बकस्वाहा के जंगल बचाने हिन्दू उत्सव समिति ने बांधे रक्षा सूत्र


पर्यावरण के विनाश पर आधारित विकास स्वीकार्य नही - पवन मिश्रा
आज पर्यावरण की अनदेखी भविष्य में होगी मंहगी साबित

By: Dharmendra Singh

Published: 17 Jun 2021, 07:18 PM IST

छतरपुर। इस समय पूरे देश में छतरपुर जिले में स्थित बक्सवाहा के जंगल का मुद्दा छाया हुआ है। हीरों के लिए बड़े भूभाग में स्थित जंगल को काटने की कवायद तेज है इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी पवन मिश्रा भी बक्सवाहा के उस क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे जिस क्षेत्र में हीरा उत्खनन के लिए वृक्षों को काटा जाना है। उन्होंने सघन क्षेत्र में स्थित वर्षों पुराने जंगल का न केवल भ्रमण किया बल्कि स्थानीय लोगो से इस विषय पर चर्चा की।

पवन मिश्रा ने बताया कि पूरे क्षेत्र में सागौन, केम, जामुन, बहेड़ा, पीपल, तेंदू, अर्जुन आदि वनस्पतियों के वर्षों पुराने पेड़ स्थित है जिन पर यंहा के आदिवासीयों का जीवन आधारित है। इतना ही नहीं यहां अनेक प्रकार के दुर्लभ पक्षियों, गिलरियो, बंदरों, भालुओं, हिरण और मोरों सहित कई प्रकार के जीव जंतुओं का जीवन भी निर्भर है। इस पूरे क्षेत्र में पानी की पहले से ही कमी है और भूजलस्तर काफी नीचे है। लाखों पेड़ों के कटने से यहां के पारिस्थितिक तंत्र पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। वनस्पति से बादलों के आकर्षण में कमी के चलते और पेड़ों की अनुपस्थिति में जो पानी गिरेगा वह भी बहकर निकल जाएगा जिससे सूखे के हालात पैदा होंगे।

पवन मिश्रा के साथ पहुंचे हिन्दू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर उनसे चिपककर जंगल की रक्षा का संकल्प लिया। मिश्रा ने कहा इतिहास गवाह है कि पर्यावरण और प्रकृति से खिलवाड़ करके दुनिया की किसी भी संस्कृति का संवर्धन नही हुआ बल्कि वे काल के गाल में समा गईं। निश्चित रूप से इस पिछड़े क्षेत्र को विकास की महती आवश्यकता है परंतु अपने जल जंगल और जमीन को खोकर नही। आगामी दिनों में जंगल बचाने की रणनीति तैयार की जाएगी। उनके साथ समिति के कमल अवस्थी, मयंक त्रिपाठी, हिंमांशु अग्रवाल, आकाश अवस्थी, लोकेंद्र सोनी, हर्ष शुक्ला, दीपेंद्र रैकवार, विकास शामिल रहे ।

Dharmendra Singh
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