शन लगाने या उपचार करने का कोई अधिकार नहीं होता, यदि वार्ड सर्वेन्ट नशे में कार्य कर रहे हैं तो आरएमओ से जांच कराकर उचित कार्यवाही की जाएगी।
डॉ. एमके गुप्ता, जिला अस्पताल, सिविल सर्जन

नर्सो से कार्य पर लौटने को कहा गया है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए वैकल्पिक तौर पर निजी नर्सिग होम्स से नर्सो को तैनात किया गया है।
डॉ. विजय पथोरिया, सीएमएचओ

Dharmendra Singh
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