समर्थन मूल्य नहीं मांग के हिसाब से तय हो रहे किसानों की फसल के दाम

उड़द, तिल की मांग ज्यादा तो समर्थन मूल्य से मिल रहे ज्यादा दाम
गेहूं, मूंगफली की मांग कम तो समर्थन मूल्य से भी कम मिल रही कीमत

By: Dharmendra Singh

Published: 20 Nov 2020, 08:10 PM IST

छतरपुर। कृषि उपज मंड़ी प्रांगण हो या परिसर के बाहर, किसानों की उपज समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही है, बल्कि बाजार में मांग और सप्लाई के फार्मूला से उपज के दाम तय हो रहे हैं। जिन उपज की पैदावर कम है, लेकिन बाजार में उनकी मांग है, तो किसानों को ऐसी उपज के दाम समर्थन मूल्य से भी ज्यादा मिल रहे हैं। वहीं, जिन उपज की पैदावार अधिक हुई है, लेकिन मांग नहीं हैं, उन उपज के दाम किसानों को समर्थन मूल्य से भी कम मिल पा रहे हैं।

तिल और उड़द की मिल रही अच्छी कीमत
कृषि उपज मंड़ी हरपालपुर में शुक्रवार को तिल और उड़द की मांग रहीं, जिसके चलते इन दोनों उपज के दाम समर्थन मूल्य से ज्यादा किसानों को मिले। तिल का समर्थन मूल्य 6855 रुपए प्रति क्विंटल हैं, लेकिन मांग के चलते शुक्रवार को तिल 8100 से लेकर 8300 रुपए प्रति क्विंटल दाम पर बिकी। वहीं, खरीफ फसल खराब होने के कारण उड़द की उपज कम हुई है, लेकिन बाजार में मांग बनी हुई है, जिसके चलते 6000 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य वाली उड़द मंड़ी व मंड़ी के बाहर किसानों को प्रति क्विंटल 6200 से 6400 रुपए मिले।

गेहूं व मूंगफली को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य
हरपालपुर इलाके में मूंगफली की अच्छी पैदावार हुई है, लेकिन मांग कम होने से मूंगफली समर्थन मूल्य से भी कम दाम पर बिक रही है। शुक्रवार को मूंगफली 3500 से 3700 रुपए प्रति क्विंटल बिकी जबकि मूंगफली का समर्थन मूल्य 5275 रुपए है। इसी तरह गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रुपए है, लेकिन शुक्रवार को किसानों को गेहूं का दाम प्रति क्विंटल 1520 रुपए तक ही मिल सके।

दाम सही नहीं मिलने पर वापस लौट रहे किसान
अपनी उपज बेचने कृषि मंड़ी आ रहे किसान सही दाम न मिलने पर वापस भी लौट रहे हैं। शुक्रवार को भदर्रा से एक ट्रॉली मूंगफली लेकर कृषि उपज मंड़ी हरपालपुर आए किसान रामसनेही ने मूंगफली के दाम कम मिलने पर उपज न बेचने का फैसला किया और वापस लौट गए। रामसनेही का कहना है कि अब के एक-दो दिन बाद दाम ठीक होने पर दोबारा मंड़ी आएंगे।वहीं, किसान जयपाल 5 क्विंटल उड़द लेकर मंड़ी आए थे, जिन्हें समर्थन मूल्य से बेहतर दाम मिले तो उन्होंने अपनी उपज बेच दी।

Dharmendra Singh
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