गिरजा देवी के हाथ के बने गोबर गणेश बनते हैं विवाह रस्मों के साक्षी

Neeraj soni

Publish: Apr, 17 2018 12:10:14 PM (IST)

Chhatarpur, Madhya Pradesh, India
गिरजा देवी के हाथ के बने गोबर गणेश बनते हैं विवाह रस्मों के साक्षी

अपने अनोखे शौक के कारण सबकी चहेती बनी

छतरपुर. शहर के घरों में शादी-विवाह के मांगलिग गीत गंजूते ही लोग गिरजादेवी को सबसे पहले याद करते हैं। भगवान गणेश की मां का नाम भी गिरजा था, लेकिन यहां पर बात हो रही है एक व्यवसायी परिवार की महिला गिरजादेवी गुप्ता की। दरअसल वे गोबर के गणेश बनाकर शादी-विवाह वाले घरों के लोगों को सालों से निशुल्क देती चली आ रही हैं। इसलिए जब भी किसी घर में शादी की तेयारी होती है तो लोग सबसे पहले गिरजा देवी को याद करते हैं। उनके हाथ से बने गोबर गणेश शहर की अधिकाशं शादियों के साक्षी बनते हैं। गिरजा देवी यह काम अपने आत्मसुख के लिए करती हैं।
शहर के गल्ला मंडी में अन्नपूर्णा मंदिर के सामने रहने वाले मिष्ठान व्यवसायी नाथूलाल गुप्ता की पत्नी एवं पार्षद सोनू गुप्ता की मां गिरजा देवी अपने अनोखे काम को लेकर इस पूरे क्षेत्र में परिवार से भी अलग पहचान रखती हैं। वे पिछले १5 सालों से गोबर की गणेश प्रतिमाएं बनाकर लोगों को बांटती हैं। बुंदेलखंड में शादियों के समय गोबर के गणेश को मंडप के नीच रखकर वैवाहिक रस्में पूरी करने की परंपरा है। इसलिए यहां पर गोबर की गणेश प्रतिमा का खास महत्व है। शादी वाले घरों में इस मूर्ति की डिमांड अधिक होती है, लेकिन लोग बना नहीं पाते और प्रतिमा बाजार में भी नहीं मिलती है, लिहाजा लोग इस काम के लिए गिरजा देवी को याद करते हैं। हर साल गिरजादेवी दर्जनों की संख्या में गणेश प्रतिमाएं बनाकर निशुल्क बांटती हैं। इन दिनों शहर में शादियों का सीजन चल रहा है। इसलिए गिरजादेवी की व्यवस्तता भी ज्यादा बढ़ गई है। एक-एक दिन में वे 7 से 8 प्रतिमाएं बनाकर बांट रही हैं।
गाय के गोबर से बनाती है गणेश, खुद ही करती हैं श्रृंगार :
गिरजादेवी गुप्ता गणेश प्रतिमा गाय के ही गोबर से बनाती हैं। वे प्रतिमा बनाने के बाद उसे सुखाती हैं और फिर उसकी सजावट भी खुद ही करती हैं। इसके लिए वे अपने रुपयों से ही सजावट का सामान बाजार से लाती हैं और अपने पास हर समय उसे रखे रहती हैं। शादियों के बारे में जानकारी लगते ही वे बिना कहे ही लोगों के लिए गोबर के गणेश बनाकर रख लेती हैं। उनके घर में शादी के सीजन में हर समय 5 से 8 प्रतिमाएं एडवांस में उपलब्ध रहती हैं, ताकि किसी को बिना मूर्ति के लौटना न पड़े। गिरजा देवी बताती हैं कि लोग अलग-अलग तरीके से दान-पुण्य और परोपकार करते हैं। वे भी इस तरीके से कुछ पुण्य कमा लेती हैं। इसके अलावा और क्या चाहिए। भगवान का दिया हुआ सब कुछ है। अच्छा परिवार है, सभी सुखी है। किसी को कोई तकलीफ नहीं है। यह सब भगवान गोबर गणेश की ही तो कृपा है।

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