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छतरपुर

जमीनों की धोखाधड़ी रोकने रिकॉर्ड हो रहा डिजीटल, छतरपुर तहसील का बंदोबस्त डिजीटल हुआ

छतरपुर शहर तहसील के 61 गांव व शहर और ग्र्रामीण तहसील के 100 गांवों के बंदोबस्त का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है। अब नौगांव तहसील का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। यह काम भी लगभग आधा हो गया है।

छतरपुरJun 21, 2024 / 11:01 am

Dharmendra Singh

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रिकॉर्ड स्कैन कर ऑनलाइन करती टीम

छतरपुर. सरकारी जमीन और निजी जमीनों को हेराफेरी कर हड़पने वाले भू-माफिया पर अब लगाम कसने की तैयारी है। भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त विभाग पहली बार बंदोबस्त को ऑनलाइन कर रहा है। छतरपुर शहर तहसील के 61 गांव व शहर और ग्र्रामीण तहसील के 100 गांवों के बंदोबस्त का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है। अब नौगांव तहसील का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। यह काम भी लगभग आधा हो गया है। इसके साथ ही जिले की अन्य 10 तहसीलों के बंदोबस्त का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन किए जाने का काम जारी है।

बंदोबस्त ही होगा बेस रिकॉर्ड


बंदोबस्त के आधार पर ही बेस रिकॉर्ड माना जाता है। ऑनलाइन होने के बाद लैंड रिकॉर्ड के सॉफ्टवेयर से पूरा काम होगा और आमजन को सबसे बड़ी राहत होगी। जमीन को लेने से पहले मिसिल नक्शे से अधिकृत कॉपी लेकर यह देख सकेगा कि जमीन का पहले स्टेटस क्या था और कोई विवाद तो नहीं है। इससे भू-माफिया की मुश्किल बढ़ेंगी, क्योंकि अभी तक बंदोबस्त का रिकॉर्ड आसानी से नहीं मिलता था और इसी का यह लोग फायदा उठाते थे। रिकॉर्ड की फीडिंग का काम शुरु किया जा रहा है। वहीं, अनुविभागीय अधिकारियों ने अवैध प्लांटिंग को चिंहित करने और अवैध घोषित करने की कार्रवाई भी शुरु कर दी है। नौगांव में दो कॉलोनियां शासकीय घोषित की गई है, वहीं छतरपुर में अवैध प्लॉटिंग की जांच के लिए राजस्व विभाग की टीम बनाई गई है।

गूगल की तरह देख सकते हैं जमीन का नक्शा-खसरा


जिले की जमीनें खसरा नंबर सहित ऑनलाइन की गई हैं। एपी किसान ऐप के जरिए जिले की सभी तहसालों व गांवों में मौजूद जमीन के खसरा नंबर, नक्शा को ऑनलाइन हासिल किया जा सकता है। जिले मे ऐप के जरिए सभी प्रकार की भूमियों का नक्शा गूगल मैप की तरह देखने की सुविधा शुरु हो गई हैं। वहीं अब भू-अभिलेख विभाग बंदोबस्त रिकॉर्ड को भी ऑनलाइन करने जा रहा है। जिसके लिए डाटा फीडिंग़ का काम जल्द शुरु होने वाला है। सागर संभाग में दमोह, टीकमगढ़ में बंदोबस्त रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है। छतरपुर में कोविड संक्रमण के चलते बंदोबस्त रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन का कार्य देर से शुरु हुआ है।

धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम


जिले में 1939-40 और 1943-44 में हुआ था बंदोबस्त
आजादी से पहले अंग्रेजों के समय में जमीनों का बंदोबस्त किया जाता था और हर 40 साल में यह बंदोबस्त किया जाता था। कोई जमीन का बड़ा टुकड़ा और उसमें से नए टुकड़े बनते गए, बिक्री होती गई। इसके बाद नया नक्शा तैयार करने के लिए बंदोबस्त किया जाता था। नए सिरे से नक्शा व खसरा की नंबरिंग करना ही बंदोबस्त है। हमारे जिले में 1939-40 और 1943-44 में सभी पटवारी हल्के की जमीनों का बंदोबस्त किया गया था। वर्तमान स्थिति में बंदोबस्त के इसी बेस रिकॉर्ड के आधार पर ही काम किया जाता है।

इनका कहना है


बंदोबस्त रिकॉर्ड डिजीटलाइजेशन चल रहा है। छतरपुर सहित जिले की सभी तहसीलों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से लोगों को सहुलियत मिलेगी।
आदित्य सोनकिया, अधीक्षक, भू-अभिलेख

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