कहीं कमजोर होने लगी भाजपा तो कहीं मिली ज्यादा मजबूती, ये है वजह

कहीं कमजोर होने लगी भाजपा तो कहीं मिली ज्यादा मजबूती, ये है वजह

Neeraj soni | Publish: Sep, 03 2018 11:40:44 AM (IST) Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

कांग्रेस को जनाधार बचाने करनी पड़ रही है मशक्कत

छतरपुर। जिले की छह विधानसभाओं में भाजपा और कांग्रेस को जिन बूथों से सर्वाधिक वोट मिले थे, उनकी स्थितियां अब बदलने लगी हैं। कहीं भाजपा की स्थिति पहले से कमजोर हुई है तो कहीं उसे मजबूती भी मिली है। हालांकि 2008 की तुलना में भाजपा को टॉप 5 बूथों में बढ़त मिली थी। वहीं कांग्रेस का जनाधार कम हुआ था। इस बार कांग्रेस को अपने बचे हुए जनाधार के बचाए रखने की चुनौती सबसे बड़ी है।
जहां सबसे ज्यादा वोट मिले, वहां ही बिगडऩे लगा गणित
महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के जिस बूथ से मानवेंद्र सिंह भंवर राजा को सर्वाधिक मत मिले थे, इस बार वहां की स्थिति कमजोर हो चली है। भंवर राजा को अलीपुरा के पोलिंग बूथ नंबर 28 से 827 मत मिले थे। साल 2008 के चुनाव में भी भंवर राजा ने इस बूथ ने निर्दलीय प्रत्याशी होने के बाद भी 572 सर्वाधिक मत प्राप्त किए थे। लेकिन इस बार यहां के लोग उनसे नाखुश दिखाई दे रहे हैं। इसकी बड़ी वजह रेत का कारोबार है। उधर कांग्रेस के प्रत्याशी रहे लल्ला महेंद्र सिंह को अपने गृहनगर महाराजपुर के बूथ नंबर 179 से सर्वाधिक 444 मत मिले थे। लेकिन चुनाव हारने के बाद वे निष्क्रिय रहे और यह जनाधार भी अब कांग्रेस के खाते से खिसकता नजर आ रहा है।
राजनगर सीट पर कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नातीराजा को राजनगर के जिस बूथ नंबर 196 से सर्वाधिक 658 मत प्राप्त किए थे, वहां उनकी स्थिति पहले से बदली है। जबकि 2008 के चुनाव में भी इस बूथ से नातीराजा को ५५१ वोट मिले थे। इस बूथ पर उनको लेकर लोग इस बार नाराज है। वहीं भाजपा प्रत्याशी डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया को राजनगर के बूथ नंबर 127 से 557 वोट मिले थे। जबकि 2008 के चुनाव में इस बूथ से भाजपा को 310 वोट ही मिले थे। चुनाव हारने के बाद डॉ. कुसमरिया एक भी बार क्षेत्र की जनता के पास नहीं पहुंचे। जिससे भाजपा का जनाधार घटा है
बिजावर में भाजपा विधायक पुष्पेंद्रनाथ पाठक को धरमपुरा के बूथ नंबर 142 से सर्वाधिक 532 मत प्राप्त हुए थे। 2008 के चुनाव में भी इस बूथ से भाजपा को 394 वोट मिले थे। लेकिन इस बार यहां की स्थिति बदल गई है। इस क्षेत्र के लोग अपने विधायक से नाखुश है। इस सीट से कांग्रेस से लगातार दो बार से चुनाव लड़ रहे राजेश शुक्ला बबलू को अपने ग्राम बक्सोई के बूथ नंबर 80 से सर्वाधिक 566 वोट हासिल किए थे। 2008 का चुनाव में भी उन्होंने इस बूथ से 635 वोट प्राप्त किए थे। पूर्व की तुलना में इस बूथ से कांग्रेस कमजोर होती चली आ रही है।
छतरपुर क्षेत्र से भाजपा विधायक एवं राज्यमंत्री ललिता यादव ने शहर के पुरानी गल्लामंडी क्षेत्र के बूथ नंबर 94 में सबसे ज्यादा678 मत मिले थे। 2008 के चुनाव में भी इसी बूथ से उन्हें 462 मत प्राप्त हुए थे। गल्ला मंडी क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस बूथ पर अब भी भजपा मजबूत है। छतरपुर सीट कांग्रेस के टिकट पर 2013 में पहली बार चुनाव लड़े आलोक चतुर्वेदी पज्जन को वार्ड नंबर 113 से उन्हें पिछले चुनाव में सर्वाधिक 728 मत मिले थे। जबकि 2008 के चुनाव में इस बूथ से कांग्रेस को केलव 288 मत ही मिले थे। मुस्लिम बाहुल्य वार्ड के सभी बूथों से कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिलती रही है।
चंदला विधानसभा में बूथ नंबर 170 से भाजपा विधायक आरडी प्रजापति को सर्वाधिक 591 मत मिले थे। इस बार यहां उनकी हालत पतली है। रेत के कारोबार को लेकर पूरे जिले में बदनाम रहे इस क्षेत्र में भाजपा के ही नेता रेत के कारोबार में लिप्त रहे हैं। रेत के कारण यहां हुआ नुकसान और आम जनता की परेशानी का नुकसान भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। 2008 में इसी बूथ से भाजपा को 372 मत मिले थे। पिछले चुनाव में इस सीट के बूथ नंबर 97 से कांग्रेस प्रत्याशी हरप्रसाद को 376 मत प्राप्त हुए थे। इस बूथ पर कांग्रेस की स्थिति और भी कमजोर हुई। कांग्रेस को 2008 में भी इस बूथ से 372 मत मिले थे।

