किसानों को नहीं मिली फसल बीमा की राशि, सीएम हेल्पलाइन पर 80 शिकायतें

कंपनी नहीं दे रही जवाब
कलेक्टर ने फसल बीमा कंपनी के भोपाल हेड को लिखे 4 पत्र, लेकिन कंपनी ने साफ नहीं की स्थिति
एक साल बाद बीमा क्लेम देने का आया समय तो कंपनी ने प्रीमियम राशि लौटकर झाड़ लिया जिम्मेदारी से पल्ला

By: Dharmendra Singh

Updated: 17 Oct 2020, 09:28 PM IST

छतरपुर। खरीफ 2019 में फसल बीमा कराने वाले जिले के 13 हजार 441 किसानों को फसल बीमा का लाभ अभी तक नहीं मिला है। फसल बीमा कंपनी ने प्रीमियम जमा होने के एक साल बाद क्लेम देने के समय बीमा प्रीमियम ही वापस कर दिया है। जिससे किसान परेशान हैं। जिले के 80 किसानों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की है, लेकिन वहां से भी अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। फसल बीमा कंपनी ने एक साल बाद फसल बीमा की राहत राशि देने के बजाए प्रीमियम राशि लौटकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में फसल का बीमा कराने और प्रीमियम जमा करने वाले किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

प्रशासन व किसानों को बीमा कंपनी रखे है अंधेरे में
किसानों को फसल बीमा राशि का भुगतान न होने पर कृषि विभाग ने कलेक्टर के माध्यम से फसल बीमा कंपनी को कई बार पत्राचार किया। कलेक्टर ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के भोपाल हेड को पत्र लिखकर कहा कि कंपनी फसल बीमा राशि के भुगतान के बारे में स्थिति स्पष्ट करे, ताकि किसानों को पता चल सके कि उन्हें फसल बीमा की क्लेम राशि मिलेगी या नही। लेकिन फसल बीमा कंपनी ने कलेक्टप के पत्र का कोई जवाब नहीं दिया है। कंपनी ने ये भी साफ नहीं किया है कि जिले के बाकी 13 हजार किसानों को फसल बीमा राशि मिलेगी या नहीं। वहीं, कंपनी का स्थानीय प्रबंधन भी किसानों की समस्या से पल्ला झाड़ रहा है। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के जिला मैनेजर शिवनंदन त्रिपाठी ने पत्रिका को बताया कि उनके पास अभी तक 13 हजार किसानो ंकी बीमा राशि के बारे में कंपनी से अपडेट नहीं मिला है। यानि कंपनी किसानों को फसल बीमा की राशि को लेकर स्थिति साफ नहीं कर रही है। बल्कि प्रशासन और किसानों को अंधेरे में रखा गया है।

जिले के किसानों ने जमा कराई थी 1 करोड़ से ज्यादा की प्रीमियम राशि
जिले के 16 हजार 754 किसानों ने खरीफ 2019 की फसल के लिए 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का बीमा प्रीमियम जमा कराया था। फसल बीमा का प्रीमियम जमा कराने वाले जिले के 13 हजार किसानों को बीमा क्लेम राशि का भुगतान नहीं किया गया है। जिले के सिर्फ 3 हजार 313 किसानों को 6 करोड़ 72 लाख रुपए बीमा राशि का भुगतान किया गया है। जबकि जिले में खरीफ 2019 की फसल में उड़द, सोयाबीन, तिल और मूंग का नुकसान 100 फीसदी और मूंगफली का 50 फीसदी आंकलित किया गया था। ऐसे में बीमा राशि 54 करोड़ रुपए का भुगतान होना चाहिए, लेकिन 6 करोड़ 72 लाख का भुगतान ही हुआ है। जिले के 13 हजार से ज्यादा किसान ऐसे हैं जो रोज बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। बैंक किसानों को फसल बीमा कंपनी के पास जाने को कह रहे हैं और बीमा कंपनी बैंकों के पास भेजकर किसानों को चक्कर लगवा रहे हैं। एक महीने से चक्कर लगा रहे किसानों की समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।

कई वर्षो से किसानों के साथ हो रहा ऐसा
फसल बीमा कराने वाले ज्यादातर किसानों को बीमा क्लेम की राशि न देने का सिलसिला कई वर्षो से चल रहा है। महाराजपुर के प्रगतिशील किसान चितरंजन चौरसिया ने बताया कि वर्ष 2016 से बीमा प्रीमियम जमा कर रहे हैं। वर्ष 2019 में भी उन्होंने बीमा प्रीमियम राशि निवारी सोसायटी से जमा कराई थी। लेकिन कभी उन्हें फसल बीमा राशि का क्लेम नहीं मिला है। डोंगरपुरा के किसान ओमप्रकाश, मुंगवारी के किसान रविकांत, मन्नूलाल, धनीराम यादव व सुमदरलाल मिश्रा ने बताया कि बीमा प्रीमियम जमा कराई थई, लेकिन फसल नुकसान पर मुआवजा नहीं दिया गया। कैथोकर के किसान मनोहर सिंह, सज्जन सिंह और कमलेश रावत ने बताया कि उन्होंने खरीफ 2019 में उड़द, मूंग और मूंगफली की फसल का बीमा कराया था, लेकिन बीमा क्लेम अबतक नहीं मिला है। ललौनी के हरवेन्द्र सिंह ने बताया कि चार साल से बीमा प्रीमियम की राशि जमा कर रहे हैं। लेकिन बीमा की राशि तो मिली नहीं, बल्कि बीमा कंपनी का दफ्तर ही बदल गया है।

अभी अपडेट नहीं आया है
जिले के 3313 किसानों को बीमा क्लेम दिया गया है, बाकी 13 हजार किसानों के बीमा क्लेम के संबंध में अभी तक कोई अपडेट कंपनी की ओर से नहीं आया है। प्रीमियम उन किसानों का लौटाया गया है, जिनके आधार वेरीफि केशन नहीं हुए हैं।
शिवनंदन त्रिपाठी, मैनेजर, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया

कंपनी साफ नहीं कर रही स्थिति
फसल बीमा को लेकर किसानों की समस्या को देखते हुए कलेक्टर के माध्यम से फसल बीमा कंपनी के भोपाल हेड को तीन से 4 पत्र लिखे गए हैं, ताकि वे किसानों को फसल बीमा की राशि के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें, लेकिन कंपनी के द्वारा कोई रिसपांस नहीं दिया जा रहा है।
मनोज कश्यप, उप संचालक कृषि

Dharmendra Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned