अप्रेल की शुरुआत में ही जिले में 100 से ज्यादा नलजल योजनाएं हुईं ठप

कम बारिश से इस बार जल्द गिरा भूजल स्तर, गर्मी बढ़ते ही गांव-गांव में गहराया जल संकट
जिले में 359 नल-जल योजनाएं संचालित, आधी भी ठीक से नहीं कर रही काम

By: Dharmendra Singh

Published: 03 Apr 2021, 07:27 PM IST

छतरपुर। सूरज के तीखे तेवरों ने अपना असर दिखाना शुरू ही किया है कि बुन्देलखण्ड में जहां-तहां जल संकट गहराने लगा है। अक्सर पानी की समस्या से जूझने वाले छतरपुर जिले में लगातार गिरते भू जल स्तर के कारण सरकारी और गैर सरकारी जलस्त्रोत सूखने लगे हैं। करोड़ों रूपए खर्च कर जिले में संचालित 359 नल-जल योजनाओं में से 100 के करीब नल जल योजनाएं अधिकृत रूप से बंद पड़ी हैं जबकि गैर अधिकृत आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक नल-जल योजनाएं ठप हो गई हैं।

हकीकत में सरकारी आकंड़ो से ज्यादा योजनाएं ठप
जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आंकड़े अब भी जिले में गनीमत की तस्वीर पेश कर रहे हैं। विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले में करोड़ों रूपए खर्च कर 359 नल-जल योजनाएं प्रारंभ की गई थीं। इन योजनाओं का मकसद गांव-गांव में विभिन्न जलस्त्रोतों से लोगों के घरों तक नल के जरिए पानी पहुंचाना होता है। विभाग का कहना है कि इन 359 नल-जल योजनाओं में से 267 नल-जल योजनाएं अब भी चालू हैं जबकि 92 नल-जल योजनाएं जलस्त्रोतों के सूखने के कारण एवं ग्राम पंचायतों के ध्यान न देने के कारण बंद हो गई हैं। जिले के मवई घाट, रामटौरिया, बोकना, नंदगांयबट्टन, मचा, मवैया, तिंदनी, सिंगरावन कला आदि में नल जल योजनाएं फरवरी माह में ही विभिन्न कारणों से बंद हो गईं। उधर हकीकत ये है कि 359 में से 250 से अधिक योजनाएं बंद पड़ी हैं जिन गांव में करोड़ों रूपए खर्च कर नल- जल योजनाएं शुरू की गई थीं वहां इनके संचालन की जिम्मेदारी पंचायतों को दी जाती है। कई स्थानों पर जलस्त्रोत सूख गए, कई स्थानों पर पंचायतें नल का शुल्क नहीं उगा पायीं, कई स्थानों पर यंत्रों के खराब होने के कारण उक्त योजनाएं वर्षों से धराशाई पड़ी हैं।

पिछले साल से कम हुई वर्षा, इसलिए भूजल स्तर गिरा
इस वर्ष भूजल स्तर के नीचे के कारण भी जल संकट गहराने लगा है। पिछले वर्ष जहां जिले में 1163.25 मिमी बारिश दर्ज की गई थी तो वहीं इस वर्ष सिर्फ 745.56 मिमी बारिश दर्ज हुई है। जाहिर है वर्षा कम होने का असर भूजल स्तर पर भी पड़ा है। पिछले वर्ष और इस वर्ष के ब्लाक स्तरीय आंकड़े भी गिरते भूजल स्तर की कहानी कह रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट बताती है कि फरवरी में ही छतरपुर का भूजल स्तर 16.49 मीटर नीचे पहुंच गया। इसी तरह राजनगर का 16.38, नौगांव ब्लाक का 18.25, बिजावर का 21.86, बड़ामलहरा का 12.39, बक्स्वाहा का 23.72, लवकुशनगर का 11.97 और गौरिहार का 9.85 मीटर भूजल स्तर पहुंच चुका है। यदि जिले का औसत भूजल स्तर देखा जाए तो यह 16.44 मीटर तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि गर्मियेंा के दौरान यह 20 मीटर से नीचे भी पहुंच सकता है।

हैण्डपंप खराब हो तो इन नंबरों पर करें शिकायत
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कहा कि शासन के निर्देश के अनुसार जल संकट से लोगों को निजात दिलाने के लिए विभाग ने तत्काल सहायता हेतु एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के हैण्डपंप खराब होने संबंधी सूचनाओं पर तत्काल अमल किया जाएगा। विभाग ने एमआई कुरैशी मोबाइल 9407300356, रहीस कुमार द्विवेदी 7024182783, श्याम विनायक सिंह 8085113360 को जारी करते हुए लोगों से इन नंबरों पर शिकायतें पहुंचाने की अपील की है।

Dharmendra Singh
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