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छतरपुर

आदिवासी बाहुल्य 10 आदर्श पंचायतों में बनाई मॉडल आंगनबाड़ी

आंगनबाड़ी में बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आदर्श आंगनबाड़ी का निर्माण ग्राम रानीपुर, केवलाई, जसगंवाकला, बमनी, भारगुंवा, हतना, सिसोलर, मनुरिया, परमाझोर, धरमपुर में किया जा रहा है। सभी गांव आदिवासी बाहुल्य हैं।

छतरपुरJul 10, 2024 / 11:07 am

Dharmendra Singh

aganbadi

केवलाई में मॉडल आंगनबाड़ी

छतरपुर. जिला में स्थित आदर्श पंचायतों में शासन की योजनांतर्गत 23 लाख की लागत से आगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए जिले की 10 पंचायतों को चिह्नित कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इन आंगनबाड़ी में बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आदर्श आंगनबाड़ी का निर्माण ग्राम रानीपुर, केवलाई, जसगंवाकला, बमनी, भारगुंवा, हतना, सिसोलर, मनुरिया, परमाझोर, धरमपुर में किया जा रहा है। सभी गांव आदिवासी बाहुल्य हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग जिला संयोजक डॉ. प्रियंका राय ने बताया कि 10 प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम पंचायतों में 2 करोड़ 80 लाख से 10 आगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य कराया गया है।

बच्चों को मिलेंगी ये सुविधाएं


एक आंगनबाड़ी केन्द्र के निर्माण में 28 लाख रुपए की राशि आदिवासी वित्त विकास निगम द्वारा दी गई थी और इनका निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी द्वारा कराया गया। इसके बाद ये आंगनबाड़ी महिला एंव बाल विकास विभाग को सौंप दिया गया। बच्चों की सुविधा को देखते हुए पूरा आंगनबाड़ी परिसर बाउंड्री से कवर रहेगा। परिसर के अंदर ही बच्चों के लिए खेल मैदान, पढऩे के लिए लाइबेरी, पानी की व्यवस्था, वॉशरूम, पार्क, झूले, छोटे बच्चो के सोने के लिए पालनागृह सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। जिससे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में तेजी से विकास होगा और इसका मॉडल देखते हुए गांव के लोग अपने बच्चों को पढऩे के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजगे।

इधर, प्री-स्कूल में बदल रहे 100 आंगनबाड़ी


आंगनबाडिय़ों को शैक्षणिक रूप से मजबूत करने एवं बच्चों को मिलने वाली प्राथमिक शिक्षा के सुदृढ़ बनाने के लिए जिले की 100 आंगनबाडी केन्द्रों को प्री प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र अब पोषण आहार वितरण स्थान नहीं रहेगा। अब आंगनबाडी केंद्रों को विकसित कर नर्सरी स्कूल की तर्ज पर चाइल्ड फ्रैंडली बनाया जा रहा है।

खेल-खेल में सीखेंगे बच्चे


आंगनबाड़ी केंद्र में प्रतिदिन समय सारणी के अनुसार अलग-अलग गतिविधियां बच्चों से करवाना जैसे गीत, कहानी, इनडोर खेल, आउटडोर खेल, समामूहिक खेल, एकल खेल, खेल-खेल में रगों का ज्ञान, अक्षरों का ज्ञान, पशु पक्षियों की पहचान, हमारे मददगार डाक्टर, पोस्टमैन, बढई, मोची, दर्जी के बारे में जानकारी, प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुओं की जानकारी व गतिविधियों को रोचक तरीके से आयोजन करना सिखाया जा रहा है।

केंद्रों पर महीने में एक बार बाल चौपाल और बाल सभाएं होंगी


सामुदायिक सहभागिता बढाऩे के लिए केद्रों पर प्रत्येक माह बाल चौपाल और प्रत्येक सप्ताह बाल सभाएं आयोजित की जाएंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों की आयु अनुसार गतिविधियों को रोचक ढंग से करवाना और उनमें छुपी प्रतिभाओं को पहचान करवाना सिखाया जा रहा है। प्री-स्कूल किट का बेहतर उपयोग और अनुपयोगी सामग्री से प्री-स्कूल लर्निंग सामग्री तैयार कैसे की जाए इसके तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।

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