सरकारी नालों पर है अतिक्रमण, कैसे भरेंगे शहर के तालाब?

- शहर के अंदर से निकले नालों पर सालों से होता आ रहा अतिक्रमण, अनजान बने है जिम्मेदार - जलसंकट की त्रासदी से भी सबक नहीं ले रहे लोग, तालाबों और नालों प

By: Neeraj soni

Published: 24 May 2018, 11:48 AM IST

छतरपुर। शहर में सरकारी संपत्ति तेजी से खत्म हो रही है। सरकारी जमीनों और रियासतकालीन तालाबों पर पहले से ही लोग कब्जा करते चले आ रहे है। अब सरकारी नाला तक को भी लोग नहीं छोड़ रहे हैं। जिन नालों से होकर बारिश का पानी शहर के तालाबों में जाता है, उस नालों को ही खत्म किया जा रहा है। जबकि पूरा शहर जल संकट की त्रासदी झेल रहा है। लेकिन लोग हैं कि समझना ही नहीं चाह रहे हैं। वे अवैध निर्माण करके सरकारी जमीन को रातों-रात अपना बना लेना चाहते हैं।

 

इस काम में प्रशासनिक अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों की उदासीनता अतिक्रमणकारियों के लिए मौन स्वीकृति का काम कर रही है। यही वजह है कि शहर के सभी छोटे-बड़े सरकारी नाला तेजी से खत्म हो रहे हैं। तालाबों में पानी नहीं पहुंच पाने के कारण वे भी सूख चले हैं। इसका फायदा उठाकर तालाबों पर प्लाटिंग तक की जाने लगी है। संकट मोचन तालाब में इसी के चलते अतिक्रमण किया जा रहा है।


शहर के पन्ना रोड, सटई रोड, सागर रोड, बसारी दरवाजा, नया मोहल्ला, सरानी दरवाजा, मऊदरवाजा, सिंचाई कॉलोनी, छत्रसाल चौक, एलआइसी के सामने, बस स्टैंड, किशोर सागर क्षेत्र सहित पूरे शहर के सरकारी नालों पर तेजी से अवैध कब्जा किया जा रहा है। कुछ नालों के ऊपर रातोंरात रेस्टोरेंट बन गए तो कहीं पुराना नाला को खत्म करके आलीशान होटल बना दिया गया। उसकी जगह नया नाला बनाकर छोड़ दिया गया। शहर के नालों की मौजूदा स्थिति बताती है कि लोग बिना किसी भय के खुलेआम सरकारी नालों पर कब्जा करने में लगे हैं।


यह है शहर के सरकारी नालों की हकीकत :
पन्ना रोड के नालों पर बन गए होटल-रेस्टोरेंट :
शहर के पन्ना रोड पर सरकारी नाला पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में है। नाला के एक बड़े हिस्से पर रेस्टोरेंट बन गया है। वहीं आगे की ओर एक आलीशान होटल भी पुराना नाला खत्म करके नया नाला बना दिया गया। शहर का सबसे बड़ा नाला यहीं से गुजारा था। इसी नाला से बारिश का पानी एकत्र होकर सिंचाई कॉलोनी से होकर सिंघाड़ी नदी में जाता था। लेकिन अतिक्रमणकारियों की नजर नालों पर ऐसी पड़ी कि यह नाला धीरे-धीरे बिलुप्त होता जा रहा है। सिंचाई कॉलोनी क्षेत्र में ही यह नाला खत्म होता जा रहा है। पन्ना रोड पर पेट्रोल पंप के पास नाला का पुराना स्वरूप एक होटल बनाने के लिए खत्म कर दिया गया। नया नाला बनाकर सरकारी जमीन खत्म कर दी गई। इसी तरह की स्थिति सटई रोड के नाला की हुई। इस रोड का नाला लगभग खत्म हो हो गया है।


