कलेक्टर के आदेश के बावजूद दे रहे तारीख पर तारीख, तालाबों पर अतिक्रमण पर नहीं हो रही कार्रवाई

जनवरी में कलेक्टर मोहित बुंदस ने दिए थे कार्रवाई करने के आदेश
तारीखों में ही निकाल दिया एक महीना

By: Dharmendra Singh

Published: 29 Mar 2019, 06:00 AM IST

छतरपुर। कलेक्टर छतरपुर मोहित बुंदस ने शहर के प्रमुख आठ तालाबों पर अतिक्रमण हटाने के लिए बेदखली के आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे। जिस पर अमल करते हुए प्रभारी नजूल तहसीलदार की कोर्ट में 31 जनवरी को लोगों को को अपना पक्ष रखने और बेदलख करने के आदेश जारी होने थे। लेकिन प्रभारी नजूल तहसीलदार के अवकाश पर जाने के कारण आदेश जारी करने के बजाए अगली सुनवाई की तारीख 28 मार्च रख दी गई। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद पेशी की तारीख में संशोधन कर 11 मार्च पेशी की तारीख की गई। लेकिन फिर 11 मार्च को भी तारीख बढ़ाकर 28 मार्च कर दी गई। और अब 28 मार्च को भी बेदखली के आदेश नहीं हो सके। एक बार फिर आगे की तारीख दे दी गई। कार्रवाई करने के बजाए तारीख पर तारीख देने से मामला एक बार फिर से लटकता नजर आ रहा है।
वर्ष 2014 में चिन्हांकन के बाद रुक गई थी कार्रवाई
वर्ष 2011 में हाईकोर्ट में लगाई गई जनहित याचिका में बताया गया कि, शहर के राव सागर तालाब, ग्वाल मंगरा तालाब, प्रताप सागर, रानी तलैया, किशोर सागर, सांतरी तलैया, विंध्यवासनी तालाब और हनुमान टौरिया के पीछे वाली तलैया के ग्रीन बेल्ट में मकान बना लिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में वर्ष 2014 में तात्कालीन कलेक्टर छतरपुर मसूद अख्तर को आदेश देते हुए कहा कि, एक वर्ष के अंदर सभी तालाबों के सीमांकन कराकर, अतिक्रमण के प्रकरण दर्ज किए जाएं। कलेक्टर ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर सभी तालाबों के सीमांकन कराकर तहसील न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराए। लेकिन अतिक्रमण हटाने को लेकर शुरु हुई कवायद कुछ दिन बाद ठंडे बस्ते में चली गई थी। कलेक्टर मोहित बुंदस ने पत्रिका की खबरों का संज्ञान लेकर जनवरी माह मेें इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कार्रवाई एक बार फिर से लटकती नजर आ रही है।
तालाब में बस गई है कॉलोनियां
शहर के आठ तालाबों पर बने ग्रीन बेल्ट पर कॉलोनियां बसा दी गई। ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण रोकने और हटाने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व कलेक्टर भी कार्रवाई के आदेश भी दे चुके थे। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से तालाबों के ग्रीन बेल्ट धीरे-धीरे खत्म हो गए हैं। तालाबों तक पानी पहुंचाने वाले नालों को भी कब्जाकर खत्म कर दिया गया। जिससे तालाब गर्मी में सूखने लगे और शहर का जलस्तर लगातार गिर गया। पिछले पांच साल में दो बार ऐसा हुआ कि, जल स्तर 10 मीटर तक गिर गया। तालाबों को बचाने के लिए 2014 में लगाई गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने कार्रवाई करने के आदेश दिए, लेकिन 4 साल से कार्रवाई ठंड़े बस्ते में पड़ी थी।
तालाबों पर इतना है कब्जा
हाईकोर्ट के आदेश पर शहर के तालाबों पर अतिक्रमण के मामलों के चिन्हांकन किए गए थे। जिसमें 10.50 एकड़ रकबा वाले राव सागर तालाब पर अतिक्रमण के आठ मामले, 9 एकड़ एरिया वाले ग्वाल मंगरा तालाब पर अतिक्रमण के 28 मामले, 35 एकड़ रकबा वाले प्रताप सागर तालाब पर अतिक्रमण के 109 मामले, साढ़े आठ एकड़ के किशोर तालाब पर अतिक्रमण के 14 मामले, 6 एकड़ की सातंरी तलैया पर अतिक्रमण के 7, साढ़े तीन एकड़ रकवा वाले विंध्यवासनी तलैया पर अतिक्रमण के 7 मामले चिन्हित हुए थे।
चुनाव की ट्रेनिंग में हूं
लोकसभा चुनाव के लिए ट्रेनिंग की ड्यूटी में हूं, तालाब वाले मामले में सुनवाई तो आज की रखी गई थी, लेकिन चुनाव ड्यूटी के कारण सुनवाई नहीं हो सकी है। संबंधित बाबू ने अगली तारीख दी है।
श्रीपत अहिरवार, नजूल नायब तहसीलदार

 

Dharmendra Singh
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