scriptfor compassion the Divyang is running till Bhopal | ये कैसा सुशासन, अनुकंपा के लिए दिव्यांग भोपाल तक लगा रहा दौड़ | Patrika News

ये कैसा सुशासन, अनुकंपा के लिए दिव्यांग भोपाल तक लगा रहा दौड़


दिवंगत मां के जगह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए 6 साल से परेशान है दिव्यांग युवक
इधर, वीडी शर्मा ने चिट्ठी लिखी, फिर भी नहीं हटा भाजपा मंड़ल अध्यक्ष की जमीन से कब्जा

छतरपुर

Published: August 04, 2021 05:16:48 pm


छतरपुर। राज्य सरकार प्रदेश में सुशासन के लिए प्रयासरत है, लेकिन जिले स्तर पर प्रशासनिक उपेक्षा के चलते जरूरतमंदों को मदद नहीं मिल पा रही है। लवकुशनगर इलाके के परसनियां गांव का दिव्यांग युवक मां के निधन के बाद से अनुकंपा नियुक्ति के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। लेकिन जिले में सुनवाई नही होने से अब युवक ने भोपाल तक दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं, दूसरी ओर अपनी जमीन का कब्जा छुड़वाने के लिए भाजपा मंडल अध्यक्ष परेशान है। प्रदेशाध्यक्ष के पत्र के वाबजूद मंडल अध्यक्ष की परेशानी दूर नहीं हो पा रही है।
भोपाल में मंत्री और सांसद को दुखड़ा सुनाकर लौटा अंशुल का परिवार
भोपाल में मंत्री और सांसद को दुखड़ा सुनाकर लौटा अंशुल का परिवार

भोपाल में मंत्री और सांसद को दुखड़ा सुनाकर लौटा अंशुल का परिवार
लवकुशनगर क्षेत्र के ग्राम परसनियां का रहने वाला अंशुल गौड़ 6 साल पहले आगजनी के कारण मौत की शिकार हुईं अपनी मां की अनुकम्पा नियुक्ति पाने के लिए अब भी दर-दर की ठोकरें खा रहा है। एक गंभीर बीमारी के शिकार अंशुल को चलने-फिरने और खड़े होने में भी समस्या होती है। मां-बाप के गुजरने के बाद उसकी पत्नी और दो बहनें उसी पर आश्रित हैं। इसके बावजूद उसे अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। अंशुल गौड़ ने बताया कि वह भोपाल में क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं शिक्षा मंत्री के आवास पर उनसे मिलने गया था। जहां उसकी मुलाकात तो नहीं हुई लेकिन उनके कार्यालयों में आवेदन सौंपकर लौट आया। चलने में हो रही दिक्कत के कारण अंशुल की पत्नी को ही उसे गोद में लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना पड़ता है।
विभाग नहीं मान रहा पात्र
इस मामले में शिक्षा विभाग द्वारा अंशुल को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दिए जाने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि अंशुल की मां 6 साल पहले जब दिवंगत हुईं तब वे संविदा शिक्षक थीं। इसलिए उनकी अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान नहीं है। इस मामले में अंशुल को एकमुश्त एक लाख रूपए की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उधर अंशुल उक्त दोनों आरोपों को दस्तावेजों के साथ खारिज करता है। अंशुल का कहना है कि उसकी मां अध्यापक रहते हुए मौत की शिकार हुई थीं उसने अनुग्रह राशि भी प्राप्त नहीं की है। अंशुल के मुताबिक प्रावधान के तहत उसे प्रयोगशाला शिक्षक के रूप में नियुक्ति दी जा सकती है लेकिन विभाग आनाकानी कर रहा है।

एसडीएम के आदेश के बावजूद अपने ही प्लाट पर कब्जे के लिए 6 साल से परेशान मंडल उपाध्यक्ष
अपनी ही पार्टी की सरकार होने एवं एसडीएम न्यायालय के द्वारा अपने पक्ष में फैसला किए जाने के बाद भी भाजपा के चंदला मंडल उपाध्यक्ष धु्रव कुमार मिश्रा सिस्टम से हार गए। लगभग 6 साल से वे अपने एक प्लाट पर कब्जे को पाने एवं शासकीय रास्ते से दो लोगों के अवैध कब्जे को हटाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में एसडीएम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला भी दिया लेकिन फिर भी कब्जा हटाया नहीं जा सका है। मंडल उपाध्यक्ष अपनी ही सरकार में चल रही इस लापरवाही से दुखी हैं और प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर न्याय मांग रहे हैं।
ये है मामला
धु्रव कुमार मिश्रा ने सीएम हेल्पलाइन सहित एसडीएम, कलेक्टर कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि चंदला में उनका एक प्लाट है जिसके सामने मौजूद शासकीय रास्ते पर रज्जू अहिरवार और सुरेन्द्र राजपूत के द्वारा कब्जा किया गया था। इस मामले में वे पहले तहसील न्यायालय में लड़ाई लड़ते रहे और इसके बाद एसडीएम कोर्ट भी गए। एसडीएम कोर्ट ने अक्टूबर 2020 में इस मामले में फैसला करते हुए कहा कि तहसीलदार मय पुलिस बल के रज्जू अहिरवार और सुरेन्द्र राजपूत का अवैध कब्जा हटवाएं। जब तहसीलदार ने इस आदेश को नहीं माना तो मंडल अध्यक्ष ने क्षेत्रीय विधायक राजेश प्रजापति को अपनी पीड़ा सुनाई उन्होने भी एसडीएम से न्याय दिलाने के लिए फोन पर चर्चा की फिर भी कब्जा नहीं हटा। धु्रव मिश्रा कहते हैं कि दलित परिवार होने के कारण रज्जू अहिरवार के बेटों ने न सिर्फ शासकीय जमीन पर बल्कि अब उनके प्लॉट पर भी कब्जा ठोक दिया है। इस संंबंध में उन्होंने भोपाल जाकर पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष को अपनी पीडा सुनाई। वीडी शर्मा ने पार्टी के नेता को न्याय दिलाने के लिए 22 जनवरी 2021 को कलेक्टर को पत्र लिखा। कलेक्टर ने उक्त पत्र पर तत्काल कार्यवाही के लिए एसडीएम को निर्देशित किया लेकिन 6 महीने गुजरने के बाद भी शासकीय जमीन एवं धु्रव मिश्रा के प्लाट पर कब्जा हटा नहीं है।

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