परिवार नियोजन में पुरुष नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, महिलाओं के मुकाबले नाम मात्र की पुरुष नसबंदी

परिवार नियोजन में पुरुष नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, महिलाओं के मुकाबले नाम मात्र की पुरुष नसबंदी
परिवार नियोजन में पुरुष नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, महिलाओं के मुकाबले नाम मात्र की पुरुष नसबंदी

Unnat Pachauri | Updated: 14 Jul 2019, 05:00:00 AM (IST) Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

- भ्रम के चलते पुरुष नहीं आ रहे आगे, जिले का लक्ष्य नहीं हो रहा पूरा
- प्रजनन दर के हिसाग से जिले में हैं औसतन प्रति परिवार 4 बच्चे

उन्नत पचौरी
छतरपुर। पुरुष प्रधान समाज में परिवार चलाने की जिम्मेदारी भले ही अधिकांशत: पुरुषों के कंधे पर हो लेकिन जनसंख्या नियोजन के मामले में ऐसा नहीं है। परिवार व देश को तरक्की की राह पर अग्रसर करने वाली बच्चे दो ही अच्छे के फार्मूले पर अमल करते हुए जनसंख्या नियोजन के स्थाई उपाय नशबंदी कराने में महिलाएं पुरुषों से कोसों आगे हैं। जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रशासनिक स्तर पर लाख दावे किए जाए जा रहे हैं और कराडों रुपए पानी की तरह खर्च किए जा रहे हैं। इसेक बाद भी जिले में जागरूकता नहीं आ पा रही है। बीते वर्षों में अपनाए गए परिवार नियोजन में पुरुषों की संख्या नाम मात्र की है। परिवार नियोजन को मुख्य कड़ी बनाकर प्रशासन समय-समय पर जिले में शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन भ्रम के चलते इन शिविरों में पुरुष महिलाओं से कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी ज्यादा सुरक्षित है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को प्रोत्साहन राशि भी ज्यादा दी जाती है, लेकिन फिर भी महिलाओं से कम पुरुष नसबंदी करवाते हैं।
इसी कारण पुरुष नसबंदी करवाने के मामले में जिले की स्थिति नाम मात्र की है। विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार परिवार नियोजन के लिए वर्ष 201८-1९ में जिले को 1५५00 नसबंदी का लक्ष्य मिला था। लेकिन इसमें महज 2२ पुरुषों ने नसबंदी कराई, जबकि महिलाओं की संख्या ९ हजार १७६ रही। वहीं इस वर्ष 201९-२० में जिले को लक्ष्य 15 हजार ५०० ही मिला है। जिसमें अभी तक पुरुष नशबंदी शून्य है और महिला नसबंदी ऑपरेशन की संख्या १५० हो चुकी है।
पुरुषों में बन रही भ्रम की स्थिति :
दरअसल पुरुषों में जागरूकता की कमी नसबंदी के ऑपरेशन में आड़े आ रही हैं। पुरुषों का मानना है कि अगर ऑपरेशन हो जाता है तो उन्हें कई माह तक बेड रेस्ट करना पड़ेगा। कमजोरी आ जाएगी आदि से दहाड़ी मजदूरी पर भी इसका असर पड़ेगा। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि यह ऑपरेशन महिलाओं की तुलना पुरुषों में ज्यादा आसान है और पूर्णता: सुरक्षित है। आईईसी सलाहकार दीप्ती जैन ने बताया कि पुरुष नसबंदी पूरी तरह से विश्वसनीय, आसान, स्थाई और भयमुक्त है नसबंदी के तुरंत बाद हितग्राही अपने घर जा सकता है।
औसतन चार बच्चे हैं प्रति परिवार :
स्वास्थ्य विभाग के लाख कोशिशों के बाद भी जिले में जनसंख्या में लगाम नहीं लग पा रही है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग जारी किए गए आंकडों के अनुसार जिले का प्रजनन दर 3.8 है। जिससे औसतन प्रति परिवार 4 बच्चे हैं। जो काफी अधिक है। हालाकि जिले में सामान्य प्रजनन दर 2.1 होनी चाहिए थी।
जनसंख्या स्थिरता माह में मिला लक्ष्य :
आईईसी सलाहकार दीप्ती जैन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ११ जुलाई से ११ अगस्त तक विश्व जनसंख्या स्थिरता माह मनाया जा रहा है, जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिले में नसबंदी के लिए ६३ पुरुषों और १२३३ महिलाओं की नसबंदी का लक्ष्य दिया गया।

हितग्राहियों को मिलती है प्रोत्साहन राशि :
- पुरुष नसबंदी कराने पर हितग्राही को ३ हजार रुपए और प्रेरक को ४०० रुपए
- महिला नसबंदी कराने पर हितग्राही को २ हजार रुपए और प्रेरक को ३०० रुपए
- प्रशव पश्चात साद दिन के अंदर नसबंदी कराने पर हितग्राही को ३ हजार रुपए और प्ररक को ४०० रुपए
- प्रशव के तुरंत बाद ही पीपीआईसूसीडी लगवाने पर हितग्राही को ३ सौ और प्रेरक को १५० रुपए

फाइल फैक्ट :
वर्ष लक्ष्य महिला पुरुष
२०१८-१९ १५५०० ९१७६ २२
२०१९-२० १५५०० १५० ०० अभी तक

जिले में प्रजनन दर
हाल में है- ३.८
होना चाहिए- २.१
इनका कहना है :
हमारी ओर से हर वर्ष पूरा प्रयास किया जाता है और टीमों द्वारा लोगों को पुरुष नसबंदी के लिए समझाइस भी दी जाती है, लेकिन इसके बाद भी पुरुषों की संख्या कम है इसके लिए हम व्यापक पैमाने पर प्रचार-प्रसार करेंगे और लोगों को जागरुक करेंगे।
- डॉ. वीएस वाजपेयी, सीएमएचओ, छतरपुर

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