सड़कों पर ट्रक और बसों के पहिए के नीचे कुचल रहे मवेशी

सड़कों पर ट्रक और बसों के पहिए के नीचे कुचल रहे मवेशी

Rafi Ahamad Siddiqui | Publish: Sep, 08 2018 01:27:55 PM (IST) Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

लुगासी में यूपी के लोग छोड़ गए चार सौ गाय, बदहाल हुआ गांव के लोगों का जीवन

छतरपुर। शहर में बारिश के साथ ही सड़कों पर मवेशियों का डेरा होने के कारण अब जोखिम बढ़ गया है। लोगों का सड़क पर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। उधर यूपी के लोग लगातार गायों को जिले की सीमा में छोड़कर जा रहे हैं। इससे गौवंश पर जहां भुखमरी का खतरा बढ़ गया है, वहीं गायेां की भी लगातार मौत हो रही है। लुगासी गांव में तीन सप्ताह पहले यूपी के लोग करीब चार सौ गाय छोड़कर चले गए। इससे पूरे गांव के लोग मुसीबत में घिर गए हैं। लुगासी में न तो हाट बाजार लग पा रहा है और न ही लोग सड़कों ने निकल पा रहे हैं। वहीं गायों की भूख-प्यास और बीमारियों से भी मौत होने लगी है। हर दिन यहां एक-दो गाय की मौत हो रही है। उधर शहर में भी गौवंश का जीवन संकट में दूसरी ओर शहर सहित जिलेभर की गौशालाओं ने इन लावारिश गाय-वैलों को लेकर अपना मुंह फेर लिया है। गौशालाओं के दरवाजे इनके लिए बंद हो गए हैं। ऐसे में पशु तस्कर लगातार यहां से गायों को ढोकर कत्ल खानों की ओर ले जा रहे हैं।
शहर के चौराहों, मुख्य सड़कों और हाइवे की सड़क सहित गली-मैदानों हर जगह मवेशियों का स्वच्छंद विचरण हो रहा है। नगरपालिका की गौशाला और कांजी हाउस में भी इन गायों को ठिकाना नहीं मिल रहा है। सड़क पर बैठी गाय-बछड़ों को हर दिन पशु तस्कर कुचलकर निकल जाते हैं। घायल गायों की निशुल्क सेवा करने वाले हरिओम गौशाला के सेवक दिन-रात घायल मवेशियों को ढो-ढोकर उन्हें अपने अस्पताल में भर्ती कर रहे हैं। इनका एम्बूलेंस वाहन खराब हो जाने के कारण वे भी अब मोहताज होने लगे हैं। उधर पशु चिकित्सा विभाग को राज्यमंत्री ललिता यादव ने पशु वाहन के लिए ढाई लाख रुपए मंजूर किए थे, लेकिन विभाग आज तक यह वाहन नहीं खरीद पाया है। इस कारण घायल गायों की सेवा का काम भी रुक गया है। इस स्थिति के चलते शहर में जहां-तहां घायल जानवर पड़े हैं। गायों की मौत हो रही है, लेकिन इस दिशा में जिम्मेदारों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
यूपी से ३५० गायों को छोड़ गए लोग :
शहर से सटे ग्राम लुगासी की सीमा यूपी से लगी है। इस गांव में रात के समय अज्ञात लोग करीब ३५० से ज्यादा लावारिश गायों को लाकर छोड़ गए हैं। गांव के निवासी देवेंद्र अनुरागी ने बताया कि इन गायों से पूरा गांव भर गया है। न तो गांव के स्टैंड पर सब्जी बाजार लग पा रहा है और न ही हाट बाजार लग पा रहा है। दुकानदारों की सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री भूखी-प्यासी गाय चट कर जाती है। हर दिन एक-दो गाय की मौत भूख-प्यास से हो रही है। गांव के लोगों की सब्जी व अन्य सीजनी फसलें भी यह मवेशी चट कर रहे हैं। दिन-रात खेतों की रखवाली के लिए जागने से गांव के लोग भी बीमार पडऩे लगे हैं। कुछ लोग अपने सामथ्र्य के अनुसार ही गायों की सेवा कर पा रहे हैं। गांव के प्रागीला पटेल, वंशगोपाल पटेल, संतोष यादव, कमलेश पटेल, किशोरीलाल पटेल, लेखराम पटेल, हरगोविंद ङ्क्षसह, खिल्लू अहिरवार सहित सैकड़ों लोगों ने एकत्र होकर इस बारे में अधिकारियों को ज्ञापन भी दिया, लेकिन गौवंश की सुरक्षा व भूख-प्यास को लेकर कोई भी पहल नहीं हुई। गांव के लोग परेशान है।
समाज के लोगों को ही आगे आना होगा :
गायों को माता का दर्जा मिला है। सबसे उपयोगी पशु भी गाय है। उसके गुण-धर्म का अध्ययन करके लोग उसका पालन करे तो व्यक्ति का जीवन बदल सकता है। लेकिन लोगों ने गायों का महत्व ही समझना बंद कर दिया है। गाय सड़कों पर मारी-मारी फिर रही ऐसे अगर उसे घरों में संरक्षण नहीं मिला तो स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ेगी। गायों का पालन करके ही उसका संरक्षण किया जा सकता है।
- पवन असाटी, गौसेवक
लोग गौशाला तक पहुंचा दें :
नगरपालिका की गौशाला पन्ना रोड पर हैं। वहां गायों का संरक्षण किया जा रहा है। लोग चाहे तो शहर की लावारिश गायों को वहां तक पहुंचा दें, इसे दुर्घटनाएं भी रुकेंगी और गायों को संरक्षण भी मिलेगा। लोग अपने पालतू मवेशियों को घर पर ही बांधकर रखें तो भी समस्या बहुत हद तक हल हो जाएगी।
- हरिहर गंधर्व, सीएमओ नगरपालिका

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