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छतरपुर

नया अंतरराज्यीय बस टर्मिनल अटका, पुराने बस स्टैंड में अव्यवस्थाओं से बढ़ी परेशानी

पहले बजट के अभाव में, फिर डीपीआर और अब स्थान परिवर्तन के चक्कर में पूरी योजना अभी तक अटकी हुई है। वहीं आइएसबीटी अटकने और शहर में मौजूद श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराज्यीय बस स्टैंड की समस्याओं के चलते यात्रियों की समस्याएं बढ़ रहीं हैं।

छतरपुरJul 10, 2024 / 11:02 am

Dharmendra Singh

ISBT

बस स्टैंड पर बसों के आसपास हाथ ठेलों का जमावड़ा

छतरपुर. जिला मुख्यालय पर 62 करोड़ की लागत से बनने वाला अंतरराज्यीय बस स्टैंड छतरपुर अटका हुआ है। पहले बजट के अभाव में, फिर डीपीआर और अब स्थान परिवर्तन के चक्कर में पूरी योजना अभी तक अटकी हुई है। वहीं आइएसबीटी अटकने और शहर में मौजूद श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराज्यीय बस स्टैंड की समस्याओं के चलते यात्रियों की समस्याएं बढ़ रहीं हैं। बस स्टैंड के बाहर जाम, अंदर अव्यवस्थाओं से लोग परेशान हैं। रोजाना 400 बसों के संचालन से पुराने समय का बस स्टैंड नाकाफी साबित हो रहा है।

तीन साल से से घूम रही फाइल


शहर के महोबा रोड पर निर्मित होने वाले आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) का निर्माण तीन साल से नगर पालिका छतरपुर की लापरवाही के चलते अटका हुआ है। इस स्टैंड की लागत 62.4 करोड़ है, वहीं नगर पालिका की सालाना आय 276 करोड़ रुपए है। इसके बाद भी पीपीपी मोड पर निर्मित होने वाले इंटर स्टेट बस टर्मिनल स्टैंड का कार्य नगर पालिका प्रशासन अटकाए हैं। जिला प्रशासन ने खसरा नंबर 449/1 में स्थित 3.402 हेक्टेयर शासकीय जमीन नगर पालिका के नाम आवंटित की है। इसके बाद नगर पालिका ने इसका डीपीआर तैयार कर नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल को भेजा। जिस पर नगरीय प्रशासन ने पीपीपी मोड पर बस स्टैंड का निर्माण करने की बात लिखते हुए प्रस्ताव वापस भेज दिया। तब से इस प्रोजेक्ट की फाइल एक उपयंत्री से दूसरे उपयंत्री के पास घूमती रही और अब स्थान परिवर्तन की तैयारी में मामला फिर अटक गया है।

व्यवस्थित नहीं सुविधाएं


बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए न तो प्रतीक्षालय साफ और व्यवस्थित हैं, न पीने के पानी की व्यवस्था है। बस स्टैंड परिसर में कहीं भी रखी गुमटियों, बसों के आगे अड़ाकर खड़े किए फल व अन्य खाद्य-पेय बिक्री के हाथ ठेले व आटो के कारण बसों व यात्रियों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। बस स्टैंड के प्रवेश द्वार पर दिन में कई बार जाम लग जाना आमबात है। ऐसे में लोगों को खासी परेशानी होती है। परिसर में आवारा पशु विचरण करते रहते हैं। अतिक्रमण करने वाले अपने दुकान की हद और सीमाएं भूलकर परिसर में कब्जा किए हैं, जिससे बसों के लिए जगह कम पडऩे लगी है। परिसर में बेतहाशा अतिक्रमण होने के कारण यहां सुबह से लेकर रात तक जाम की स्थिती बनी रहती है। बस स्टैंड नंबर एक और दो पर प्रदेश भर से आने वाले यात्री वाहन मुख्य मार्गों पर खड़े होकर सवारियों को बैठाते-उतारते हैं। इस कारण यात्रियों को बस स्टैंड के अंदर जाने में भारी मशक्कत करना पड़ती है।

शहर से गुजर रही रोजाना 400 बसें


शहर के बस स्टैंड पर दिन में रोज करीब 400 से अधिक बसों का आवागमन होता है। यहां से यूपी रोडवेज, मप्र परिवहन की बसों के साथ बहुत सारीं प्राइवेट बसें इंदौर, भोपाल, प्रयागराज, झांसी, आलीगढ़, उज्जैन, कानपुर, चित्रकूट, अजमेर, कोटा, नागपुर, महोबा, बांदा, दमोह, जबलपुर, पन्ना, सतना, रीवा, टीकमगढ़, गौरिहार, लवकुशनगर, महाराजपुर, बिजावर, हरपालपुर सहित अनेक शहरों और नगरों के लिए चलती हैं। ऐसे में यहां सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। इतनी बड़ी संख्या में बसों व यात्रियों के लिए परिसर अतिक्रमण व अव्यवस्था के कारण संकरा हो जाने से परेशानी बढ़ गई है।

इनका कहना है


आइएसबीटी निर्माण का कार्य हाउसिंग बोर्ड को करना है। उनसे ही पता चलेगा कि अभी क्या स्थिति है।
माधुरी शर्मा, सीएमओ, छतरपुर

फिलहाल कोई अपडेट नहीं है। लैंड यूज की फाइल पर डिसीजन होना है। जैसे ही कोई जानकारी आती है। तो अपडेट करता हूं।
एमएल अहिरवार, एसडीओ, हाउसिंग बोर्ड

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