कोरोना वायरस के डर से ग्रामीण घरों में कैद हुए लोग, खेतों में खड़ी को फसल को काटने नहीं मिल रहे मजदूर

मजदूर बोले-‘जान है तो जहान है’

छतरपुर. जिले में कोराना वायरस से ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग घरों से निकलने के लिए कतरा रहे हैं। लोग अपने घरों में ही सुबह से लेकर शाम तक कैद रह रहे हैं। जिससे कटने की कगार में खड़ी फसलों के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। जो किसानों के लिए खासी चिंता का कारण बनी हुई है। लोगों द्वारा अपने फसल कटवाने के लिए सुबह शाम काम करने वाले लोगों के यहां पर चक्कर लगा रहे हैं। जिले में रबी की फसल की कटाई के दौरान अधिकांश किसानों को एलर्जी के कारण खांसी व जुकाम की समस्या हो जाती है। कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर किसान और मजदूर चिंतित बने हुए हैं। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने लिए केंद्र और सरकार प्रदेश गंभीर बनी हुई है। सरकार द्वारा विभिन्न तरीकों से आम लोगों को जागरुक किया जा रहा है। भीड़ को जुटने से रोकने के लिए विद्यालय, कॉलेज व परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। रेलवे द्वारा ट्रेनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। वहीं लॉकडाउन कर दिया गया है। जिससे कारण स्थिति यह है कि किसानों को फसल काटने के लिए मजदूर तक नहीं मिल रहे हैं। अब किसानों को इसे काटने का इंतजार है। लेकिन कोरोना को लेकर किसानों में फसल कटने की चिंता सताने लगी है। किसानों ने बताया कि गेहूं व जवा की फसल पक चुकी है और कटाई शुरू होने वाली है। लेकिन मजदूर कोरोना वायरस को लेकर फसल को काटने से कतरा रहे हैं।
मजदूरों की कमी और बढ़ती दैनिक मजदूरी के कारण बीते कुछ सालों से जिले के किसान बाहरी मजदूरों का सहारा लेने लगे हैं। छतरपुर में किशनगढ़, बिजावर सहित आदिवासी बाहुल्य इलाकों से खेतों में काम करने के लिए मजदूर लाए जाते हैं। लेकिन ऐसे हालात में वहां से भी मजदूर नहीं आ पा रहे हैं।

 

Sanket Shrivastava Desk/Reporting
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