1000 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए 50 यात्री रात में बक्स्वाहा पहुंचे

बोले- न सरकार ने की मदद, न कंपनी ने, कभी नहीं जाएंगे अब वापस, 3 मई से लगातार चल रहे हैं पैदल, परेशानियों का किया बखान

By: Samved Jain

Published: 10 May 2020, 09:00 AM IST

बक्स्वाहा. लॉक डाउन के हुई कंपनियों में हुई तालाबंदी के शिकार मजदूरों गुजरात के गोधरा में जब कोई सहारा नहीं मिला तो वह पैदल ही अपने गांव के लिए निकल पड़े। 3 मई से चलते-चलते करीब 50 मजदूरों ने आधी दूरी तय कर ली हैं, आधा अब भी शेष हैं। बक्स्वाहा पहुंचने पर जब इनसे व्यथा पूछी तो कहानी रुला देने वाली थी।


मजदूर सरकार और कंपनियों द्वारा हाथ खड़े करने और उन्हें मरने के लिए छोड़ देने की बात बताते नजर आए। इतना ही नहीं किन हालातों में वह यहां तक पहुंचे, इसका भी बखान उन्होंने किया। सभी मजदूरी यूपी के चित्रकूट के हैं, जिनका अगला पड़ाव अपना गांव ही हैं। जहां जाने के बाद वापस अब वह कभी भी दूसरे राÓयों में मजदूरी करने नहीं जाना चाहते। संकट के समय मेें लिए सबक ने मजदूरों को बहुत कुछ सिखा दिया हैं।


मजदूर रमेश ने बताया कि वह सभी पुरुष, महिला गुजरात के गोधरा स्थित स्टील कोठी कंपनी में काम करते थे। वहां रहकर लंबे समय से काम करते आ रहे हैं, लेकिन संकट के समय में सबसे पहले कंपनी ने हाथ खड़े किए, जिससे हम बेसहारा होने की स्थिति में हो गए। चालीस दिनों से हमारी जिंदगी में काफी कष्ट देखने मिले। इस दौरान सरकार से उम्मीद थी, लेकिन वहां से भी हमें कोई राहत नहीं मिली। समाजसेवियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन के बल पर अब तक हमारा काम चलता रहा, लेकिन अब स्थिति अधिक खराब हो चली थी और अपने गांव पहुंचने के अलावा कोई रास्ता नहीं थी।

सभी ने मिलकर योजना बनाई और पैदल ही गोधरा से चित्रकूट के लिए 3 मई की सुबह निकल आए। लॉक डाउन नहीं खुलने के कारण बीच में कई जगह हमें खदेड़ा भी गया, लेकिन हम नहीं रुके और चलते-चलते यहां तक आ गए। हमारे साथ महिलाएं और ब'चे भी है, जो दिन में एक-एक बार खाते हुए इतना चल रहे हैं। हमारे पैर भर आए हैं। आगे हम बच भी पाएंगे या नहीं, लेकिन हम वापस अब कभी भी अन्य राÓयों में काम करने नहीं जाएंगे।


यह सभी मजदूर हाइवे पर चलते-चलते बीती रात बक्स्वाहा पहुंचे थे। इसके बाद वह अब चित्रकूट की ओर निकल गए हैं। अभी भी करीब 250 किलोमीटर की यात्रा उनकी शेष रह गई हैं। मजूदरों की इस स्थिति को देखकर प्रशासनिक दावों में बड़ी संख्या में मजदूरों को वापस बुलाने की पोल भी खुलती नजर आ रही हैं। जबकि बड़ी संख्या में रोजाना मजदूरों के आने की संख्या भी लगातार जारी है। मजदूरों के बताए अनुसार उनकी इस समय ना तो प्रशासन ने कोई मदद की है और न ही कंपनी मालिकों ने। ऐसे में मजदूरों की नाराजगी साफ जाहिर होती है, उन्होंने जो कहा वह देश की आगामी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा भी हो सकता है।

Samved Jain Desk/Reporting
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