हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकारी जमीनों से अबतक नहीं हटाया अतिक्रमण

सरकारी जमीन का किया हेरफेर
सरकारी जमीन को निजी बनाकर कॉलोनी बसाई, जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर हाईकोर्ट ने कॉलोनी हटाने के दिए आदेश
वर्ष 2006 और वर्ष 2014 में हाईकोर्ट ने दिए आदेश, पालन आज तक नहीं, अवमानना याचिका पर अधिकारियों ने कोर्ट से मांगा था समय

By: Dharmendra Singh

Published: 02 Sep 2020, 08:00 AM IST

छतरपुर। शहर की सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं ने सरकारी रिकॉर्ड में हेर-फेर करके निजी बना लिया और रातों-रात बेचकर कॉलोनियां आबाद कर डाली। प्लाट बेचे और धीर-धीरे सरकारी जमीनों पर बस्तियां आबाद होती चली गईं, लेकिन वर्षो से चल रहे इस खेल को रोकने का प्रशासन ने कोई प्रयास नहीं किया। कुछ जागरुक लोग जमीनों को बचाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे और उन्होंने कोर्ट का आदेश लाकर भी प्रशासन को दिया, लेकिन भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। जिला प्रशासन अब अवैध कॉलोनियों के सर्वे व कार्रवाई की बात कह रहा है। ऐसे में सरकारी जमीन पर बसी अवैध कॉलोनियों को हटाने के हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है।

पन्ना नाका पर कलेक्टर बंगेल के सामने डेरा पहाड़ी के गेट से लेकर रेडियो कॉलोनी तक और सटई रोड पर गुलाब मैरिज हाउस से लेकर ग्रीन एवेन्यू कॉलोनी तक की शासकीय जमीन को फर्जी तरीके से राजस्व के रिकॉर्ड में निजी दमीन दर्ज किया गया था। इन मामलों में हाईकोर्ट ने अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इन जमीनों को मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन जिला प्रशासन ने इन आदेशों का पालन आज तक नहीं किया है। पन्ना नाका की जमीन में कोर्ट के आदेश के अवमानना का केस भी चला, जिसमें अधिकारियों ने आदेश का पालन जल्द कराने का हवाला देकर समय मांगा, लेकिन एक के बाद एक अधिकारी बदलते रहे और हाईकोर्ट के आदेश का पालन आज तक नहीं हो सका है।

पन्ना नाका पर बेच दी श्मशान की जमीन
पन्ना नाका पर कलेक्टर बंगला के सामने डेरा पहाड़ी जैन मंदिर के गेट से लेकर रेडियो कॉलोनी के नाला तक 14 एकड़ 52 डिसीमल, श्मशान भूमि थी, जिसका सन 1956 में पट्टा सुरेन्द्र जैन के नाम बनाया गया। फिर प्रेमचंद्र जैन ने ये जमीन खरीदकर प्लॉटिंग कर दी। रेडियो कॉलोनी के आगे 1 एकड़ 24 डिसीमल की रजिस्ट्री वाले लोगों को प्रेमचंद्र जैन ने कब्जा दे दिया। वहीं डेरा पहाड़ी की 3 एकड़ 65 डिसीमल जमीन पर प्रेमी जैन ने दूसरे खसरा नबंर की रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों को कब्जा दे दिया। इस मामले में सन 2000 में हाईकोर्ट में 6876 नबंर की जनहित याचिका लगाई गई, हाईकोर्ट ने 1 अप्रेल 2004 को इस पर फैसला सुनाते हुए सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। इस मामले में होईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर 2006 में कोर्ट की आवमानना का केस दायर किया गया। जिस पर तात्कालीन कलेक्टर अजातशत्रु श्रीवास्तव ने एक साल का समय कोर्ट से मांगा। फिर कलेक्टर बदल गए, लेकिन आदेश का पालन आज तक नहीं हो पाया।

सटई रोड पर निजी कर दी सरकारी जमीन
सटई रोड पर गुलाब मैरिज हाउस से लेकर ग्रीन एवेन्यू कॉलोनी तक 26 एकड़ 80 डिसीमल शासकीय जमीन वर्ष 1960-61 में निजी लोगों के नाम चढ़ा दी गई। इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन की जमीन में से 10 एकड़ 1955-56 में बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के पटवारी ने निजी लोगों के नाम दर्ज कर दी। इस मामले में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर वर्ष 2004 में फैसला सुनाते हुए अतिक्रमण हटाने और जमीन को शासकीय दर्ज करने के आदेश दिए थे। वहीं दूसरी सरकारी जमीन को निजी जमीन दर्ज करने के मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका क्रमांक 3386 वर्ष 2009 में लगाई गई थी। जिस पर कोर्ट ने 11 जुलाई 2014 को फैसला सुनाते हुए अतिक्रमण हटाने और जमीन को मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन इस मामले में भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन अधिकारियों ने नहीं किया है।

प्रशासन की उदासीनता ने भूमाफियाओं को मिला बढ़ावा
शहर में सरकारी जमीन की सौदेबाजी के मामले में जिला प्रशासन की उदासीनता और अघोषित संरक्षण के कारण यहां के भूमाफियाओं को खूब बढ़ावा मिला। यही कारण है कि शहर में पन्ना रोड की चरनोई भूमियों पर भी कब्जा हो गया और फर्जी दस्तावेज बनकर तैयार होते चले गए। जमीनें लगातार बिकती रहीं, तहसीलदार से लेकर पटवारी और आरआई व एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक की जानकारी में आने के बाद भी सरकारी जमीन को निजी बनाकर बेचने का खेल चलता रहा। सरकारी जमीनों के मामलों में जो खेल किया गया, वह सभी अपराध की श्रेणी में ही आता है, लेकिन दुर्भाग्य है कि प्रशासन ने अब तक सरकारी जमीनों को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया।

Dharmendra Singh
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