अटल भू-जल योजना के तहत जिले की तीन पंचायतों में पायलेट प्रोजेक्ट शुरु

चिंहित गावों में जल संरचनाओं का हो रहा सर्वे, पानी संरक्षण के लिए होगा निर्माण
नए स्ट्रक्टर बनाने के साथ ही ऐतिहासिक तालाब और बाबडियों का भी होगा जीर्णोद्धार

By: Dharmendra Singh

Published: 05 Mar 2021, 06:51 PM IST

छतरपुर। जिले के छतरपुर, नौगांव एवं राजनगर क्षेत्र में अटल भूजल योजना के तहत 5 वर्षीय योजनांतर्गत जल संवर्धन एवं भूजल स्तर में सुधार सहित अन्य गतिविधियां की जाएंगी। इस योजना के अंतर्गत 314.54 करोड़ रूपए से भूजल संवर्धन का कार्य कराए जाएंगे। योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले की तीम पंचायतों में काम शुरु किया गया है। नौगांव की भदेसर, छतरपुर की हमा और राजनगर ब्लॉक के पीरा ग्राम पंचायत में जल संरचनाओं का सर्वे शुरु किया गया है। सर्वे के आधार पर पंचायत में जल संरक्षण के लिए अधोसंरचना निर्माण और पुराने तालाब व बाबडिय़ों का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। जनभागीदारी से ग्राम स्तरीय वाटर सिक्योरिटी प्लान तैयार किया जाएगा। जल परियोजना से छतरपुर की 81, राजनगर के 86 और नौगांव के 75 ग्राम पंचायतों में भूजल संवर्धन कार्य किया जाना है। योजनांतर्गत स्टॉफ डेम एवं बेरोज, चेकडेम एवं रीचार्ज सॉफ्ट, पर्कोलेशन टैंक, प्वाइंट रिचार्ज स्ट्रक्चर, डगवे, कंटूर ट्रेन्चैस, ऐतिहासिक तालाब एवं बाउण्ड्रियों का पुर्नजीवन सहित टेलीमेटी उपकरण, प्रयोगशाल उपकरण एवं डाटा सेंटर कम्प्यूटर, ट्रेनिंग प्रशिक्षण एवं कम्युनिकेशन से जुड़े कार्य किए जाएंगे।

वाटर बजट भी होगा तैयार
योजना के तहत जिन गावों में जल संरक्षण किया जाना है। उन गांवों का वाटर बजट भी तैयार किया जाएगा। बजट में गांव में प्रतिदिन कितनी मात्रा में पानी उपयोग होता है, पीने के लिए और सिंचाई के लिए कितना पानी लगता है। जानवरों के लिए कितने पानी की आवश्यकता रोज होती है, इसका आंकलन कर वाटर बजट तैयार किया जाएगा। जन अभियान परिषद के संयोजक आशीष ताम्रकर का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन पंचायतों में काम शुरु किया गया है। दो महीने में चिंहाकन का काम पूरा कर लिया जाएगा।

लोगों को भी किया जाएगा शामिल
परियोजना क्यों और किसके लिए शुरू की गई और इस परियोजना के तहत क्या-क्या गतिविधियां की जाएंगी। इससे संबंधित पम्पलेट का ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार करें। योजना से स्थानीय लोगों को जोड़ा जाएगा। पानी के संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक करने के लिए उनकी भी सहभागिता रहेगी। भूजल संसाधन विभाग नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी, जिसमें किसान कल्याण एवं कृषि कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं उद्यानिकी विभाग भी प्रोत्साहन घटक के कार्य में सम्मिलित रहेंगे।

पांच साल में औसत बारिश में गिरावट
जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ संजय सिंह बताते हैं, कि एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार बुंदेलखण्ड के 13 जिलों में औसत वर्षा से 40 फीसदी की गिरावट आई है। पिछले 5 सालों में तो यह गिरावट लगभग 60 फसदी तक दर्ज की गई है। यह क्षेत्र जल को लेकर तनाव वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। अगर यही हाल रहा तो वर्ष 2030 तक बुंदेलखण्ड में जल दुर्लभ क्षेत्र के रूप में जाना जाएगा। ऐसे में यहां की 75 फीसदी आबादी, जिनकी प्राथमिक आजीविका कृषि पर निर्भर है, उन्हें अन्य शहरों में पलायन करना पड़ेगा।

Dharmendra Singh
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