बड़ामलहरा विधानसभा सीट से रेखा यादव2013 में भाजपा के टिकट से वे चुनाव जीत गईं। लेकिन चुनाव के बाद वे जनता के बीच नहीं दिखी। पिछले चुनाव में उन्हें मझगुवांघाटी गांव के बूथ नंबर 212 से सर्वाधिक 552 वोट मिले थे। जबकि इसी बूथ से 2008 में भाजपा को 227 वोट मिले थे। लेकिन इस बार स्थिति फिर बदल गई है। गांव के महेश पटेल, दीना कुशवाहा बताते हैं कि जल संकट से लोग परेशान है, लेकिन विधायक ने उन्हें कोई राहत नहीं दी। वे एकाध बार ही यहां आई हैं। इस सीट से कांग्रेस के तिलक सिंह लोधी चुनाव लड़े थे। उन्हें सरकना गांव के बूथ नंबर 62 से सर्वाधिक 548 वोट मिले थे। चुनाव के बाद वे लोगों के बीच नहीं पहुंचे, इस कारण उनका यह जनाधार भी कमजोर होता गया।


भाजपा मजबूत हो रही है, इस बार सभी सीटें हमारी होंगी

जिले में भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ा है। जिले में विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, केन-बेतवा लिंक परियोजना, रेलवे सहित हाइवे और सड़कों के निर्माण से लेकर सिंचाई परियोजनाओं व नल-जल योजनाओं पर बड़ा काम हुआ है। इस कारण जनता के बीच भाजपा का अब कोई और विकल्प नहीं बचा है।
- पुष्पेंद्रप्रताप सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष छतरपुर

भाजपा ने विकास के नाम पर केवल जनता को छला है
जिले में भाजपा के पांच विधायक, दो सांसद हैं। इनमें से एक केंद्रीय मंत्री और एक राज्यमंत्री है, लेकिन इस तुलना में यहां विकास नहीं हुआ। विश्वविद्यालय की घोषणा करके पांच साल बाद भी भाजपा की सरकार यहां विवि का भवन नहीं बनवा सकी। रेल सुविधाओं पर कोई काम नहीं हुआ। कांग्रेस सरकार के समय एनटीपीसी की स्थापना का काम शुरू हुआ था, लेकिन भाजपा सरकार आने पर यह प्रोजेक्ट भी यहां से चला गया।
- मनोज त्रिवेदी, जिला अध्यक्ष कांग्रेस छतरपुर

छतरपुर जिले की 2013 स्थिति
विधानसभाएं - 6
भाजपा - 5
कांग्रेस - 1
छतरपुर जिले की 2008 स्थिति
विधानसभाएं - 6
भाजपा - 4
कांग्रेस - 1
निर्दलीय - 1

विधानसभा बार मुद्दे
बिजावर : - पेयजल, पलायन, रोजगार, सड़क, बिजली।
चंदला : रेत का अवैध उत्खनन, अपराध, जलसंकट, बिजली संकट।
राजनगर : पर्यटन विकास, पानी, भ्रष्टाचार।
छतरपुर : बादहाल यातायात, जलसंकट, यूनिवर्सिटी भवन निर्माण।
महाराजपुर : रेत का अवैध कारोबार, जलसंकट, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार।
मलहरा : जलसंकट, रोजगार, पलायन, अपराध।

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