रॉक फास्फेट खदान को शासन की हरी झंड़ी, जनवरी में होगी नीलामी

122 हेक्टेयर में डीएपी खाद बनाने वाले रॉक फॉस्फेट के नीलामी का है प्रस्ताव
रॉक फास्फेट खदान का ज्यूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम कर चुकी है वेरीफिकेशन

By: Dharmendra Singh

Published: 26 Dec 2020, 07:58 PM IST

छतरपुर। जिले के मड़देवरा इलाके में 122 हेक्टेयर भूमि से रॉक फॉस्फेट के उत्खनन की योजना को शासन ने हरी झंड़ी दे दी है। जनवरी में खदानों की नीलामी प्रक्रिया शुरु होने की संभावना है। ज्यूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआइ) ने छतरपुर जिले के मड़देवरा में 57 लाख मीट्रिक टन रॉक फास्फेट के भडार को चिंहित किया है। जिसके आधार पर जिला खनिज विभाग ने शासन को 122 हेक्टेयर में रॉक फॉस्फेट की दो खदानों की नीलामी का प्रस्ताव अक्टूबर 2020 में भेजा था। अब शासन द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से खदान नीलामी का रास्ता साफ हो गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक जनवरी में खदान की नीलामी प्रक्रिया शुरु होना है।

जीेएसआइ के सर्वे में मिला भंडार
खनिज विभाग और जीएसआइ के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें जीएसआइ ने मड़देवरा ब्लॉक में 57 लाख मीट्रिक टन रॉक फास्फेट के भंडार का आंकलन लगाया है। 122 हेक्टेयर में 67 हेक्टयेर जमीन रॉक फास्फेट के खनन और 37 हेक्टेयर जमीन नॉन मिनरलाइज्ड होगी। 67 हेक्टेयर क्षेत्र में से 15 से 20 हेक्टेयर में रॉक फॉस्फेट की मात्रा अधिक है, वहीं 2 किलोमीटर लंबे और 2 किलोमीटर चौड़े हिस्से में लगभग 15 से 20 लाख मीट्रिक टन रॉक फॉस्फेट की उपलब्धता का आंकलन किया गया है।

उर्वरक निर्माण के उपयुक्त है जिले का रॉक फॉस्फेट
जिले के मड़देवरा इलाके में उलब्ध रॉक फास्टफेट का भंडार उर्वरक निर्माण के लिए उपयक्त है। हालांकि खदान में ज्यादातर मात्रा 18 से 20 पी2ओ 5 ग्रेड का है, जो लो क्वालिटी के अंतर्गत आता है। जबकि 24 प्लस पी 2ओ5 ग्रेड की मात्रा उवर्रक संयंत्र के लिए सप्लाई होता है। वहीं, क्षेत्र में 42 से 34 पी2ओ5 ग्रेड का रॉक फास्फेट का भी भंडार है। जैविक खाद बनाने के लिए गोबर तथा रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। रॉक फॉस्फेट की मदद से रासायनिक क्रिया करके सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी)तथा डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) रासायनिक उर्वरक तैयार किए जाते हैं। खनिज फास्फेटों का सर्वाधिक प्रयोग फास्फेट उर्वरकों के निर्माण में होता है। रॉक फॉस्फेट की खदान से निकाले गए फास्फेटीय चट्टान को चूर्ण करके सल्फयूरिक अमल के साथ मिलाकर सुपरफास्फेट बनता है। इस पदार्थ का प्रयोग उर्वरक के रूप में अत्यधिक होता है। साधारण फास्फेटीय चट्टान के चूर्ण में 30 से 40 प्रतिशत फास्फोरस पेंटॉक्साइड, 3-4 प्रतिशत फ्लोरीन तथा भिन्न मात्राओं में चूना रहता है।

माइनिंग उद्योग से मिलेगा रोजगार
जिले में हीरा, रेत, क्रशर गिट्टी के बाद रॉक फॉस्फेट से खनिज उद्योग में लोगों के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। डीएपी खाद बनाने के काम में आने वाली रॉक फॉस्फेट के उत्खनन से खाद बनाने वाले उद्योग व सहायक उद्योगों के स्थापना के अवसर जिले में बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही डीएपी जैसे महत्वपूर्ण खाद की जिले में सप्लाई बढ़ेगी, जिससे किसानों की मुश्किलें भी कम होंगी।

भेज चुके हैं रिपोर्ट
जिला स्तर से क्षेत्र उपलबध्ता रिपोर्ट व प्रस्ताव भेजा जाना था, जो हमारे द्वारा भेजा जा चुका है। नीलामी की प्रक्रिया शासन स्तर से होनी है।
अजय मिश्रा, खनिज निरीक्षक

चल रही प्रक्रिया
शासन स्तर पर प्रक्रिया की जा रही है। खदानों की नीलामी की जाना है। उम्मीद है कि जनवरी में मड़देवरा की रॉक फॉस्फेट खदानों की नीलामी में डाल दिया जाएगा।
निशीकांत हंस, सुपरीटेंडेंट ज्यूलॉजिस्ट

Dharmendra Singh
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