कोविड आइसीयू तैयार, लेकिन स्टाफ न होने से मरीजों को करना पड़ रहा रैफर

एक महीने में १८ गंभीर मरीजों को करना पड़ा रेफर, कोविड आइसीयू की सुविधा शुरु न होने से पेरशानी
डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ की कमी पड़ रही भारी, करोड़ों के संसाधन का नहीं हो पा रहा इस्तेमाल

By: Dharmendra Singh

Published: 22 Nov 2020, 08:13 PM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। जिले में कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए राज्य शासन ने जून माह तक कोविड आइसीयू तैयार करने के निर्देश दिए थे। तीन महीने की देरी से अक्टूबर माह में जिला अस्पताल में 84 लाख की लागत से 2 वेंटिलेटर समेत 12 बेड का आइसीयू वार्ड तैयार कर लिया गया है। लेकिन आइसीयू तैयारी होने के एक महीने बाद नवंबर माह में भी गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। अभी भी गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बाहर रेफर करना पड़ रहा है। २१ अक्टूबर से 21 नवंबर तक जिले से 18 मरीजों को रेफर किया गया है। कोविड वार्ड के संचालन के लिए स्टाफ की कमी एक समस्या बन गई है। स्टाफ की कमी के चलते संसाधन जुटाए जाने के वाबजूद हाईरिस्क मरीजों का इलाज अभी भी चुनौती बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ विभाग को पत्र लिखकर स्टाफ की मांग की है, लेकिन एक महीने बाद भी कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं।


वार्ड में बनाई स्पेशल व्यवस्था, लेकिन संचालन नहीं
कोविड आइसीयू वार्ड में 10 ऑक्सीजन युक्त बेड व 2 वेटिंलेटर समेत 12 गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्थाएं जुटाई गई हैं। सेंट्रलाइज एसी, सेंसर उपकरण वाला बाथरुम, 12 बिस्तरों के लिए ऑक्सीजन लाइन डाली गई है। वहीं डॉक्टर व नर्सिग स्टाफ के लिए अलग-अलग कक्ष भी बनाए गए हैं। स्टोर रुम व चेंज रुम भी बनाया गया है। कोविड आइसीयू वार्ड में 2 मेडिसिन विशेषज्ञ, 2 एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और दो टेक्नीशियन की जरूरत है। लेकिन वर्तमान में जिला अस्पताल में केवल एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और सहायक मौजूद है। वहीं, जिला अस्पताल में 4 मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर पदस्थ हैं, लेकिन इनमें से दो कोविड पलमोलॉजी वार्ड में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दो डॉक्टर जिला अस्पताल का आईसीयू और ओपीडी संभाल रहे हैं। ऐसे में कोविड वार्ड के लिए मेडिसिन विशेषज्ञ की कमी है। जिला अस्पताल प्रबंधन ने शासन से मेडिसिन विभाग के दो डॉक्टर, चार निश्चेतना विशेषज्ञ, 8 स्टाफ नर्स, 5 स्वीपर, 5 वार्डबॉय और 4 सिक्योरिटी गार्ड की मांग की है। जब तक ये स्टाफ नहीं मिलता तब तक आईसीयू का संचालन हो पाना मुश्किल है।

70 स्वीकृत पदों पर सिर्फ 30 डॉक्टर उपलब्ध
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सबसे बड़े केन्द्र जिला चिकित्सालय में स्टाफ और डॉक्टरों की कमी के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आलम ये है कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होने वाली ओपीडी में मरीजों को परामर्श देने के लिए डॉक्टर खोजे नहीं मिल रहे। अस्पताल में पदस्थ संविदा चिकित्सक ही ज्यादातर व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ और अन्य चिकित्सा अधिकारियों के लगभग 70 पदों पर महज 30 डॉक्टर की उपलब्ध हैं और इन डॉक्टरों को इमरजेंसी, वीआईपी ड्यूटी, जेल ड्यूटी, एसएनसीयू, कोविड केयर सहित अन्य शासकीय योजनाओं में लगाया गया है जिसके कारण हालात बिगडऩे लगे हैं।

40 की जगह केवल 16 विशेषज्ञ
जिला मुख्यालय पर लगभग 29 करोड़ रूपए की लागत से बनी 5 मंजिला इमारत के भीतर 300 बिस्तर का जिला चिकित्सालय संचालित हो रहा है, जिसमें सभी वार्डों का व्यवस्थित निर्माण हुआ है। स्वास्थ्य रक्षक मशीनें, आईसीयू और पांच वेंटीलेटर भी उपलब्ध हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि लोगों की जान बचाने के लिए करोड़ों की लागत से खड़ा किया गया यह इन्फ्रास्ट्रक्चर काम कैसे करे। क्योंकि इन्हें संचालित करने वाला स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में 40 पद स्वीकृत हैं लेकिन इन पदों पर फिलहाल 16 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। इनमें से 5 डॉक्टर विभिन्न कारणों से अस्पताल नहीं आ रहे हैं। इसी तरह चिकित्सा अधिकारियों की बात करें तो इनके पदों की स्वीकृति 30 है लेकिन इनमें से भी 7 डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। कुल मिलाकर तकरीबन 30 नियमित चिकित्सक ही अस्पताल के पास हैं। इनमें से 16 डॉक्टरों को कोविड आईसोलेशन, एसएनसीयू वार्ड, प्रसूता वार्ड और इमरजेंसी ड्यूटी में चार शिफ्टों के हिसाब से तैनात किया जाता है। यानि उक्त डॉक्टर फिर नियमित ओपीडी नहीं कर पाते। नियमित ओपीडी की व्यवस्थाएं उन 12 चिकित्सकों के कंधे पर हैं जिन्हें शासन से एनएचएम के अंतर्गत संविदा पर नियुक्त किया है। इनमें से भी दो डॉक्टर एसएनसीयू, एक मानसिक रोग विभाग और एक नौगांव में तैनात किए गए हैं।

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