कारगिल के शहीद को भूला प्रशासन, न समारोह में बुलाया और न ही सम्मान दिया

Neeraj Soni

Publish: Aug, 16 2019 12:37:13 PM (IST)

Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। कारगिल युद्ध में 9 फरवरी 2000 में शहीद हुए जिले के मझगुवां गांव के सपूत शहीद धरमदास पटेल की शहादत को जिले के प्रशासन ने इस बार भुला दिया। शहीद के परिवार को हर साल १५ अगस्त और २६ जनवरी के समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा जाता था, लेकिन इस बार यह परिवार इंतजार ही करता रह गया। शहर के विश्वनाथ कॉलोनी में रहने वाले इस परिवार के बारे में जब बजरंग दल के युवाओं को पता चला तो उन्होंने गुरुवार को ही दोपहर बाद शहीद के घर पहुंचकर उनकी मां और पत्नी को शाल-श्रीफल देकर सम्मानित किया। इस दौरान शहीद की पत्नी श्यामबाई पटेल ने बताया कि हर साल उनके परिवार को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह का आमंत्रण मिलता था, लेकिन इस बार उन्हें नहीं बुलाया गया।
भगवा बिग्रेड के युवा पहुंचे सम्मान करने :
शहीद के परिजनों को जिला प्रशासन के स्वतंत्रता दिवस समारोह में नहीं बुलाए जाने की जानकारी बजरंग दल के युवाओं को लगी तो वे शाल-श्रीफल लेकर उनके घर पहुंच गए। इस दौरान पवन अग्रवाल, नीरज भार्गव, विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री पुष्पेंद्र सिंह परमार, नगर संयोजक बजरंगदल डॉ. सुरेंद्र शिवहरे, जि़ला गौरक्षा प्रमुख रविराज सिंह, नगर सह संयोजक अजय बिंदुआ, पंकज पिपरिया, नगर गौरक्षा प्रमुख नारायण राठौर, राहुल गोस्वामी सहित बजरंग दल के अन्य कई कार्यकर्ताओं ने शहीद के घर जाकर उनकी मां और पत्नी को शाल-श्रीफल देकर सम्मानित किया और उन्हें आश्वासन दिया कि वे कारगिल शहीद के परिवार को उनका खोया हुआ सम्मान जरूर दिलाएंगे।
पति की शहादत के बाद नहीं मिला सम्मान :
शहीद धरमदास 9 फरवरी सन 2000 को करगिल युद्ध में शहीद हुए थे। करगिल युद्ध के दौरान धरमदास जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पदस्थ थे। जब उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मझगुवां लाया गया था, उस समय तत्कालीन सरकार के मंत्री ने पहुंचकर शहीद परिवार को शासन की ओर से 5 एकड़ जमीन और एक प्लाट देने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक इस परिवार को शासन न तो कई जमीन मिली और न ही शहीद की स्मृति में कोई स्मारक बनवाया गया। शहीद धरमदास की पत्नी श्यामा बाई पटेल बताती हैं कि अपने पति के सम्मान के लिए पिछले कई सालों में लगातार संघर्ष कर रही हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने अब तक उनका सहयोग नहीं किया।
सरकार से नहीं मिला सम्मान तो पत्नी ने खुद ही बनवा दी शहीद पति की प्रतिमा :
ग्रामीण और शहीद धरमदास के परिजन चाहते थे कि उनके नाम पर कोई पार्क या सार्वजनिक स्थल पर प्रतिमा लगवाई जाए। ताकि आने वाली पीढ़ी धरमदास की वीरगाथा और देशभक्ति को याद रख सके। शासन ने इस तरह कोई ध्यान नहीं दिया तो श्यामबाई ने हार नहीं मानी बल्कि अपने ही खर्चे से अपनी पैतृक जमीन पर मझगुवां गांव में पति का स्मारक बनवा दिया। यहीं पर शहीद धर्मदास की मूर्ति भी लगवाई। सीना तानकर चलने और गर्व महसूस कराने वाले श्यामा के पति धरमदास अब इस दुनिया में भले ही उसके साथ नहीं है लेकिन उनकी याद में बनाई गई प्रतिमा पूरे परिवार को आज भी गर्व महसूस कराती है।
मैं तुरंत पता करवाता हूं :
शहीद के परिवार को जानबूझकर नजरअंदाज तो नहीं किया गया होगा, कहीं भूलबस ऐसा हुआ होगा, मैं तुरंत पता करवाता हू। शहीद के परिवार को पूरा सम्मान दिया जाएगा।
- मोहित बुंदस, कलेक्टर छतरपुर

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