जिले के किसानों को केवल एक बार ही मिल पाएगा रबी फसल के लिए पानी

पिछले साल की तुलना में 19 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता घटी
जलभराव कम होने से 72 हजार हेक्टेयर के लिए ही उपलब्ध है पानी

By: Dharmendra Singh

Published: 27 Oct 2020, 08:31 PM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। बारिश के सीजन में इस साल औसत से भी कम बारिश होने का असर रबी फसल की सिंचाई के लिए मिलने वाले पानी पर पड़ेगा। जल संसाधन विभाग अपने बांधों से इस साल जिले के केवल 72 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए ही पानी दे पाएगा। वो भी सिर्फ एक बार ही दिया जाएगा। जल संसाधन विभाग के 8 बड़े बांधो में इस बार औसत 51.5 फीसदी जलभराव हुआ है, जिसके चलते पिछले साल की तुलना में 19161 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कम हो पाएगी। पिछले साल जिले में 91161 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई बांधो से की गई थी, जो इस बार 72 हजार हेक्टेयर तक ही हो पाएगी।

28 इंच हुई है इस साल बारिश
जिले की औसत बारिश 42 इंच हैं, जबकि इस साल केवल 28 इंच बारिश हुई है। जबकि पिछले साल 49 इंच बारिश हुई थी। बारिश कम होने से जिले के आठ बड़े बांधों में जलभराव की स्थिति असमान है। कुल क्षमता का केवल 51.5 फीसदी ही जलभराव हुआ है, जिससे सिंचाई के लिए इस बार केवल एक बार पानी नहरों के जरिए दिया जाएगा।

कम पानी वाली फसल बोने की सलाह
सिंचाई विभाग ने पानी की उपलब्धता कम होने से किसानों को रबी सीजन में कम पानी वाली फसल बोने की सलाह दी है। विभाग ने चना, सरसों, मटर जैसी कम पानी वाली फसल बोने की सलाह जारी की है। जिले में रबी के सीजन में मुख्य रुप से गेहूं की बोवनी की जाती है, जिसके लिए तीन से चार बार पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन जलभराव कम होने के कारण बांधों से किसानों को गेहूं के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा। जिन किसानों के पास सिंचाई के खुद के साधन हैं, उन्हें गेहूं की फसल लगाने में परेशानी नहीं हैं। लेकिन नहरों पर निर्भर किसान गेहूं की बोवनी करने पर पानी की समस्या से जूझ सकते हैं।


फैक्ट फाइल
जलभराव की स्थिति
बेनीगंज 48
बूढ़ा 46
गोरा टैंक 07
कुटनी 77
रनगुवां 37
सिंहपुर 89
तारपेड़ 92
उर्मिल 16


फैक्ट फाइल सिंचाई

वर्ष सिंचित की गई भूमि
2016-17 85691 हेक्टेयर
2017-18 33401 हेक्टेयर
2018-19 80335 हेक्टेयर
2019-20 91161 हेक्टेयर
2020-21 72000 हेक्टेयर

जलभराव कम

बारिश कम होने से इस बार जलभराव कम हुआ है, इससे इस बार 72 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए ही पानी उपलब्ध हैं। किसानों को चना, मटर और सरसों जैसी कम पानी वाली फसल लगाने की सलाह दी गई है।
आइबी नायक, इइ, जल संसाधन विभाग

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