जिले के इस अस्पताल में है मरहम पट्टी का टोटा, ये करते हें मरीज

जिले के इस अस्पताल में है मरहम पट्टी का टोटा, ये करते हें मरीज

Unnat Pachauri | Publish: Mar, 17 2019 11:00:00 AM (IST) Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

बाहर से खरीदकर मरहम-पट्टी करा रहे मरीज, पट्टी नहीं होने से मरीजों का रुक जाता है इलाज

छतरपुर। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा शासकीय असपतालोंं में मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन सरकार के नुमाइंदे उनकी मंशा पर पानी फेरते हुए नजर आ रहे है। जिला अस्पताल में हवा-पानी व अन्य जरूरत के साथ-साथ मरहम-पट्टिया भी अति आवश्यक है। लेकिन जिला अस्पताल में इन दिनों मरहम पट्टियों को टोटा है। यहां मरीजों को ओपीडी के माइनर ऑपरेशन थिरेटर में रूई व पट्टी भी बाहर से खरीदना पड़ रही है। माइनर ओटी में १5 से २0 मरीज के बाद कर्मचारी मजबूरी में मरीजों को बाहर से सामान लाने को कहते हैं। मजबूरन मरीजों के परिजनों द्वारा बाहर से अपने रुपए से खरीदकर मरहम पट्टी लाते हैं और फिर इनका इलाज शुरू किया जाता है। वहीं प्रबंधन का दावा है कि स्टोर में सामग्री का पर्याप्त स्टॉक है। इलेकिन इसके बाद भी मरीजों को यह सुविधा अस्पताल द्वारा नहीं दिया जा रहा है।
यहां यदि कोई सीरियस मरीज आ जाए तो उसे इलाज के लिए पट्टियों और टांकों के लिए शुई धागा के लिए अस्पताल परिसर से बाहर जाकर मेडिकल स्टोर से खरीदकर लाना पड़ता है। तब कहीं जाकर उसका इलाज होता है। ऐसे में इलाज में लेटलतीफी से मरीज के साथ अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन इस समस्या को लेकर अस्पताल प्रबंधक गंभीर नहीं है। जिससे इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। यदि कोई लावारिश मरीज आ जाए तो पट्टियों के अभाव में उसे तड़पना पड़ता है।
जिला अस्पताल में मरीजों के साथ किसी न किसी रूप में रुपए वसूलने की बात सामने उजागर हो जाती है। जिला अस्पताल में अब सबसे बड़ी समस्या पट्टी की बनती जा रही है। मरीज जब अस्पताल में लहुलूहान हालत में दाखिल होता है तो उसे सबसे पहले मरहम-पट्टी की आवश्यकता होती है। क्योंकि यदि किसी मरीज का ज्यादा खून बहता है तो उसे इलाज जल्द से जल्द होने की आवश्यकता होती है लेकिन देखने में आ रहा है कि अस्पताल में पट्टी न होने से मरीज का इलाज रोक दिया जाता है। जब परिजन अस्पताल से बाहर जाकर पट्टी लाते हैं तब कहीं जाकर मरीज का इलाज होती है। जिससे मरीज को आर्थिक समस्या से भी जूझना पड़ता है।
इमरजेंसी व ओटी में नहीं पट्टी :
इमरजेंसी व ओटी में तैनात कर्मचारियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि अस्पताल में पर्याप्त पट्टियां नहीं हैं। इन वार्डो में अति गंभीर मरीज आते है। जिन्हें मजबूर होकर अपने इलाज के लिए बाहर से स्वयं के रुपए की पट्टी खरीदकर इलाज करा रहे है। साथ में पट्टी लगाने के नाम पर उनसे रुपए भी वसूले जाते है। जिससे मरीज व उनके परिजनों की जेब पर सीधा डाका डाला जा रहा है।
लंबे समय से झेल रहे परेशानी :
बीते कई दिनों से मरहम-पट्टी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि हमें तो उपचार देना ही है तो बाहर से सामान मंगवाना ही पड़ेगा। रोजाना 80 से 100 मरीज माइनर ओटी और इंमजेंसी में पहुंचते हैं। मरीजों के हिसाब से सामान की आपूर्ति न होने से मरीजों को परेशान होती है।
ऑपरेशन के दौरान लिखा जाता है पर्चा :
किसी भी महिला पुरुष का कोई भी ऑपरेशन हो होता है तो वहां पर पदस्थ कर्मचारियों द्वारा मरीजों के परिजनों को एक पर्चा थमा दिया जाता है और मेडिकल स्टोर का नाम बताकर पर्चे में लिखा सामना लाने के लिए कहा जाता है। इस पर्चे में दस्ताने पट्टी सहित कई सामग्री होती है।
इन वार्डों में होती अधिक परेशानी:
जिला अस्पताल के ट्रामा वार्ड, मेल वार्ड, महिला वार्ड, वर्न वार्ड में भर्ती कुछ ही मरीजों को अस्पताल द्वारा मरहम पट्टी निशुल्क दी जाती है। बाकी मरीजों को या तो खर्चा पानी देकर पट्टी मिल जाती है या फिर बाहर से लानी पडती है। यहां वा ट्रामा वार्ड में भर्ती मरीज के परिजन यतेंद्र पाल ने बताया कि वह अपने पिता को इलाज के लिए लाया है, वह करीब तीन चार दिन से भर्ती है। यतेंद्र ने बताया कि उसे प्रतिदिन बाहर से लानी पड रही है। यहीं पर भर्ती एक मरीज के साथ में मनीष शर्मा ने बताया कि उसकी बुआ का एक्सीडेंट होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन अस्पताल में पट्टी और टांके लगाने के लिए शुई धागा नहीं होने की बात कही और पर्चा देकर बाहर से लाने के लिए कहा गया। इसके बाद करीब २० मिनट में यह सामग्री लेकर पहुंचे बत जाकर मरीज का इलाज शुरू हो सका।
पीएम के लिए दस्ताने और साुई धागा भी ला रहे परिजन :
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तो मरीजों के परिजनों द्वारा बाहर से मरहम पट्टी आदि खरीदना पड़ रही है लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसका पीएम के लिए दस्तानें और बॉडी सिलने के लिए सुई धागा आदि सामान मरीजों परिजनों से मंगाया जाता है।

इनका कहना है :
हमारे यहां पर मरहम-पट्टी, शुई धागा आदि का परयाप्त स्टॉक उपलब्ध है, हो सकता है कि कभी स्टॉक से न मंगा पाए हो तो मरीजों को बाहर से लाना पड़ा हो। अगर कोई कर्मचारी स्टॉक होने के बाद भी मरीजों से कोई सामग्री मंगाता है तो यह गलत है, इसकी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. आरपी पांडेय, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

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