घोटाले की जांच अटकी, खदुकुशी मामले में अबतक एफआइआर नहीं, सोसायटी में लगा ताला

रबी की फसल के लिए खाद-बीज व कर्ज न मिलने से किसान परेशान
जय किसान कर्जमाफी के नाम पर ठगे गए किसान भी लगा रहे चक्कर

By: Dharmendra Singh

Published: 08 Oct 2020, 06:00 AM IST

छतरपुर। भदर्रा सोसायटी में घोटाला और समिति प्रबंधक की खुदकुशी के चलते 10 गांव के किसान परेशान है। सोसायटी में जय किसान कर्जमाफी के नाम पर हुए घोटाला की जांच अटक जाने से ठगे गए किसान कर्जमाफी का प्रमाणपत्र लेकर भटक रहे हैं। वहीं, समिति प्रबंधक की खुदकुशी के बाद से सोसायटी में स्टाफ न होने से कामकाज ठप है। जिससे रबी फसल के लिए खाद-बीज के लिए किसान परेशान हो रहे हैं। इधर, पुलिस समिति प्रबंधक की खुदकुशी मामले में अब तक विवेचना पूरी कर एफआइआर नहीं कर पाई है। घोटाले व गड़बडिय़ां के लिए सुर्खियों में रही भदर्रा सोसायटी में ताला लग गया है, लेकिन किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

घोटालेबाजों पर कार्रवाई नहीं, रबी फसल के लिए परेशान हो रहे किसान
24 सिंतबर को समिति प्रबंधक सुरेश नायक के खुदकुशी कर लेने के बाद से ही सोसायटी में ताला पड़ा हुआ है। सहकारिता उपायुक्त ने सोसायटी संचालन के लिए जिला सहकारी बैंक से कैडर कर्मचारियों की मांग की है, लेकिन बैंक में कैडर कर्मचारी न होने से सोसायटी के संचालन के लिए अबतक स्टाफ न मिलने से सोसायटी का कामकाज ठप हैं। सोसायटी में ताला लगने के कारण समित िसे जुड़े 10 गांव के 2110 किसान रबी फसल की बोबनी के लिए खाद-बीज के लिए परेशान हैं। मवइया के महेश राजपूत ने बताया कि रबी सीजन शुरु हो गया है, लेकिन सोसायटी में ताला लगने से किसानों को खाद-बीज नहीं मिल पा रहा है। जिससे किसानों को महंगे दाम पर बाजार से खाद-बीज का इंतजाम करना पड़ रहा है। वहीं, इमलिया के किसान दीपचंद्र राजपूत का कहना है कि सोसायटी बंद रहेगी तो किसान कहां जाएंगे। सोसायटी में घोटाला करने वालों पर तो आज तक कार्रवाई नहीं हुई है, किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। किसान देवीदीन राजपूत ने बताया कि सोसायटी बंद होने से किसानों के केसीसी पास नहीं हो पा रहे हैं, जो किसान कृषि ऋण लेना चाहते हैं, वे इस सुविधा से वंचित हो रहे हैं। ईश्वर राजपूत व महिपाल सिंह महेड का कहना है कि सोसायटी के चक्कर में किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

कर्जमाफी के नाम पर ठगे गए किसान एक साल से लगा रहे चक्कर
भदर्रा सोसायटी से जुड़े लगभग 200 किसानों के नाम पर कर्ज की राशि में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। एक साल पहले भदर्रा सोसायटी के भदर्रा, इमलिया, मबइया, रगौली, महेड़, अमां और देवथा गांव के एक सैकड़ा किसानों के साथ गड़बड़ी के मामले की शिकायतों पर प्रशासन ने पूर्व समिति प्रबंधकों रामस्वरुप राजपूत व रविन्द्र त्रिपाठी को निलंबित किया था। लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि सोसायटी ने लगभग दस गांव के किसानों द्वारा लिए गए खाद-बीज के कर्ज की राशि में जमकर हेरफेर की थी। इस मामले में प्रशासन की जांच में आरोपी प्रबंधकों को बचाने और खुद को फंसाने का आरोप लगाते हुए समिति प्रबंधक सुरेश नायक की खुदकुशी कर ली है। कर्जमाफी के नाम पर घोटाला की जांच अटक गई है, जिससे कर्जमाफी की ठगी के शिकार हुए किसान एक साल बाद भी चक्कर लगा रहे हैं। न घोटाले की जांच आगे बढ़ रही है, न किसानों के नाम चढ़े गलत कर्ज को विलोपित किया जा रहा है।

दो-दो प्रमाणपत्र लेकर घूम रहे किसान
इमलिया निवासी प्यारे लाल अहिरवार द्वारा खाद बीज के नाम सहकारी समिति से 22 हजार रुपए का कर्ज कुछ वर्षो पहले लिया गया था। सहकारी समिति द्वारा जय किसान ऋण माफी योजना के तहत किसान को कर्ज माफी के दो प्रमाण पत्र अलग तारीखों में दिए गए। ऋण माफी का पहला प्रमाण पत्र 26 फरवरी 2019 को तो दूसरा 1 मार्च 2019 को दिया गया, जिसमें सहकारी समिति द्वारा 46741 रुपए का कर्ज माफ बताया गया। लेकिन सोसायटी के रिकॉर्ड में अभी भी किसान पर कर्ज चढ़ा हुआ। इमलिया सरपंच प्रतिनिधि राजेश मिश्रा में आरोप लगाया कि इमलिया के किसानों के नाम फर्जी ऋण सूची में दर्ज कर किसानों के नाम पर रुपया आहरित किया गया। किसान को दो-दो प्रमाण पत्र मिलने के एक साल बाद भी किसान का ऋण आज भी सहकारी समिति में बकाया हैं। इमलिया गांव की रामकुमारी राय और शिवराम राय पति-पत्नी है। रामकुमारी के नाम डेढ बीघा और शिवराम के नाम पांच बीघा जमीन हैं। राम कुमारी ने बताया कि उन्होंने या उनके पति ने सोसायटी से कोई कर्ज नहीं लिया है। लेकिन उनके नाम पर सोसायटी में 1 लाख 18 हजार और शिवराम के नाम पर 1 लाख 10 हजार रुपए का कर्ज चढ़ाया गया है। शिवराम का कहना है कि शिकायत कई बार की गई लेकिन अभी तक समस्या का निराकरण नहीं हो सका है।

पुलिस की जांच भी नहीं हो पाई पूरी
इधर, समिति प्रबंधक सुरेश नायक की खुदकुशी के मामले में 13 दिन बाद भी पुलिस की विवेचना पूरी नहीं हो पाई है। सुसाइड नोट में जिन लोगों पर आरोप लगे, पुलिस उन सभी के अभी तक बयान ही नहीं ले पाई है। न ही पुलिस ने खुदकुशी के मामले में अबतक कोई एफआइआर दर्ज की है। सुरेश नायक के सुसाइड नोट की भी जांच नहीं हो पाई है। इधर, घटना के दिन बैंक में मौजूद बैंक मैनेजर के छुट्टी पर चले जाने से उनके बयान भी नहीं हो पाए हैं। वहीं सुसाइड नोट में आरोपित दिनेश मिश्रा पुलिस को नहीं मिल रहे हैं। इस तरह से घोटाले की सोसायटी भदर्रा के समिति प्रबंध की खुदकुशी मामले में अब तक पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है।

Dharmendra Singh
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