राम ने चलाए तीर, खत्म हो गया बुराई का प्रतीक रावण

कोरोना के कारण पहली बार गोधुली बेला में हुआ रावण दहन
रावण वध के बाद निकली विजय यात्रा, हुआ राजतिलक

By: Dharmendra Singh

Published: 26 Oct 2020, 08:50 PM IST

Chhatarpur, Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। विजयादशमी के पर्व पर शहर के बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम में आयोजित होने वाले विशाल रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण संक्षिप्त स्वरूप में बदल गया। वर्षों बाद पहली बार ऐसा हुआ जब स्टेडियम में रावण के पुतले का दहन गोधुली बेला में हो सका। रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन अन्नपूर्णा रामलीला समिति के द्वारा किया गया। शाम 7 बजे स्टेडियम में शुरू हुई संक्षिप्त रामलीला के उपरांत प्रभु राम का किरदार निभा रहे रंजीत शर्मा ने 25 फीट ऊंचे रावण के पुतले पर तीरों की वर्षा कर दी। कुछ ही देर में अहंकार के पुतले रावण में आग लग गई और वह धू-धू कर जल उठा।

इस वर्ष प्रशासन द्वारा बड़े आयोजन की अनुमति न दिए जाने ेके कारण अन्नपूर्णा रामलीला समिति के द्वारा परंपरा का निर्वाह करने के लिए 4 दिन पहले ही रावण के पुतले का निर्माण शुरू किया था जिसे सोमवार को स्टेडियम ले जाया गया। यहां रामलीला मंचन से जुड़े कलाकारों ने राम-रावण युद्ध की लीला का मंचन किया और फिर रावण के पुतले का दहन किया गया। इस वर्ष मैदान पर कोई विशिष्ट नागरिक अतिथि के रूप में मौजूद नहीं था। संक्षिप्त कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष दृगेन्द्र सिंह बुन्देला ने अपना उद्बोधन दिया और फिर पुतले का दहन हो गया। रावण का वध करने के बाद भगवान राम और उनकी सेना विजय यात्रा निकालते हुए गल्लामण्डी पहुंची जहां राजतिलक की लीला का मंचन हुआ। भगवान राम के राज्याभिषेक के साथ रामलीला का पर्दा भी गिर गया।
त्रेता का रावण मर्यादित था, आज के रावण ज्यादा खतरनाक
रावण दहन के पूर्व हमने छतरपुर की प्रख्यात अन्नपूर्णा रामलीला के मझे हुए कलाकार और रावण की भूमिका निभाने वाले जीतेन्द्र दुबे से चर्चा की। इस साक्षात्कार में जीतेन्द्र दुबे ने बताया कि वे 1998 से रावण का किरदार निभा रहे हैं। रावण की भूमिका को मंचित करना आसान काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि रावण प्रकांड विद्वान, चरम अहंकारी और भाषा में योग्य पुरूष था। उसके किरदार में उतरने के लिए रोम-रोम से अहंकार प्रकट करना पड़ता है। भाषा पर पकड़ जरूरी है क्योंकि उसमें संस्कृति और अवधी शब्दों की भरमार है। उन्होंने बताया कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें हर बार रावण का किरदार मंच पर उतारने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि त्रेता का रावण आज के दानवों से ज्यादा मर्यादित था। सीता के अपहरण के बाद भी रावण ने उन्हें कभी स्पर्श नहीं किया। वर्तमान में हमारे आसपास ऐसे कई दानव हैं जो मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ रावण का पुतला दहन करने से कुछ नहीं होगा। संस्कारों के साथ हर व्यक्ति को राम बनना होगा तभी बुराई खत्म होगी।

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