कर्ज की राशि काटकर किसानों को मिलेगा फसल का भुगतान, इसलिए मंडी जा रहे किसान

खरीदी केन्द्र पर उपज बेचने वाले किसानों के कर्ज की होगी वसूली, मिलेगी बाकी राशि
खरीद केन्द्रों पर ढुलाई, पल्लेदारी का किसान को ही लग रहा खर्च

By: Dharmendra Singh

Published: 16 Apr 2021, 07:35 PM IST

छतरपुर। जिले में 49 केन्द्रों पर चना-सरसों और 145 केन्द्रों पर गेहूं की खरीदी की जा रही है। लेकिन खरीदी केन्द्रों पर किसान कम आ रहे हैं। क्योंकि किसानों की उपज का भुगतान कर्ज की राशि काटकर किया जाना है। ऐसे में ज्यादातर कर्जदार किसान उपार्जन केन्द्रों पर उपज बेचने के बजाए मंड़ी में बेच रहे हैं। बाजार मूल्य समर्थन मूल्य से ज्यादा होने की वजह से भी किसान बाजारों का ज्यादा रुख कर रहे हैं। इतना ही नहीं खरीदी केन्द्रों पर किसानों को सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

ग्रामीण केन्द्रों पर पल्लेदारो की समस्या
जिले में 145 गेहूं उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में जमकर अव्यवस्थाएं हैं। अधिकारी इन दिनों कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने में जुटे हैं इसका भरपूर फायदा गेहूं खरीदी में लगे कर्मचारी और अधिकारी उठा रहे हैं। अधिकांश केंद्रों पर पल्लेदारों की व्यवस्था नहीं है। किसानों को स्वयं ही गेहूं उतारकर बोरियां में भरकर तुलाई कराना पड़ रही है और उसके बाद बोरियों को केंद्र में रखना पड़ रहा है। किसानों के पल्लेदारी करने के बाद भी उन्हें पल्लेदारी की राशि नहीं दी जा रही है। केंद्रों पर किसानों को ही गेहूं ट्रैक्टरों से उतारना पड़ रहा है। अपनी बोरियों से निकालकर केंद्र की बोरियों में भरना पड़ रहा है, तुलाई कराने के बाद बोरियों को उठाकर रखना भी पड़ रहा है। यह परेशानी नौगांव तहसील क्षेत्र के गेहूं खरीदी केंद्र लुगासी, गर्रोली, अलीपुरा, हरपालपुर, छतरपुर तहसील क्षेत्र के ईशानगर, ढड़ारी, मातगुवां, बकस्वाहा के मड़देवरा केद्रों में देखने को मिल रही है। लवकुशनगर और गौरिहार क्षेत्र के अधिकांश खरीदी केंद्रों में पल्लेदार गायब हैं और किसान ही पल्लेदार बने हुए हैं।

बैंक के खाता के लिए कर रहे मजबूर
जिले के कुछ खरीदी केंद्रों पर किसानों का गेहूं इसलिए नहीं खरीदा जा रहा है क्योंकि उनके खाता सहकारी बैंक या समितियों में नहीं हैं। इस कारण उनका भुगतान रोकने की धमकी दी जा रही है। ऐसा ही मामला गेहूं उपार्जन केंद्र ढड़ारी में सामने आया था। यहां गेहूं लेकर पहुंचे किसानों का गेहूं लेने से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि इस किसानों का खाता क्योस्क में हैं। महाप्रबंधक सहकारी बैंक के हस्तक्षेप के बाद इन किसानों का गेहूं लिया गया।

ये कहना है किसानों का
नाउ पहारिया निवासी किसान माधव का कहना है कि सोसायटी के कर्ज की राशि फसल की कीमत से काटी जाना है। फसल की आधी राशि ऋण में काट लिए जाने से किसान के पास क्या बचेगा। इसलिए किसान बाजार में जा रहे हैं, ताकि जो भी मिलेगा वो इस कोरोना संकटकाल में उनके लिए मददगार होगा। वहीं, कुकरेल निवासी किसान भगवानदास का कहना है कि खरीद केन्द्रों पर किसानों की सुविधाओं के लिए कई नियम बनाए गए हैं। लेकिन सुविधाएं मिल नहीं रही है। किसानों को पल्लेदारी तक करनी पड़ रही है। यही सब देखते हुए किसान मंड़ी जा रहे हैं।

Dharmendra Singh
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