आपदा में लापता हुए जनप्रतिनिधी और राजनैतिक पदाधिकारी

आपदा में जनप्रतिनिधियों ने छोड़ा जनता का साथ, आमजन बोले महामारी में नहीं मिल रहा जनप्रतिनिधियों का सहयोग, न ही कर रहे किसी प्रकार की मदद

By: Unnat Pachauri

Published: 01 May 2021, 10:28 AM IST

उन्नत पचौरी
छतरपुर। जिले में कोरोना संक्रमण आपदा का रूप लेकर लोगों को अपने आगोस में ले रहा है और इससे बचाव करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी अपने जान जोखिम में डालकर फ्रंट लाइन में काम कर रहे हैं। इसी को लेकर प्रशासन द्वारा जिले में आगामी ७ मई तक के लिए कोरोना कफ्र्यु लगाया है। इसके साथ ही लोगों को विभिन्न माध्यमों से जागरुक किया जा रहा है। लेकिन इस दौरान जिले में सैकडों में संख्या में जनप्रतिनिधी और हजारों की संख्या में समाजसेवी लापता हैं। वह न तो इस आपदा में लोगों की मदद के लिए सामने आ रहे हैं और न ही आर्थिक मदद कर रहे हैं और न ही मदद मांगने पर सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिले में ६ विधायक, दो सांसद, १ जिला पंचायत अध्यक्ष, ८ जनपद अध्यक्ष, दर्जनों जिला व जनपद पंचायत सदस्य, १४ नप के पूर्व अध्यक्ष, पार्षद, सांसद और विधायक प्रतिनिधी, सैकडों की संख्या में पार्टियों के मंडल अध्यक्ष सहित पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की सूचना से जन्मे हजारों समाजसेवी कोरोना के पहले लोगों के बीच में पहुंचकर खुद को बडा समाजसेवी और मददगार बताने से नहीं चूक रहे थे। कोई घटना होने पर भाजपा और कॉग्रेश के पदाधिकारियों की सहायता करने की होड़ लग रही थी और खुद को पीडि़त का सगा बताने में कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे। तो वहीं आए दिन कंबल वितरित, भोजन वितरण सहित कई प्रकार की सेवा करने का दिखावा कर रहे थे। जिससे उन्हें चुनाव के दौरान लोगों के वोट मिल सकें। लेकिन जैसे ही कोरोना संक्रमण ने जिले में दस्तक दी तो सभी के सभी मुंह छिपाकर लोगों के बीच से लापता हो गए। अबन तो कोई विधायक लोगों की मदद करने को तैयार है और न ही सांसद, वहीं पार्टियों द्वारा भी हाल में बैठकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच में पहुंचकर सहायता की बात कही गई। लेकिन इसके बाद न तो पार्टियों के जिला पदाधिकारी मैदान में दिखे और न ही कोई कार्यकर्ता। वहीं जिले के हालात हैं कि १० परिवारों में से हर १-२ परिवार के लोगों कोरोना के कारण किसी न किसी विपत्ती का सामना कर रहे हैं और ऐसे में उन्हें शासन और जनप्रतिनिधियों की सहायता की सख्त जरूरत है और इसके लिए वह कई लोगों से मदद मांग रहे हैं। लेकिन कोई भी मदद करने को तैयार नहीं है।

कॉग्रेस और भाजपा पार्टियों में हैं हजारों कार्यकर्ता
छतरपुर जिले में करीब २० लाख से अधिक की जनसंख्या है। इसमें से हजारों लोगों भाजपा और कॉग्रेस पार्टियों से जुड़े हैं और खुद को समाज के क्षेत्र में आगे बढ़कर कासर्य करने की बात करते थकते नहीं हैं। लेकिन कोरोना काल में कुछ एक को छोड़कर न तो इनका पता है और न ही लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। वहीं भाजपा द्वारा बीते दिनों बैठक कर लोगों की सेवा के लिए कहा था। लेकिन इसके बाद न तो कोई विधायक आम लोगों की मदद् (भोजन, राशन, आर्थिक, मेडिशन) आदि नहीं की है। वहीं जिले के बिजावर, महाराजपुर व छतरपुर विधायक द्वारा पलंग आदि की मदद अस्पतालों में कराइ्र गई है। लेकिन इन्होंने मजबूर और गरीब लोगों के लिए कोई कार्य नहीं किए जा रहे हैं।

सामाजिक संगठन भी दिखे पीछे
जिले में सभी समाज के संगठन हैं और अपने आप में सभी की सहायतों के लिए सक्षम हैं। लेकिन यह संगठन भी बैक फुट में हैं औन आपदा में लोगों की मदद करने नहीं आ रहे हैं। बीते दिनों राम मंदिर के लिए धन एकत्र करने की मुहिम को अगर सभी सामाजिक और धार्मिक संगठन अपनाकर जिले में पीडि़त लोगों की मदद करें तो बिना किया राजनैतिक मदद के ही जिले के लोगों में खुशहाली आने में देर नहीं लगेगी।

Unnat Pachauri
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