परेथा, इमलिया समेत आसपास के गांवों में फिर बिकने लगी अवैध शराब

मौत का मामला ठंडा पडऩे के बाद प्रशासन ने नजर हटाई, फिर शुरु हुआ अवैध कारोबार
अवैध शराब के काम में नए लोग भी हुए शामिल, जिला मुख्यालय पर लोगों ने किया प्रदर्शन

By: Dharmendra Singh

Updated: 19 Mar 2021, 07:41 PM IST

छतरपुर। जिले में अवैध शराब से 4 मौत के बाद भी अवैध कारोबार थम नहीं है। हरपालपुर इलाके के परेशा गांव में अवैध शराब पीने से 4 ग्रामीणों की मौत के बाद प्रशासनिक अनदेखी से फिर से अवैध शराब निर्माण और बिक्री का काला कारोबार शुरु हो गया है। परेथा और पास के गांव इमलिया में यूपी से अवैध शराब की तस्करी और भट्टी से कच्ची शराब बनाने का अवैध कारोबार किया जा रहा है। हालांकि अवैध शराब के कारोबार में अब कुछ नए लोग शामिल हो गए हैँ। पुलिस और आबकारी ने मौत का मामला ठंडा पड़ते ही अवैध शराब की निगरानी बंद कर दी, जिससे अवैध शराब गांव-गांव में फिर से बिकने लगी है।

अभी भी यूपी से नकली आ रही शराब
हरपालपुर के परेथा, सरसेड़, इमलिया, भदर्रा , चुरवारी, कैथोकर में अवैध शराब का कारोबार फिर से शुरु हो गया है। इन गावोंं में उत्तरप्रदेश से अवैध शराब की बिक्री हो रही है। शराब माफिया यूपी से स्प्रिट लाकर गांव में ही नकली शराब की पैकिंग कर बेच रहे हैं। नकली शराब में यूपी की शराब दुकान के ब्रांड की पैकिंग की जा रही है। परेथा में यूपी की इसी नकली शराब को पीकर 4 ग्रामीणों की मौत हुई थी। नकली शराब के साथ ही मऊरानीपुर और राठ से अवैध शराब सरकारी दुकानों से भी छतरपुर जिले के गांवों में सप्लाई की जा रही है। हर गांव में दो से तीन स्थान पर अवैध शराब की बिक्री हो रही है। परेथा व इमलिया में शराब की अवैध बिक्री के नए-नए ठिकाने भी खुल गए हैं।

गांवों में फिर बनने लगी भट्टी की शराब
हरपालपुर के पास सरसेड़ में कबूतर डेरा पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद अवैध शराब बनाने वालों ने जगह बदल दी है। अब ये लोग धसान नदी के किनारे लहदरा-मडोरी में भट्टी लगाकर जहरीली शराब बना रहे हैं। यहीं से हरपालपुर और आसपास के गांव में कच्ची शराब की सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा परेथा के नजदीकी गांव इमलिया में भी कच्ची शराब बनाई जा रही है। कबूतर डेरा पर भट्टी से जहरीली शराब बनाकर परेथा, इमलिया, भर्दरा समेत आसपास के गांव तक बेची जा रही है।

गांव में जगह-जगह नजर आने लगे खाली बोतलें के ढेर
परेथा शराब कांड के बाद प्रशासन की सख्ती से गांव में शराब की बिक्री और खपत कम हो गई थी। लेकिन मामला ठंडा पडऩे के बाद प्रशासन ने अवैध शराब के कारोबार से नजर हटाई और फिर से पहले की तरह ही अवैध शराब बिकने लगी है। गांव में दो से तीन जगह पहले की तरह ही शराबियों की महफिलें जमने लगी है। वहीं, आसपास शराब की खाली बोलतों के ढेर भी नजर आने लगे हैं।

ज्यादा नशीली बनाने के लिए मिला रहे जहर
महुआ और गुड़ सड़ाकर कच्ची शराब बनाते हैं। जिले में महुआ का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। महुआ या गुड़ सड़ जाता है तो इसे बड़े बर्तन में भट्टी पर पकने रखते हैं। एक नाली नुमा पाइप से बर्तन से भाप बोतल में इक_ी करते हैं। भाप ठंडी होने पर तरल रूप में आ जाती है। शराब में नशा बढ़ाने यूरिया, ऑक्सीटोसिन, बेसरम मिलाते हैं। यह जहर का काम करता है। यूरिया में नाइट्रोजन होता है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाता है। लगातार सेवन से शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। ज्यादा मात्रा होने पर मौत हो जाती है। ओपी से अवैध शराब बनाने वालों के पास मापदंड नहीं होता है। केमिकल कम ज्यादा होने पर शराब जहरीली हो जाती है, जो जान भी ले सकती है। जंगलों में महुआ शराब बनाई जा रही है। इसमें नशा बढ़ाने के लिए यूरिया और नौसादर का उपयोग किया जा रहा है। इस शराब के सेवन से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार यह शराब शरीर को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। इससे मृत्यु तक हो सकती है।

शहर में धरने पर बैठे लोग
शराब, जुआ और वेश्यावृत्ति के विरोध में शहर के सटई रोड के रहवासियों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए। आसपास के दुकानदार भी दुकाने बंद कर प्रदर्शन में शामिल हो गए। प्रदर्शनकारी लोगों का कहना है कि शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सटई रोड, देरी रोड पर अवैध कारोबार व अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही है। सिविल लाइन पुलिस को स्थानीय रहवासियों ने ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग भी की है।

Dharmendra Singh
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