scriptOnly 90 professors for 14 thousand students, management of 172 college | 14 हजार विद्यार्थियों के लिए केवल 90 प्रोफेसर, 25 कर्मचारियों के भरोसे 172 कॉलेजों का प्रबंधन | Patrika News

14 हजार विद्यार्थियों के लिए केवल 90 प्रोफेसर, 25 कर्मचारियों के भरोसे 172 कॉलेजों का प्रबंधन

मर्ज कर कॉलेज कैंपस में चल रहा विश्वविद्यालय, 6 जिलो के डेढ लाख छात्रों का भविष्य निर्भर

 

छतरपुर

Updated: May 13, 2022 07:25:22 pm


छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की कक्षाएं इस वर्ष से महाराजा कॉलेज में प्रारंभ हो गई हैं। महाराजा कॉलेज में इस वर्ष आए साढ़े तीन हजार नए विद्यार्थियों को मिलाकर अब विद्यार्थियेां की संख्या 14 हजार पहुंच चुकी है। इन विद्यार्थियों के बैठने एवं पढ़ाने के लिए यहां पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए भी महाराजा कॉलेज के पास सिर्फ 75 नियमित प्रोफेसर, 10 अतिथि विद्वान एवं 5 जनभागीदारी समिति द्वारा लिए गए अतिथि विद्वान मौजूद हैं। कहने के लिए यहां अब 21 अध्ययन शालाएं संचालित हो रही हैं और 19 शोध कार्य भी प्रारंभ हो गए हैं लेकिन ज्यादातर काम सीमित संसाधनों के दम पर किया जा रहा है। जबकि 6 जिलों के 172 कॉलेज एफिलेटेड हैं।
मर्ज कर कॉलेज कैंपस में चल रहा विश्वविद्यालय
मर्ज कर कॉलेज कैंपस में चल रहा विश्वविद्यालय
स्टाफ की कमी भी बनी हुई है
महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय 8 वर्षो से स्टाफ, सुविधाओं के बिना छह जिलों के 1७2 कॉलेजों का प्रबंधन संभाल रहा है। लंबी प्रक्रिया और वर्षों इंतजार के बाद वर्ष 2011 में छतरपुर में विवि के लिए प्रस्ताव पारित कर इसका नाम महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी रखा गया और रजिस्ट्रार के रूप में एमके राय की नियुक्ति कर दी गई थी। इसके बाद 9 जुलाई 2014 को मप्र राजपत्र में प्रकाशन के बाद यहां विधिवत विवि की स्थापना करके शासकीय स्वशासी महाराजा कॉलेज के 4 कमरों व एक अहाते में खोल दिया गया। इससे सागर, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह और निवाड़ी जिले के 1७2 कॉलेज संबद्ध जरूर कर दिए गए, लेकिन विवि को खुद का भवन नहीं मिला, महाजारा कॉलेज को मर्ज कर भवन की कामचलाऊ व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं पर्याप्त स्टाफ और अन्य साधन-सुविधाएं भी हासिल नहीं हो सकी हैं। केवल 25 कर्मचारी और 40 अन्य कर्मचारी आउटसोर्स से काम करके जैसे-तैसे कॉलेजों की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। बेहतर शिक्षा व व्यवस्था के सूचारू संचालन के लिए बजट की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी है।
अधर में लटकी है 236 पदों पर भर्ती प्रक्रिया
वर्ष 2015-16 में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विवि में 236 पदों की स्वीकृति मिल गई थी, पर इन पदों पूर्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया तभी से अटकी है। भर्ती के लिए 4000 अभ्यर्थियों ने एक-एक हजार रुपए शुल्क भरकर आवेदन भरे थे। बाद में नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लग गई।

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