महाराजा कॉलेज के सामने नाला पर ही बना लिया मकान :
शहर के महाराजा कॉलेज के पास विवि कार्यालय भवन के ठीक सामने से सरकारी नाला निकला है। यह नाला डेरा पहाड़ी की ओर से बहकर आने वाले पानी को एकत्र करके प्रताप सागर तालाब तक ले जाता था। लेकिन अब इस नाला का अस्तित्व भी खत्म किया जा रहा है। बीच नाला में ही लोगों ने मकान बना लिए हैं। कई मकान अब भी बनाए जा रहे हैं। नाला के अवरुद्ध हो जाने से एक ओर बारिश में यहां रहने वाले लोगों की समस्या बढ़ेगी, दूसरी ओर तालाब में बारिश का पानी भी एकत्र नहीं हो पाएगा। ऐसे में पूरा पानी नालियों में होकर बह जाएगा। यहां रहने वाले लोगों ने बताया कि नगरपालिका ने नाला का निर्माण कराया नहीं है, इस कारण लोग धीरे-धीरे नाला पर ही कब्जा करने लगे हैं। नाला पर मकान बनने से बारिश में मुसीबत होगी।


सरकारी नाला पर ही बना ली दुकान, सिकुड़ गया नाला :
शहर के मऊ दरवाजा क्षेत्र से निकला सबसे बड़ा नाला पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है। दोनों ओर से इस नाला पर दुकान और मकान का निर्माण कर लिया गया है। चित्रा टॉकीज की ओर बीच नाला में ही दुकान बना ली गई। आगे टौरिया मोहल्ला की तरफ भी इसी नाले पर अतिक्रमण है। कई लोगों ने नाला में ही अपने शौचालयों के पाइप सीधे डाल रखे हैं। नाला के ऊपर दुकानें बनाकर लोग किराए से चला रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। शहर के तालाबों से जुड़े इन नालों पर कब्जा होने के कारण ही बारिश का पानी सीधे नहीं निकल पाता है। जगह-जगह जल भराव की स्थिति भी इसी कारण बनती है। यहां के नाले की सफाई भी लंबे समय से नहीं हुई है।


हाइवे किनारे ही नाला पर बन गई दुकानें :
शहर के छत्रसाल चौक के पास सरकारी नाला पर कब्जा किया गया है। वहीं एलआइसी ऑफिस के सामने भी सरकारी नाला के ऊपर दुकानें बना ली गई है। नाला का परंपरागत आकार और स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है। किशोर सागर तालाब में बारिश का पानी इन्हीं नालों से होकर जाता रहा है। लेकिन पानी के इन स्त्रोतों को खत्म किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले यह नाले विशाल आकार में थे, लेकिन धीरे-धीरे लोग इन पर कब्जा करते चले गए। केवल सड़क की ओर ही कुछ नाले खुले दिखते हैं। बाकी सभी जगह नाले बंद हो गए हैं। ऐसे में उनकी न तो कभी सफाई हो पाती है और न ही उनकी सुरक्षा हो पा नही है। जिसका जहां मन होता है नाले पर कब्जा करके रह जाता है। यही वजह है कि शहर के सभी प्राचीन तालाब गर्मियों के दिनों में सूखने लगे हैं। उनमें बारिश के पानी का भंडारण हो ही नहीं पाता है।


सभी नालों का अतिक्रमण हटाया जाएगा :
शहर के नालों की सफाई बारिश के पहले कराई जाएगी। तालाबों से जुड़े सभी नालों का सर्वे कराया जाएगा। अगर उस पर कहीं भी अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे बलपूर्वक गिरा दिया जाएगा। नाला सरकारी संपत्ति है अगर कोई उस पर कब्जा करता है तो उसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार होगा। इस संबंध में एसडीएम के पास कार्रवाई का प्रतिवेदन बनाकर भेजेंगे। इसके लिए वे ही अधिक्रत है।
- हरिहर गंधर्व, सीएमओ नगरपालिका छतरपुर

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