जिला न्यायालय के आवास के लिए आवंटित जमीन पर अवैध निर्माण, एसडीएम ने लगाया स्टे

वर्ष 1998-99 में अधिकारियों-कर्मचारियों के आवास के लिए आंवटित हुई थी 3.50 एकड़ जमीन
वर्ष 2006 से चल रहा दूसरी जमीन की रजिस्ट्री के आधार पर कोर्ट की जमीन पर कब्जा का खेल

By: Dharmendra Singh

Published: 26 Aug 2020, 07:00 AM IST

छतरपुर। जिला न्यायालय के अधिकारियों-कर्मचारियों के आवास के लिए आवंटित जमीन पर कब्जा कर निर्माण का खेल दोबारा शुरु हो गया है। इस बार अभय जैन ने अपने बहनोई विमल जैन पर निजी भूमि की रजिस्ट्री के आधार पर शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण कराने का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत 21 अगस्त को एसडीएम बीबी गंगेले से की गई तो उन्होंने स्टे आदेश जारी कर 11 सितंबर को सुनवाई की तारीख रखी है, लेकिन स्टे के वाबजूद निर्माण कार्य जारी है। न्याय विभाग के लिए आंवटित 3.50 एकड़ जमीन पर कब्जा कर निर्माण का ये खेल वर्ष 2006 में शुरु हुआ था, जो बीच में बंद था, लेकिन एक बार फिर से शुरु हो गया है।

हाईकोर्ट ने 2001 में लगाई थी रोक
जिला न्यायालय छतरपुर के अधिकारियों एंव कर्मचारियों के आवास के लिए कलेक्टर छतरपुर ने वर्ष 1998-99 में शहर के डेरा पहाड़ी इलाके में नजूल की 3.50 एकड़ जमीन का आवंटन किया था। भूमाफियाओं ने इस जमीन पर कब्जा करा दिया है। कब्जा करने के लिए न्यायालय की जमीन से लगी जमीन की रजिस्ट्री कर लोगों को सरकारी जमीन पर कब्जा दिया गया। भूमाफियाओं ने अब तक 8 लोगों को इसी तरह से सरकारी जमीन पर कब्जा दिला दिया है। इतना ही नहीं, न्यायालय की जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों के नामांतरण भी राजस्व विभाग ने कर दिए हैं। जबकि न्यायालय की जमीन के बगल की जिस जमीन की रजिस्ट्री के आधार पर कब्जा व नामांतरण किए गए. उस जमीन पर हाईकोर्ट ने वर्ष 2001 में ही बिक्री पर रोक लगा दी थी।

ये है पूरा मामला
डेरा पहाड़ी इलाके में बगौता पटवारी मौजा के खसरा नबंर 1731/1,1732, 1733/1 में साढ़े तीन एकड़ जमीन छतरपुर कलेक्टर ने वर्ष 1998-99 में प्रकरण क्रमांक अ-20-1/1998-99, आदेश दिनांक 1 मार्च 1999 के तहत न्याय विभाग को आवंटित की थी। न्याय विभाग के अधिकारियों एंव कर्मचारियों के लिए आवंटित इस जमीन पर आवंटन के बाद न्याय विभाग के लिए आरक्षित जमीन का बोर्ड भी लगाया गया। खसरा नंबर 1731 व उसके बंटाक के नंबर वाली सरकारी जमीनों की खरीद-बिक्री व वहां निर्माण पर गोविन्द शुक्ला की याचिका पर 27 जुलाई 2001 को हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया। लेकिन इसके बाद वर्ष 2004 में खसरा नंबर 1731/3, 1731/4 और 1731/5 में से कुल 294 आरे जमीन की रजिस्ट्री हो गई। इसके बाद वर्ष 2006 से खसरा नबंर 1731/3 में प्लॉट बेचकर न्याय विभाग को आवंटित जमीन 1731/1 में कब्जा देना शुरु किया गया। दूसरी जमीन की रजिस्ट्री के आधार पर न्याय विभाग की जमीन पर कब्जा का ये खेल लागातार चलता रहा। इस दौरान आठ लोगों को सरकारी जमीन पर कब्जा दिलाया गया। इसके बाद वर्ष 2016 से 2018 के बीच कब्जाधारियों के नामांतरण कर दिए गए। इस तरह से सरकारी जमीन पर कॉलोनी बसाने का खेल खेला गया।

पहले भी हुई शिकायतें, लेकिन असर नहीं
न्याय विभाग के आवास के लिए आवंटित जमीन पर कब्जा की शिकायतें भी की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से कब्जा बढ़ते ही गए। सिंचाई कॉलोनी के निवासियों ने जून 2008 में न्याय विभाग की जमीन पर कब्जा की शिकायत तहसीलदार से की। शिकायत के आधार पर तहसीलदार ने 23 जून 2008 को आगामी आदेश तक खसरा नबंर 1731/1, 1732 और 1733 में किसी भी प्रकार के निर्माण पर स्थगन आदेश जारी कर दिया। इसके अलावा गोविन्द शुक्ला ने वर्ष 2007 में नजूल अधिकारी से हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर शिकायत की, जिस पर नजूल अधिकारी ने 9 दिसंबर 2007 को प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए। सरकारी आदेशों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से न्याय विभाग की जमीन कर कब्जा बना रहा। इसके बाद वर्ष 2018 में 14 मई को गोविन्द शुक्ला ने सीएम हेल्पलाइन पर पूरे मामले की शिकायत की। जिसकी जांच लगभग एक साल तक लंबित रही, फिर 18 फरवरी 2019 को पटवारी द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा की रिपोर्ट तहसीलदार को दिए जाने का हवाला देकर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत की फाइल बंद कर दी गई।

बहनोई पर लगाया आरोप, की शिकायत
अभय जैन ने एसडीएम बीबी गंगेले से शिकायत की है कि उनके बहनोई विमल जैन ने वर्ष 2004 में रामसंजीवन शर्मा से जमीन खरीदी थी, जिसकी वो प्लॉटिंग कर चुके हैं। उसके बाद उन्होंने करोड़ों रुपए की जमीन अलग से बेची। अभय ने आरोप लगाया कि मौके पर विमल जैन की कोई जमीन नहीं है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि विमन जैन उनके पिता प्रेमचंद्र जैन के स्वामित्व की जमीन बताकर बेच रहे हैं। अभय जैन का कहना है कि विरोध करने पर ये विवाद कर रहे हैं। इसकी शिकायत उन्होंने सिविल लाइन थाना में भी की है। इधर, शिकायत के बाद 21 अगस्त को एसडीएम बीबी गंगेले ने स्थगन आदेश जारी किया है। वहीं, इस मामले में विमल जैन का कहना है कि उन्होंने अपने स्वामित्व की जमीन बेची है।

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