मशीन शुरू होने से एक यूनिट ब्लड में कई मरीजों को मिलेगा फायदा

तीन साल से शोपीस बनी है ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन
- सरकारी लपरवाही से जिला अस्पताल में नहीं हो पा रहा ब्लड कंपोनेंट का सेपरेशन

By: Unnat Pachauri

Published: 01 Jul 2019, 05:00 AM IST

ब्लड बैंक में चल रही खून की कमी को दूर करेगी मशीन
- उन्नत पचौरी
छतरपुर। जिला अस्पताल प्रबंधन और विभाग की लापरवाही से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालात यह हैं कि करीब तीन साल पहले तीस लाख की लागत से खरीदी गई ब्लड कंपोनेंट मशीन अब भी शोपीस बन कर रखी है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन का एक पार्ट ब्लडबैंक में पड़ा है तो तीन अन्य भाग दूसरे स्थानों पर रखें हैं। मशीन के संचालन को लेकर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे यह बहुउद्देशीय मशीन मरीजों का साथ नहीं दे पा रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन द्वारा बताया कि मशीन के कुछ पार्ट जल गए हैं। जिन्हें बदलने के लिए पत्र लिखा गया है।
शासन द्वारा जिला अस्पताल छतरपुर में मरीजों को रक्त के आश्वयकता पूरी करने के लिए एक मशीन भेजी गई थी। यह मशीन ब्लड कंपोनेंट यूनिट मशीन के नाम से जानी जाती है। यह मशीन चार पार्टों में हैं। जिसका एक पार्ट को ब्लड बैंक में रखा है। जबकि तीन अन्य पार्ट यहां वहां रखे हैं। बाजवूद इसके दो-तीन साल का समय बीत जाने के बाद भी जिला अस्पताल प्रबंधन और विभाग इसको लेकर कोई खास ध्यान नहीं दे रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना डेढ़ दर्जन से ज्यादा ऐसे मरीज निकलते हैं। जिन्हें रक्त की जरूरत होती है। कभी-कभी तो इनकी संख्या भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही इमर्जेंसी में आने वाले मरीजों को भी ब्लड की जरूरत पड़ जाती है। इस मशीन को स्थापित किए जाने के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन आवश्यक शर्तों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है और न ही इसको लेकर ध्यान दिया जा रहा है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। कभी स्टाफ की कमी का रोना रोकर तो कभी जगह का अभाव बता कर मशीन लगाने में जिम्मेदार अपने हाथ खड़े कर रहे हैं।
मशीन शुरू होने से एक यूनिट ब्लड में कई मरीजों को मिलेगा फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट मशीन बहुउद्देशीय मशीन है। रक्तदान करने वाले का रक्त लेकर इस मशीन में डाला जाता है तो मशीन रक्त से आरबीसी, प्लेट्लेटस, प्लाजमा, डब्ल्यूबीसी आदि अलग कर देती है। ऐसे में यदि किसी मरीज को सिर्फ आरबीसी की आश्वयकता है, तो उसे आरबीसी दी जाएगी। जबकि प्लेटलेटस, प्लाजमा, डब्ल्यूबीसी आदि बचे रहेंगे। ऐसे में यदि किसी मरीज को प्लेटलेटस की आश्वयकता है तो उसे प्लेट्लेटस दिया जाएगा। ऐसे में एक यूनिट रक्त से कई मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से आरबीसी, प्लेटसलेटस, प्लाजमा, डब्लूबीसी आदि अलग-अलग दिया जा सकेगा।
वर्ष २००८ से नहीं हुआ ब्लड बैंक का रिनूवल
जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक भी स्वास्थ्य विभाग के नियम पूरे नहीं कर रही है। इस शासकीय ब्लड बैंक के रजिस्ट्रेशन का रिनूअल पिछले नौ साल से नहीं हुआ। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस नंबर- २८सी/२९/९७/१९९७ है। ऐसे में साफ है कि ब्लड बैंक का लाइसेंस वर्ष १९९७ का है। जबकि प्रत्येक पांच साल में ब्लड बैंक के रजिस्ट्रेशन का रिनूअल कराने का प्रावधान है। बावजूद इसके वर्ष २००८ से ब्लड बैंक का रिनूअल नहीं कराया गया। ऐसे में जिला अस्पताल की ब्लड बैंक रजिस्ट्रेशन के रिनूअल के बगैर ही संचालित हो रही है। ऐसे में ब्लड बैंक में स्वयं स्वास्थ्य विभाग के नियम पूरे नहीं हो रहे हैं। विभागीय अधिकारी यह तो बता रहे हैं कि ब्लड बैंक के रजिस्ट्रेशन का रिनूअल भोपाल से होता है लेकिन ब्लड बैंक के रजिस्ट्रेशन का रिनूअल कराने को लेकर ध्यान नहीं दे रहे हैं और न ही उसके मानक पूरे कर पा रहे हैं। ब्लड बैंक पर सरकारी लापरवाही पूरी तरह हावी है।
इसलिए संचालित नहीं हो पा रही मशीन
ब्लड सेपरेशन यूनिट को संचालित करने के लिए कुछ नियम का पालन करना बेहद जरूरी है। बावजूद इसके जिला अस्पताल प्रबंधन इन नियमों का पालन नहीं कर पा रहा है। सबसे पहले इसके लिए ब्लड बैंक के रजिस्ट्रेशन का रिनूअल होना जरूरी है लेकिन जिला अस्पताल का ब्लड बैंक पिछले नौ साल से बिना रिनूअल के चल रहा है। इसके साथ ही इसके लिए अलग से करीब पांच सौ मीटर जगह की आवश्यकता है। जहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित की जा सके, लेकिन इसके लिए अस्पताल प्रबंधन जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करने में रुचि नहीं दिखा रहा है। इसके साथ ही ब्लड बैंक के लिए चौबीस घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता जरूरी है लेकिन जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में चौबीस घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं है।

नए अस्पताल की बिल्डिंग में दी जाएगी जगह
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरपी पांडेय ने बताया कि मशीन के दो तीन पार्ट जल गए हैं जिससे मशीन का अभी शुरू नहीं की जा सकी है। हमारे पास पहले जगह नहीं थी। जिससे वह स्थापित नहीं कराई जा सकी लेकिन अब हमारे पर नउ भवन में मशन के लिए परर्याप्त स्थान है। विभाग को पत्र लिखकर मशीन के पार्टस भेजने के लिए कहा है। जैसे ही पार्टस आ जाते हैं तो अन्य प्रक्रिया पूरी कर मशीन को स्थापित कराया जाएगा और मरीज को लाभ दिया जाएगा।

ब्लड बैंक में चल रही खून की कमी को दूर करेगी मशीन
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