scriptForest land given in lieu of forest land for diamond mine, feat of re | हीरा खदान के लिए वन भूमि के बदले दी वन भूमि, राजस्व विभाग का कारनामा | Patrika News

हीरा खदान के लिए वन भूमि के बदले दी वन भूमि, राजस्व विभाग का कारनामा

संरक्षित वन ब्लॉक का रिकॉर्ड गायब, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मांगी जांच रिपोर्ट

छतरपुर

Published: May 04, 2022 07:51:03 pm

छतरपुर. हीरा खदान के लिए वन भूमि के बदले दी गई भूमि के मामले में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तकनीकि अधिकारी वन ने मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव वन से जांच कराकर रिपोर्ट मांगी है। बकस्वाहा में हीरा परियोजना के लिए वन भूमि के बदले राजस्व विभाग द्वारा अपनी जमीन के नाम पर वन भूमि को ही वन विभाग को हस्तांतरित करने की शिकायत हुई है। जांच रिपोर्ट आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय दुबे की शिकायत पर मांगी गई है।

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जिसमें लिखा गया है कि रीवा राज दरबार (विंध्य सरकार) ने अपने 6-8 फरवरी 1937 के आदेश द्वारा राजस्व ग्रामों की भूमियों को संरक्षित वन आदेशित किया था, जिसके आधार पर विंध्य प्रांत सरकार वन विभाग द्वारा सर्वे डिमार्केशन की कार्यवाहियां की गई, जो वर्तमान में भी विभिन्न स्तरों पर लंबित है। रीवा राज दरबार द्वारा 1937 में संरक्षित आदेशित की गई भूमियों को राजस्व विभाग के अभिलेखों में संशोधित कर संरक्षित वन दर्ज किए जाने बाबत कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई, जिसे आधार बनाकर 1937 में संरक्षित वन आदेशित भूमियों को राजस्व भूमि बताया जाकर वन भूमि के बदले वैकल्पिक पौधरोपण के लिए कलेक्टर पुन: वन विभाग को आवंटित कर रहे हैं और वन विभाग उन्हें भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 29 के अनुसार दोबारा संरक्षित वन भूमि अधिसूचित कर रहा है।

संरक्षित वन ब्लॉक का रिकॉर्ड गायब
पत्र में कहा गया है कि छतरपुर वन मंडल कार्यालय रीवा राज दरबार द्वारा 1937 में संरक्षित वन अधिसूचित भूमियों से संबंधित विभागीय संरक्षित वन सर्वे डिमार्केशन रिपोर्ट, डीसीआर पंजी, भा.व.अ. की धारा 4 एवं धारा 34 अ के अनुसार राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं से प्रस्तावित भूमि का मिलान नहीं करता है।

छतरपुर वन मंडल कार्यालय से संरक्षित वन ब्लॉक हिस्ट्री जैसा सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज ही गायब कर दिया गया है। जिसके कारण वन मंडल स्तर से प्रस्तावित भूमि का मिलान नहीं किया जा सका है। इस कारण छतरपुर के पूर्व कलेक्टर द्वारा 25 दिसंबर 20 को जारी आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही रीवा राज दरबार के आदेश दिनांक 6-8 फरवरी 1937 से संरक्षित वन आदेशित भूमि को राजस्व बंजर मद की भूमि बताकर दी गई अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

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