बोवनी शुरु, लेकिन खाद-बीज व कीटनाशक की नहीं आई अबतक सैंपल जांच रिपोर्ट

बीज की कमी से किसानों को चुकाना पड़ रहे ज्यादा दाम

सैंपल जांच रिपोर्ट आने के पहले ही बिक रहे खाद-बीज व कीटनाशक
पिछले साल 2600 मीट्रिक टन डीएपी खेतों में खपने के बाद आई थी अमानक होने की रिपोर्ट

By: Dharmendra Singh

Published: 30 Jun 2020, 07:00 AM IST

सुनील रिछारिया

छतरपुर/ हरपालपुर। जिले में 100 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, ऐसे में किसानों ने बोवनी शुरु कर दी है। लेकिन जिले में सहकारिता व निजी विक्रेताओं के जरिए बेचे जा रहे खाद-बीज और कीटनाशक की सैंपल रिपोर्ट नहीं आई हैं। ऐसे में खेतों में खपने के बाद इनकी रिपोर्ट अमानक आने पर किसानों के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। पिछले साल 2600 मीट्रिक टन डीएपी खेतों में खपने के बाद अमानक होने की रिपोर्ट आई थी, लेकिन पिछले साल किसानों को हुए नुकसान से सबक लेकर इस बार बोवनी से पहले सैंपलिंग रिपोर्ट मंगाने का कार्य नहीं हुआ है। जिले में 17 हजार मीट्रिक टन खाद और 11500 क्विंटल बीज सहकारिता व निजी विक्रेताओं के जरिए बेचा जा रहा है। जिसकी सैंपल जांच रिपोर्ट खेतों में खपने के बाद आएगी।

जिले में बिक ने लगी खाद, लेकिन नहीं आई सभी सैंपल की जांच रिपोर्ट
जिले में 20500 मीट्रिक टन खाद की डिमांड है। जिसमें 12 हजार मीट्रिक टन डीएपी और 8 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड है। सहकारी सोसायटियों व निजी विक्रेताओं के जरिए बेचने के लिए जिले में 8842 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण कर लिया गया है। जबकि 8962 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक आ चुका है। इस तरह से कुल डिमांड 20हजार 500 मीट्रिक टन की तुलना में 17 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा खाद का भंडारण कर लिया गया है। जिनकी निजी विक्रेताओं व सोसायटियों के माध्यम से बिक्री शुरु हो गई है। लेकिन जिले से लिए गए खाद के 89 सैंपल में से सिर्फ 11 की रिपोर्ट आई है। 78 सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

पिछले साल 6 करोड़ की अमानक खाद खप गई थी खेतों में
खाद की बिक्री से पहले जांच कराने में लेटलतीफी की स्थिति तब है जब पिछले साल 17 अक्टूबर को जिले में रबी सीजन के लिए आई 2600 टन डीएपी की सैंपल जांच रिपोर्ट 13 नवंबर को अमानक आई। रिपोर्ट आने के पहले अमानक खाद को जिले के 7 सेंटर्स में बिक्री व भंडारण के लिए रखा गया, जहां से कृषि विभाग ने डीएपी का सैंपल उज्जैन की लैब में जांच के लिए भेजा था। लैब परिक्षण के बाद 13 नवंबर को जांच रिपोर्ट आई जिसमें खाद को अमानक बताया गया, लेकिन इसके पहले ही 2521 टन खाद जिले में खप चुकी थी। बैच की 2600 टन में से महज 78.41 टन खाद ही बची थी, जब इस बैच की बिक्री पर रोक लगाई गई। सिर्फ सैंपल जांच रिपोर्ट में देरी के चलते किसानों के 6 करोड़ रुपए बर्बाद हो गए थे। खाद के 6 करोड़ के अलावा बीज, जुताई आदि में लगा खर्च भी बेकार हो गया था।

बीज की कमी, सैंपल रिपोर्ट भी नहीं आई
जिले में 15 हजार 400 क्विंटल बीज की आवश्यकता है, जिसमें एवज में 11500 की व्यवस्था हुई है, लेकिन अभी तक भंडारण केवल 7402 क्विंटल की हो पाई है। जिले में उड़द, सोयाबीन, बाजरा, मक्का, ज्वार, मूंग, मूंगफली के बीज की डिमांड हैं। इसमें सबसे ज्यादा उड़द की डिमांड 6 हजार क्विंटल है, लेकिन जिले में केवल 4500 क्विंटल उड़द का बीज उपलब्ध हैं। जिसमें से किसानों को अभी तक केवल 1500 क्विंटल बीज का वितरण ही हो सका है। ऐसे में किसानों को बीज प्रमाणिक बीज उपलब्ध नहीं होने से किसान अप्रमाणिक बीज बाजार से खरीद रहे हैं। ऊपर से दाम भी अधिक देना पड़ रहे हैं। जिले से बीज के 105 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आना बाकी है। ऐसे में सोसायटियों व निजी विक्रेताओं द्वारा बेचे गए इन बीजों की रिपोर्ट फेल होती है, तो किसानों को नुकसान होना तय है। क्योंकि तबतक बीज खेतों में खप जाएगा। इसी तरह से जिले से कीटनाशक के 42 सैंपल भेजे गए हैं, इनकी भी रिपोर्ट आना बाकी है।

महंगे दाम पर बाजार से खरीदना पड़ रहा बीज
सोसायटियों के माध्यम से किसानों को उचित दाम पर उपलब्ध कराए जाना वाला बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से किसानों को बाजार से महंगे दाम पर खरीदना पड़ रहा है। चुरवारी के किसान गोविन्द दास कुशवाहा ने बताया कि मूंगफली का बीज नौगांव में मंहगा मिल रहा है इसलिए उत्तरप्रदेश के मऊरानीपुर से बीज लेकर आए, लेकिन उन्हें वहां भी 6000 रुपए क्विंटल के भाव खरीदना पड़ा, जबकि सोसायटी लेते तो सब्सिडी मिलने से सस्ता पड़ जाता। किसान हीरालाल रैकवार ने बताया कि उड़द का बीज महंगा है, मूंग का बीज मिल नहीं रहा है, इसलिए मूंगफली की बोवनी कर रहे। व्यापारी से मूंगफली के बीज मंहगे दाम पर खरीदना पड़ा है। महेड़ गांव के किसान राममिलन यादव ने बताया कि हरपालपुर-नौगांव में बीज नहीं मिल पा रहा है। व्यापारी से महंगे दाम पर खरीदना पड़ रहा है। इमलिया गांव के किसान हलकू प्रजापति ने बताया कि मूंग की बोवनी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि निजी दुकानों पर कोई भी बीज खरीदो, पिछले साल से बीज का दाम प्रति क्विंटल 1000 रुपए ज्यादा हो गए हैं। सोसायटियों में अभी तक केवल उड़द का बीज मिल पा रहा है जबकि सोयाबीन, मूंगफली, मूंग के बीज अभी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

फैक्ट फाइल
दाम प्रति किलोग्राम
बीज बाजार मूल्य सरकारी दर
उड़द 110 85
सोयाबीन १२० ६६.५०
मूंग 200 99
मूंगफली 110 73

जल्द आएगी रिपोर्ट
खाद-बीज और कीटनाशक के सैंपल भेजे गए हैं। पूरे प्रदेश के सैंपल जांच का लोड एक-दो लैब पर होने से रिपोर्ट आने में देरी हो जाती है। बीज प्रमाणिक होते हैं, उनकी बोवनी की जा सकती है।
मनोज कश्यप, उप संचालक कृषि

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