script बुंदेलखंड से पंडित रामसहाय तिवारी ने किए संविधान की मूल प्रति में हस्ताक्षर | Pandit Ramshay Tiwari signed original copy of Constitution | Patrika News

बुंदेलखंड से पंडित रामसहाय तिवारी ने किए संविधान की मूल प्रति में हस्ताक्षर

locationछतरपुरPublished: Jan 27, 2024 07:10:31 pm

Submitted by:

Dharmendra Singh

उत्तरदायी शासन में मुख्यमंत्री थे पंडित रामसहाय तिवारी, चंद्रशेखर आजाद को उपलब्ध कराई रिवाल्वर, बाद में गांधी से जुड़े

पंडित रामसहाय तिवारी
पंडित रामसहाय तिवारी
छतरपुर. उत्तरदायी शासन के कुछ महीने बाद विन्ध्यप्रदेश राज्य का गठन हुआ, जिसमें कामना प्रसाद सक्सेना प्रधानमंत्री, पंडित रामसहाय तिवारी वित्त मंत्री और पं. लालाराम वाजपेयी गृहमंत्री और गोपाल शरण सिंह लोकनिर्माण मंत्री बनाए गए। नौगांव को इसकी राजधानी बनाया गया था। यह मंत्रीमंडल केवल बुंदेलखंड के 35 राज्यों को शामिल करके बनाया गया, क्योंकि रीवा राज्य तबतक विन्ध्यप्रदेश में शामिल नहीं हुआ था। लेकिन कुछ समय बाद रीवा राज्य विन्ध्यप्रदेश में शामिल होने के लिए तैयार हो गया।
नौगांव के बाद रीवा बनी राजधानी
इसके बाद नए विन्ध्यप्रदेश की सीमाओं का निर्धारण हुआ और राजधानी नौगांव की जगह रीवा को बनाया गया। नए विन्ध्यप्रदेश में अवधेश प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बनाए गए। रीवा राजधानी बनने के बाद से 1950 तक भारतीय संविधान बनाने की प्रक्रिया चली। इस दौरान पंडित रामसहाय तिवारी को बुंदेलखंड से संविधान सभा के सदस्य के रुप में शामिल किया गया और 26 जनवरी 1950 को जब पूरे देश में संविधान लागू किया गया, तब संविधान की मूल प्रति में हस्ताक्षर करने वाले निर्माता सदस्य के रुप में पं. तिवारी ने भी हस्ताक्षर किए और भारतीय गणतंत्र लागू हुआ।

छतरपुर जिले के टहनगा में जन्में तिवारी
भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के अमृत महोत्सव में प्रकाशित जीवने के अनुसार पंडित रामसहाय तिवारी का जन्म 10 जून 1902 को छतरपुर जिले के टहनगा गांव में हुआ। पिता मातादीन तिवारी एवं माता कृष्णा देवी थी। तिवारी की प्रारम्भिक शिक्षा श्रीनगर महोबा में हुई। मिडिल पास करने के बाद अध्यापक की नौकरी मिली लेकिन राजनीतिक सक्रियता के कारण नौकरी छोडऩी पड़ी। देशी रियासतों में राष्ट्रीय आन्दोलन के सक्रिय नेता माने जाने लगे । 1925 में तिवारी को छतरपुर राज्य के द्वारा 2 वर्ष का कारावास दिया गया, 1929 में पुन: जेल की यात्रा की। चंद्रशेखर आजाद के बुन्देलखण्ड आगमन के बाद क्रान्तिकारी गतिविधियों के प्रति अग्रसर हुए और आजाद के लिए 6 रिवॉल्वर का इन्तजाम भी तिवारी ने किया। बाद में गांधी से प्रभावित होकर आपने क्रान्ति का मार्ग त्यागकर अहिंसात्मक मार्ग को अपनाया। चरण पादुका में 14 जनवरी 1931 को अंधाधुन्ध गोलियां चलायी गई जिसमें कई लोगों की जान गई । इस घटना से क्षुब्ध तिवारी कर्नल पिनेकर को मारने जा पहुंचे लेकिन वहां उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया गया। तिवारी को 9 वर्ष का कारावास हुआ साथ ही उनकी सम्पूर्ण सम्पत्ति भी जब्त कर ली गई । अंतत: जुलाई 1931 में सभी राजनीतिक बंदियों के साथ स्वतन्त्र कर दिया गया । 1943 में जब छतरपुर राज्य प्रजामण्डल का गठन हुआ तो आप उसके मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए और राज्य में सुगठित सत्याग्रह आन्दोलन की शुरुआत हुई और स्व गिरफ्तारियां सत्याग्रहियों द्वारा दी गई। 1948 में विन्ध्य प्रदेश के गठन के बाद कामता प्रसाद सक्सेना प्रधानमंत्री बनें और तिवारी को वित्त एवं राजस्व मंत्री नियुक्त किया गया। तिवारी संविधान सभा के सदस्य भी मनोनीत हुए । लोकसभा सदस्य के रूप में तिवारी का कार्यकाल 18 वर्ष रहा। 31 अक्टूबर 1990 को तिवारी का देहान्त हुआ।

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