रेत-गिट्टी और ईंट से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बनीं जानलेवा

- कहीं पूरी सड़क जाम कर दी तो कहीं मौत बनकर दौड़ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली
- बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली यातायात में बने सबसे बड़ी बाधा

By: Neeraj soni

Published: 05 Sep 2019, 06:00 AM IST

Chhatarpur, Madhya Pradesh, India

छतरपुर। शहर की सड़कों पर ट्रैक्टर ट्राली ने लोगों का चलना मुश्किल कर दिया है। मिट्टी, गिट्ट्री, बालू, ईंट लादकर ड्राइवर इतनी तेजी से सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्राली चलाते हैं कि हर वक्त दुर्घटना होने का डर बना रहता है। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि कुछ ट्रैक्टर ट्रॉली बिना परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए चल रहे हैं। इनके लिए शहर में नो इंट्री को कोई मतलब नहीं है। ट्रैक्टर-ट्राली शहर में कहीं भी किसी भी समय दिख सकती है। भले ही सड़क पर जाम लग जाए या किसी को दिक्कत हो, इससे न ट्रैक्टर चालकों को मतलब है और न ही यातायात विभाग को। परिवहन विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कागजों में ये ट्रैक्टर-ट्राली कृषि कार्य के लिए हैं, लेकिन इनका ज्यादातर इस्तेमाल सड़कों पर माल ढोने में किया जा रहा है। वहीं अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना रजिस्ट्रेशन के ही चल रहे हैं। रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रालियों के कारण पूरे शहर में अराजकता की स्थिति बनी हुई है।
शहर के गल्ला मंडी के आगे शिव शंकर कॉलोनी गहोई धाम के पास रेत से भरा ओवर लोड बिना नंबर वाला ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गया। इस हादसे में बाइक सवार बच गया, लेकिन यहां का रास्ता काफी देर तक बंद रहा। एक दिन पहले ही गायत्री मंदिर के पास वाले मार्ग पर एक रेत से भरी ट्र्रॉली बाइक सवार पर चढ़ते हुए बची थी। पिछले एक महीने में आधा दर्जन हादसों में ९ लोग घायल हो चुके हैं और एक व्यक्ति की मौत तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्राली के कारण हुई है। सटई रोड पर पिछले दो महीने में ५ लोग ट्रैक्टर की चपेट में आने से घायल हो चुके हैं। इस क्षेत्र के लोगों ने बार-बार शिकायतें की, लेकिन जब रेत, ईंट और गिट्टी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन यहां के युवाओं ने एकजुट होकर तीन दिन पहले ही पूरे वाहनों को यहां से खदेड़ दिया। गायत्री मंदिर के पास अघोषित रूप से मुख्य सड़क पर बन चुकी रेत मंडी से लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। यहां पर रात चलती महिलाओं पर ट्रैक्टर चालकों के कमेंट्स, शराबखोरी और लड़ाई-झगड़ों ने यहां रहने वाले लोगों और मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशान कर रखा है।
बिना नंबर लिखवाए चलते है :
शहर में चलने वाले अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर नहीं लिखे हैं। इसका खुलासा विगत दो महीने में पकड़े गए १२ ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुआ है। जिसमें दस ट्रैक्टर मालिकों ने ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया था और सड़कों पर धड़ल्ले से चल रहे थे।
कार्रवाई के लिए यह है नियम :
परिवहन विभाग के मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक कोई भी वाहन एजेंसी से रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही वाहन स्वामी ट्रैक्टर ले जा सकता है। बिना नंबर लिखवाए कोई भी गाड़ी सड़क पर नहीं चल सकती है। बिना नंबर लिखवाए गाड़ी चलने पर २००० रुपए जुमार्ना लगता है। इंश्योरेंस नहीं होने पर ३००० रुपए तथा रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर २००० रुपए जुर्माना के साथ वाहन की जब्ती और राजसात की कार्रवाई की जाती है।
छतरपुर में मात्र 122 ट्रैक्टर दे रहे टेक्स, बाकी कर रहे टेक्स चोरी :
मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में केन नदी की रेत के कारण चर्चित छतरपुर जिले में लगभग हर सड़क पर रेत लादे ट्रैक्टर घूमते मिल जाएंगे। लेकिन पूरे जिले में मात्र 122 टै्रक्टर ही व्यवसायिक श्रेणी में रजिस्टर्ड हैं। बाकी के 18 हजार 137 टै्रक्टर केवल खेती का काम करने के लिए परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं। इससे साफ है कि ज्यादातर टै्रक्टर टेक्स की चोरी कर शासन को चूना लगा रहे हैं। जिले में टै्रक्टरों से खेती के काम के अलावा कई लोग उनका खुलेआम व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इन टै्रक्टरों से रेत, ईंट, गिट्टी, बोल्डर, मुरम आदि की भाड़े पर ढुलाई की जा रही है। व्यवसायिक श्रेणी में टै्रक्टरों का रजिस्ट्रेशन कराने पर 6 प्रतिशत टेक्स देना पड़ता है। जबकि कृषि कार्य के लिए रजिस्ट्रेशन में टै्रक्टरों को कर मुक्त रखा गया है। छतरपुर जिले में आज की स्थिति में अधिकतर ट्रैक्टरों का इस्तेमाल व्यवसाय में हो रहा है। परिवहन कार्यालय के अनुसार छतरपुर जिले में कुल 18 हजार 259 टै्रक्टर रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 18 हजार 137 कृषि कार्य की श्रेणी में कर मुक्त तथा 122 व्यवसायिक श्रेणी में रजिस्टर्ड होने से 6 प्रतिशत कर अदा करते हैं।
बिना ड्राइविंग लाइसेंस के चला रहे ट्रैक्टर :
बिना लाइसेंस ट्रैक्टर चलाने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई किए जाने के निर्देश परिवहन विभाग बहुत पहले ही जारी कर चुका है। जिले में ट्रैक्टर चालकों की लापरवाही से वाहन दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं और चालकों के पास लाइसेंस भी नहीं हैं। ऐसे चालकों को चिह्नित कर बिना लाइसेंस ट्रैक्टर चलाने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई किए जाने के निर्देश परिवहन विभाग ने जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के विरुद्ध अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन इन निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा है।
एक साल में 265 हादसों में से 69 हादसे ट्रैक्टरों से हुए :
आमतौर शादी-ब्याह या फिर किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल करते हंै। जबकि ड्राइवर भी सवारियों को ट्रॉली में बैठाने के बाद रफ्तार से भागते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। पिछले एक साल में हुए 265 हादसों में से 69 से ज्यादा हादसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के ही हुए हंै। जिनमें सबसे अधिक मौतें हुई हंै।
कुछ वाहन स्वामी झूठ बोलकर ले जाते हैं ट्रैक्टर :
एक साल में लगभग 22 से 25 ट्रैक्टर बिकते है। अधिकांश ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद ही एजेंसी से निकलने दिया जाता है। लेकिन कुछ वाहन स्वामी खुद रजिस्ट्रेशन करवाने की बात कहकर कागजात ले लेते है। रजिस्ट्रेशन के वक्त ही ट्रैक्टर का इंश्योरेंस एक साल के लिए किया जाता है।
- राजीव गंधी, ट्रैक्टर एजेंसी संचालक बड़ामलहरा
जल्द ही अभियान चलाएंगे :
इस संबंध में यातायात प्रभारी से चर्चा हुई है। जल्द ही संयुक्त रूप से अभियान चलाकर रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के लिखाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- सुनील सक्सेना, एआरटीओ छतरपुर

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