गरीबी ऐसी कि छह महीने से घर की कटी है बिजली, बीमार हुए तो अस्पताल में भी जारी रखी पढ़ाई


बिजली मिली तो इलाज के दौरान भी नहीं छोड़ी भाई बहन ने पढ़ाई
मुफलिसी में भी मां ने दिया संदेश, बेटा-बेटी की पढ़ाई जरुरी

By: Dharmendra Singh

Published: 11 Oct 2021, 06:20 PM IST


छतरपुर। मुश्किलों के बीच भी बेटे-बेटी की पढ़ाई को महत्व देने वाली मां और सिद्दत से पढ़ाई करने वाले बेटा-बेटी की कहानी सामने आई है। 6 महीने से घर की बिजली कटी हुई है, मुफलिसी का जीवन है, फिर भी शहर के दो भाई-बहन में पढ़ाई को लेकर अनूठा जज्बा देखने को मिला है। पोषक तत्वों की कमी के चलते शारीरिक कमजोरी से परेशान 20 वर्षीय बीए की छात्रा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीमारी के वाबजूद अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बिजली मिली तो छात्रा व उसके भाई अस्पताल में भी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।

जिला अस्पताल की चौथी मंजिल स्थित के मेडिकल वार्ड में बीए की छात्रा 20 वर्षीय रौनक निजामी भर्ती है। डॉक्टरों ने उसे कमजोरी और शरीर में खून की कमी होना बताया है, जिससे वह 1 सप्ताह से जिला अस्पताल में इलाजरत है। 45 वर्षीय मांग अकीला बानों और उसका 19 वर्षीय भाई खालिद निजामी अस्पताल में रहकर उसका ख्याल रख रहे हैं। भाई बहन रौनक व खालिद छतरपुर महाराजा कालेज में बीए के छात्र हैं। इलाज के दौरान दोनों भाई बहन अस्पताल के बेड पर पढ़ते नजए आते हैं। दोनों का कहना है कि पढ़ाई हर किसी के अच्छे भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। ठीक उसी तरह हमारे लिए भी जरूरी है, पर यह अलग बात है कि यह हमारी मजबूरी भी है कि हमें बीमारी की हालत में भी यहां पढऩा पढ़ रहा है।


अस्प्ताल में मिलने वाले खाने से भरता है पेट
रौनक ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से हैं और बेहद गरीबी और तंगहाली में जी रहे हैं। परिवार में वह और उसका 1 भाई और उसकी मां है, हम तीनों ही एक-दूसरे की पूरी दुनिया हैं। हमारे पिता 15 वर्ष पूर्व बचपन में हम लोगों को छोड़कर चले गए थे तब से अब तक हमारी मां मेहनत-मजदूरी कर हमारा लालन-पालन व भरण-पोषण खुद अकेले ही कर रही है। माँ ने मेहनत मजदूरी कर हमें पाल पोषकर बड़ा किया और पढाया है। आज भी वह हम लोगों के लिए जी तोड़ मेहनत-मजदूरी करती है, पर बीमारी ने उन्हें तोड़कर रख दिया है। पिछले दिनों मजदूरी के दौरान ज्यादा वजन उठाने के दौरान वह गिर गईं तो कमर में चोट आ गई और दर्द रहता है। इसलिए अब ज्यादा मेहनत का काम नहीं कर पातीं तो परिवार पर खाने-पीने तक के लाले पडऩे लगे हैं। ऊपर से मेरी बीमारी ने अंदर तक हिलाकर रख दिया है। अस्पताल में भर्ती हैं तो यहीं खाना मिल जाता है। हम भाई-बहन और मां एक साथ मिलकर खा लेते हैं।

सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत मनिहारी मोहल्ला स्थित मस्जिद के पास के निवासी खालिद व रौनक कहते हैं कि अस्पताल में इसलिए पढ़ रहे हैं कि उनके घर में पिछले 6 माह से लाइट नहीं है, जिससे वह घर में तो पढ़ नहीं पाते तो यहां भर्ती के दौरान पढ़ रहे हैं। यहां पलंग है, पंखा है, रोशनी है और सुकून भी है। घर में दिन में तो सूरज की रोशनी होती है तो पढ़ लेते हैं पर रात को अंधेरा होता है तो घर से बाहर गली में निकल आते और लोगों के घरों के बाहर जल रही लाइट की रोशनी में पढ़ लेते हैं।

हालात देखकर डॉक्टर का पसीज गया दिल
जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर अरविंद सिंह ने बताया कि बेटी को बेहद कमजोरी है और शरीर में खून की कमी है, उसे बेहतर खानपान की जरूरत है। दवाईयां तो अस्प्ताल से मिल जाएंगी पर शरीर के लिए और भी जरूरत की चीजें हैं। फल और अन्य पेय हैं वह बाजार से लेना पड़ेगे। डॉक्टर की बात सुनकर अकीला की आंखो से आंसू निकल आए। डॉक्टर को सारा माजरा पता चला तो उन्होंने अपनी जेब से रुपए निकालकर फल व अन्य सामान मंगवाया।

Dharmendra Singh
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