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छतरपुर

सिंहपुर बांध से दो गांव में लीकेज, पांच साल में न विस्थापन न गड़बड़ी में हुआ सुधार

मकानों में सालभर सीलन रहती है, वहीं बारिश के मौसम में मकान गिरना शुरु हो जाते हैं। सिंहपुर गांव की दूरी डेम से 30 मीटर भी नहीं है, इसके चलते बरसात में लोगों के घरों में रिसाव हो रहा है, वहीं मुखर्रा गांव भराव क्षेत्र में आने से लोग परेशान हैं।

छतरपुरJul 09, 2024 / 10:57 am

Dharmendra Singh

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बांध के पानी का रिसाव

छतरपुर. महाराजपुर क्षेत्र में उर्मिल नदी पर बने सिंहपुर बैराज के प्रभावित गांव सिंहपुर और मुखर्रा के विस्थापन की प्रक्रिया विगत 5 वर्ष में कार्यालयों के पत्राचारों तक सीमित है। हालत यह हैं जहां मकानों में सालभर सीलन रहती है, वहीं बारिश के मौसम में मकान गिरना शुरु हो जाते हैं। सिंहपुर गांव की दूरी डेम से 30 मीटर भी नहीं है, इसके चलते बरसात में लोगों के घरों में रिसाव हो रहा है, वहीं मुखर्रा गांव भराव क्षेत्र में आने से लोग परेशान हैं।

इन स्थानों पर रिस रहा ज्यादा पानी


वर्ष 2016 में 270 करोड़ की लागत से सिंहपुर बैराज का निर्माण पूरा हुआ था। पिछले साल अच्छी बारिश होने से डेम क्षमता फुल भर गया। जिसके बाद से बांध का पानी रिसकर पांस के गांव सिंहपुर व मुर्खरा में जा रहा है। सिंहपुर गांव के कुशवाहा बस्ती के ठीक पीछे बड़ी मात्रा में बांध से पानी निकल रहा है। लोगों ने बताया कि यह पानी शुरु से निकल रहा है, लेकिन धीरे-धीरे मात्रा बढऩे लगी है। बांध से लगातार मिट्टी का कटाव हो रहा है। इसी तरह दलित बस्ती में लोग पानी के रिसाव से कीचड़ में रहने को मजबूर हैं। पक्के मकानों में भी सीपेज हैं। दोनों गांव के सभी घरों व भूतल पर पानी का सीपेज साफ दिखाई देता है। बांध के नजदीक तो कई जगह से रिसाव इतनी मात्रा में है कि नाली की शक्ल में पानी रिसकर बाहर आ रहा है। ग्रामीण श्रवण कुमार तिवारी, सुनील चौबे, अर्जुन कुशवाहा, काशी अहिरवार, धनीराम प्रजापति ने बताया कि उनकी समस्या के समाधान के लिए कई शिकायतें की लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है।

2019 के सर्वे में विस्थापन के लिए चिंहित हुए थे परिवार


राजस्व विभाग महाराजपुर द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार बांध के नजदीक के दो गांवों सिंहपुर और मुर्खरा के कुल 1122 परिवारों को विस्तापित किया जाना है। सिंहपुर गांव के 620 और मुर्खरा के 502 परिवारों को विस्थापन के लिए चिंहित किया गया है। मुर्खरा व सिंहपुर गांव के ग्रामीणों रामगोपाल, पर्वत, रतीराम, रामकुमार, सुखलाल, हरी, छोटू, राजा सिंह, कडोरा, स्वामीदीन, राम अवतार, सेवलाल, बिहारी, प्रमोद, कपूर सिंह, रतन सिंह, मुन्नी दीन दयाल, आशाराम, रामा, छन्नू, संतोष, महेश और गया प्रसाद समेत अन्य लोगों ने वर्ष 2019 में कलक्टर से बांध के पानी का रिसाव गांव के घरों में होने की शिकायत की थी। जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर विस्थापन की प्रक्रिया शुरु की गई, लेकिन पूरी नहीं हुई।

52 करोड़ का बनाया था पैकेज


सिंहपुर व मुर्खरा के ग्रामीणों ने बताया कि बांध के रिसाव को लेकर तहसील मुख्यालय, जिला मुख्यालय और सीएम हेल्पलाइन एवं प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखकर अवगत काराया गया है। वर्ष 2020 में विधायक नीरज दीक्षित और तात्कालीन कलक्टर मोहिस बुंदस ने गांव का दौरा करने के बाद विस्थापन की प्रक्रिया करने के निर्देश दिए थे। जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री ने पुनर्वास अनुदान पैकेज से 5 लाख रुपए प्रति परिवार राहत राशि देने के निर्देश दिए। लगभग 52 करोड़ का पुर्नवास पैकेज देने के लिए शासन से राशि मांगी गई है। लेकिन अभी तक वो राशि भी जारी नहीं हो पाई है।

7 साल पहले बना था बांध


जलसंसाधन विभाग के तहत करीब 260 करोड़ की लागत से 7 वर्ष पहले सिंहपुर बैराज परियोजना बनकर तैयार हुई थी। इस परियोजना में 10 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य है। वर्ष 2019 में डेम पहली बार पूर्ण क्षमता से भरा था, तभी से डेम से ग्राम सिंहपुर में रिसाव और मुखर्रा गांव तक डूब क्षेत्र का पानी आने से समस्या बनी हुई है। समस्या को लेकर हर साल सर्वे होता है। वर्ष 2020 में तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग ने भी सर्वे रिपोर्ट तैयार की, लेकिन उक्त सर्वे कार्य को आमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।

इनका कहना है


मैं इस बारे में पता करता हूं। एसडीसो से रिपोर्ट लेता हूं। लोगों की समस्या के समाधान की दिशा में सार्थक प्रयास किया जाएगा।
आशीष महाजन, इइ, जलसंसाधन

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