किशोर सागर समेत आठ बड़े तालाबों पर अतिक्रमण, प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई

अतिक्रमण का चिंहाकन और नोटिस के बाद आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई, तालाबों के ग्रीन बेल्ट में भी बस गए मकान
किशोर सागर से सात साल में नहीं हटे अतिक्रमण, अब एनजीटी को जिला कोर्ट को करना पड़ा अधिकृत

By: Dharmendra Singh

Published: 26 Sep 2021, 06:32 PM IST

छतरपुर। शहर के विकास के लिए बनाए गए मास्टर प्लान का पालन नहीं किया जा रहा है। जिला मुख्यालय स्थित आठ तालाबों पर बने ग्रीन बेल्ट पर कॉलोनियां बस गई हैं। ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण रोकने और हटाने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर आदेश भी दे चुकें हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से तालाबों के ग्रीन बेल्ट धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के पहले भी एक कलेक्टर ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण हटाने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रीन बेल्ट इलाके में अतिकमत्र का सर्वे, अतिक्रमण रोकने और अतिक्रमण के केस कोर्ट में पेश करने के लिए जिम्मेदार ग्राम एंव नगर निवेश विभाग ने आजतक एक भी केस अतिक्रमण का न तो बनाया और न ही कोर्ट में पेश किया। इसके साथ ही तहसीलदार की भी जिम्मेदारी है, कि ऐसे अतिक्रमण रोके जाए लेकिन तहसीलदार द्वारा किशोर सागर तालाब की सीमाओं पर हुए अतिक्रमण का चिंहाकन किए जाने के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। यही वजह है कि, शहर के तालाब, तालाबों के कैचमैंच एरिया और ग्रीनबेल्ट में धड़ल्ले से निर्माण किए जा रहे हैं।

इन तालाबों पर बन गए मकान
हाईकोर्ट जबलपुर में छतरपुर निवासी गोविन्द शुक्ला द्वारा वर्ष 2011 में लगाई गई जनहित याचिका में बताया गया कि, शहर के राव सागर तालाब, ग्वाल मंगरा तालाब, प्रताप सागर, रानी तलैया, किशोर सागर, सांतरी तलैया, विंध्यवासनी तालाब और हनुमान टौरिया के पीछे वाली तलैया के ग्रीन बेल्ट में मकान बना लिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में वर्ष 2014 में तात्कालीन कलेक्टर छतरपुर मसूद अख्तर को आदेश देते हुए कहा कि, एक वर्ष के अंदर सभी तालाबों के सीमांकन कराकर, अतिक्रमण के प्रकरण दर्ज किए जाएं। कलेक्टर ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर सभी तालाबों के सीमांकन कराकर तहसील न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराए। लेकिन कोर्ट के आदेश वावजूद इन प्रकरणों का निराकरण आज तक नहीं हो पाया है। न तालाब के ग्रीन बेल्ट के अतिक्रमण को हटाया गया है। हाईकोर्ट के आदेश के अलावा तात्कालीन कलेक्टर राहुल जैन ने वर्ष 2012 में तालाबों के सीमांकन कराकार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी, लेकिन उनके जाने के बाद कार्रवाई ठप हो गई।

अतिक्रमण के इतने मामले
हाईकोर्ट के आदेश पर शहर के तालाबों पर अतिक्रमण के मामलों के चिन्हांकन किए गए. जिसमें 10.50 एकड़ रकबा वाले राव सागर तालाब पर अतिक्रमण के आठ मामले, 9 एकड़ एरिया वाले ग्वाल मंगरा तालाब पर अतिक्रमण के 28 मामले, 35 एकड़ रकबा वाले प्रताप सागर तालाब पर अतिक्रमण के 109 मामले, साढ़े आठ एकड़ के किशोर तालाब पर अतिक्रमण के 14 मामले, 6 एकड़ की सातंरी तलैया पर अतिक्रमण के 7, साढ़े तीन एकड़ रकवा वाले विंध्यवासनी तलैया पर अतिक्रमण के 7 मामले चिन्हित हुए थे।18 साल अक्टूबर 2020 में कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने राजस्व विभाग की 20 सदस्यीय टीम बनाकर शहर के तीन प्रमुख तालाबों किशोर सागर, प्रताप सागर व ग्वाल मंगरा तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा के चिंहाकन व कार्रवाई के निर्देश दिए। टीम ने 10 अक्टूबर को किशोर सागर का भौतिक सत्यापन कर 150 अवैध कब्जों को चिंहित किया, लेकिन उसके बाद न तो नोटिस, न कार्रवाई हुई। वहीं, प्रताप सागर व ग्वाल मंगरा तालाब का भौतिक सत्यापन की कार्रवाई भी ठंड़े बस्ते में चली गई।

किशोर सागर तालाब के मामले में जिला जज करेंगे कार्रवाई
एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में किशोर सागर तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए आदेश दिये थे। तालाब के मूल रकवे, फुल टेंक लेबल भराव क्षेत्र और उसके बाद 10 मीटर में ग्रीन जोन बनाने के आदेश दिए गए थे। एनजीटी में मूल याचिका में जिला कलेक्टर, प्रदूषण विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभागों को भी पक्षकार बनाया गया था। जिनकी दलीलो को भी सुना गया था। इसके बाद एनजीटी का आदेश पारित हुआ था। छतरपुर जिला प्रशासन ने इस आदेश का पालन नहीं किया बल्कि तालाब पर कब्जे बढ़ते गए। जिला कलेक्टर और अन्य सम्बंधित विभागों को कई शिकायते और ज्ञापन सौंपने के बाद भी एनजीटी का आदेश अपमानित होता रहा। यहां तक कि तालाब की पूर्व दिशा पुराने रोजगार कार्यालय के समीप हिस्से में तालाब के पुराने निकासी नाले को क्षतिग्रस्त कर दिया गया वहीँ तालाब के वास्तविक भराव क्षेत्र को रोकने के लिये पत्थर की दीवाल निर्मित करवा दी गई। अब एनजीटी के वर्ष 2014 के आदेश का पालन कराने का अधिकार छतरपुर जिले के न्यायाधीश को सौंप दिया गया हैं।

Dharmendra Singh
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