पर्यावरण प्रेमी थे महाराजा छत्रसाल, इसलिए पानी बचाने कर रहे जागरुक

महाराजा छत्रसाल स्मृति शोद्य संस्थान और पूर्व छात्र परिषद ने पानी बचाने शुरू किया अनोखा अभियान

By: Neeraj soni

Published: 16 May 2018, 01:11 PM IST

छतरपुर। बुंदेलखंड के प्रतापी नरवीर केसरी महाराजा छत्रसाल के जीवन से जुड़े समाजिक सरोकार को यहां के लोगों ने बड़ा अभियान बना लिया है। कभी नदियों, तालाबों से भरपूर रहे बुंदेलखंड के छतरपुर, पन्ना और टीकमगढ़ जिले वर्तमान में गहरे सूखे की चपेट में हैं। प्राचीन तालाब और नदियां सूख गए हैं। जल स्त्रोत तेजी से खत्म हो रही हैं। पानीदार बुंदेलखंड का पानी खत्म होने से बचाने के लिए महाराजा छत्रसाल स्मृति शोद्य संस्थान और विद्या भारती पूर्व छात्र परिषद छतरपुर विभाग ने पानी बचाने के लिए अनोखा जागरुकता अभियान शुरू किया है। संस्थान के लोग पूरे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की प्रेरणा देने वाली पंपलेट का वितरण कर रहे हैं। वहीं घरों में लगे नलों से बहते पानी को भी बचाने के लिए उपाय कर रहे हैं। बूंद-बूंद पानी के संचयन के लिए संस्थान के युवाओं की टीम जिलेभर में काम कर रही है। वहीं प्रदेश स्तर पर भी सभी जिलों में इस अभियान को चलाया जा रहा है।
नदियों से होती थी महाराजा छत्रसाल के राज्य की पहचान :
जल संरक्षण और पर्यावरण के लिए महाराता छत्रसाज ने बड़े स्तर पर काम किया था। उन्होंने धुबेला, छतरपुर, मऊसहानियां, पन्ना सहित अपने राज्य की सीमाओं में जगह-जगह तालाब बनवाए थे। महाराजा छत्रसाल देश के इकलौते ऐसे शासक है जिनके राज्य की सीमाओं की पहचान भी नदियों से होती थी। साहित्यकार सुरेंद्र शर्मा शिरीष बताते हैं कि महाराजा छत्रसाल के राज्य को लेकर यह पंक्तियां - इत यमुना उत नर्मदा, इत चंबल उत टौंस, छत्रसाल से लडऩ की रहू न काहू हौस। अर्थात महाराजा छत्रसाल का राज्य युमाना, नर्मदा्र चंबल और टौंस नदी की सीमाओं तक फैला था।
५२ युद्ध लडऩे वाले छत्रसाल ने हर युद्ध के बाद बनाई थी बाबड़ी :
संस्थान के अध्यक्ष भगवत शरण अग्रवाल और सचिव राकेश शुक्ला राधे ने बताया कि महाराजा छत्रसाल ने अपने जीवन में ५२ बड़े युद्ध लड़े। उन्होंने हर युद्ध के बाद एक बाबड़ी का निर्माण पन्ना में करवाया। पन्ना को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया था। पन्ना जिले में पथरीली जमीन होने के कारण वहां पानी के स्त्रोत बेहद कम थे। इसलिए इसलिए वे हर युद्ध के बाद एक बाबड़ी का निर्माण करवाते थे। इस तरह से उन्होंने अपने पूरे जीवन में पन्ना में 52 बाबडिय़ों का निर्माण करवाया। इन सभी को आपस में जोड़कर बनवाया गया था। ताकि साल भर हर बाबड़ी में पानी रहे। पन्ना में अब भी बहुत सी बाबडिय़ां हैं, लेकिन कई ध्वस्त भी हो चुकी हैं। भगवत अग्रवाल बताते हैं कि महाराजा छत्रसाल की सोच दूरगामी थी। वे पानी के संचयन को लेकर चिंतित रहते थे, इसलिए संस्थान उनके द्वारा शुरू किए गए जल संरक्षण अभियान को पुनर्जीवित करते हुए लोगों को इस दिशा में जागरुक कर रहा है।
227 घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने किया प्रेरित :
विद्या भारती पूर्व छात्र परिषद के जल संरक्षण अभियान के संयोजक आशीष ताम्रकार और सह सहसंयोजक हर्ष अग्रवाल ने बताया कि एक महीने पहले संस्थान और परिषद ने संयुक्त रूप से जल संरक्षण अभियान शुरू किया था। लोगां को बारिश का पानी बचाने के लिए भी प्रेरित किया। इस पर करीब 227 परिवारों ने वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपने घर में लगाने के लिए स्वीकृति दी। अधिकांश घरों में लोगों ने सिस्टम लगवा भी लिया है। इसके अलावा कई संगठनों ने भी आगे आकर इस अभियान में सहभागिता निभाते हुए प्राचीन जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार शुरू कर दिया है।
पानी बचाने यह दिए जा रहे हैं टिप्स पानी :
संस्थान द्वारा लोगों को घर के अंदर पानी बचाने के टिप्स दिए जा रहे हैं। साथही घर के बाहर पानी बचाने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया गया है।
घर के अंदर :
- सेविंग बनाते समय, ब्रश करते समय, सिंक में बर्तन धोते समय नल तभी खोलें जब सचमुच पानी की जरूरत हो
- गाड़ी धोते समय पाइप की बजाय बाल्टी व मग का प्रयोग करें, इससे पर्याप्त पानी बचता है।
- भारत रत्न सचिन तेंदुल्कर केवल एक बाल्टी पानी में नहाते हैं, उनसे प्रेरणा लेकर ऐसा किया जा सकता है।
- ज्यादा बहाव वाला फ्लश टैंक को कम बहाव वाले फ्लश टैंक में बदलें। संभव हो तो दो बटन वाले फ्लश टैंक ही खरीदें।
- जहां कहीं भी नल या पाइप लीक करे तो उसे तुरंत ठीक करवाएं, इससे पानी को बर्बाद होने से रोका जा सकता है।
- नल को लगातार खोले रहने की बजाए अगर बाल्टी में पानी भरकर काम किया जाए तो पर्याप्त पानी बच सकता है।
घर के बाहर :
- सार्वजनिक पार्क, गली, मोहल्ले, अस्पताल, स्कूलों आदि में जहां कहीं भी नल की टोंटियां खराब हों या पाइप से पानी लीक हो रहा हो तो तुरंत संबंधित अधिकारी या व्यक्ति को सूचना दें, इससे हजारों लीटर पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है।
- बाग-बगीचों एवं घर के आस-पास पौधों में पाइप से पानी देने के बजाय वाटर कैन द्वारा पानी देने से काफी पानी बच सकता है।
- बाग-बगीचों में दिन की जगह रात में पानी देना चाहिए, इससे पानी का वाष्पीकरण नहीं हो पाता एवं पौधों की अच्छी सिंचाई हो सकती है।
- कृषि के लिए सिंचाई के लिए कम लागत की आधुनिक तकनीकों को अपनाना जल संरक्षण के लिए उपयोगी है।
पानी की बचत के स्थाई उपाय :
- अधिक से अधिक पौधारोपण।
- बारिश के पानी को संचित करना।
- घर में पानी की टंकी में वाटर ओवर फ्लो अलार्म लगाएं
- उतना ही पानी ले जितना पीना है।
- सार्वजनिक जल आपूर्ति के पानी को व्यर्थ बहने से रोकें।

Neeraj soni Reporting
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