जिला अस्पताल और नौगांव की सेनेटाइजेशन टनल कर दी बंद


सेनेटाइजेशन टनल में उपयोग हो रहा सोडियम हाइपोक्लोराइड से हो रही स्किन की परेशानी
निर्जीव वस्तुओं को सेनेटाइज करने की दवा का इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक

By: Dharmendra Singh

Published: 23 Apr 2020, 06:00 AM IST

छतरपुर। कोरोना संक्रमण से बचाव और फैलने से रोकने के लिए सेनेटाइङ्क्षजग टनल का उपयोग बंद कर दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इसमें इस्तेमाल किए जा रहे रसायन से लोग और कर्मचारी एलर्जी की परेशानी का सामना कर रहे हैं। उनकी इस शिकायत के बाद ये फैसला लेना पड़ा है। इस टलन में सोडियम हाइपोक्लोराइट का इस्तेमाल सेनेटाइजर के रुप में इस्तेमाल हो रहा है। जिससे टनल से बार-बार गुजरने वाले लोगों को त्वचा में जलन और निशान की परेशानी हो रही है। जिला अस्पताल के स्टाफ में कई लोगों ने स्किन प्राबलम की शिकायत सिविल सर्जन से की है। इधर डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के बाद केन्द्रीय स्वास्थय मत्रालय ने सोडियम हाइपोक्लोराइट का इस्तेमाल लोगों के शरीर पर न करने की सलाह जारी की है। इसके बाद प्रशासन ने जिला अस्पताल छतरपुर में लगाई गई दो सेनेटाइजिंग टनल और नौगांव नगरपालिका में लगाई गई टनल का उपयोग बंद कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की ये गाइड लाइन
सोडियम हाइपोक्लोराइट का मानव शरीर पर छिड़काव कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उपयोगी उपचार नहीं है। सोडियम हाइपोक्लोराइट का उपयोग किसी सतह को कीटाणु रहित करने के लिए किया जाता है। इसे टनल के जरिए शरीर पर आजमाना कई रूपों में घातक हो सकता है। सड़क, दीवार, गेट, फर्श और निर्जीव चीजों पर ही इसका इस्तेमाल किया जाना है। किसी भी सजीव, यहां तक कि पेड़-पौधों पर भी इसका छिड़काव घातक है। इससे कई तरह की परेशानी हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक सोडियम हाइपोक्लोराइट से आंखों और त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं। किसी भी परिस्थिति में व्यक्तियों या समूहों पर छिड़काव नहीं करना है. यह छिड़काव शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से काफी हानिकारक साबित हो सकता है। भले ही कोई व्यक्ति कोविड-19 वायरस से संक्रमित क्यों न हो, शरीर के बाहरी हिस्से को स्प्रे करने से आपके शरीर में प्रवेश कर चुके वायरस को नहीं मारा जा सकता है। वहीं, सोडियम हाइपोक्लोराइट से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, गलती से यह रसायन नाक, गले या श्वसन नली में चला जाय तो जलन और ब्रोंकोस्पज़म भी हो सकता है।
कम नहीं हो रहे सर्दी जुकाम के मामले
जिला प्रशासन द्वारा जारी किए हेल्थ बुलटिन के अनुसार 21 अप्रेल तक जिले में सर्दी-जुकाम के मामले कम नहीं हो रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में ही 21 अप्रेल को 2342 मरीज आए, जिनमें 983 पुरुष, 980 महिलाएं और 379 बच्चे शामिल हैं। ये मरीज जिला अस्पताल की सामान्य ओपीडी में सर्दी-जुकाम की शिकायत लेकर आए हैं। मार्च-अप्रेल में 21 अप्रेल को जिला अस्पताल की ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज आए। इसके अलावा ऑपरेशन पहचान के तहत 179 लोग सर्दी-जुकाम एवं बुखार से पीडि़त पाए गए हैं।
22 लोग हैं आइसोलेशन पर
जिले में डोर-टूडोर सर्वे के जरिए प्रशासन अबतक 3 लाख 61 हजार से ज्यादा परिवारों के 19 लाख 90 हजार 330 लोगों तक पहुंचा है। इसके साथ ही 57361 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। जिसमें बाहर से आए 25245 लोग शामिल हैं। वहीं, जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की संख्या 22 हो गई है। जबकि जिले से 21 अप्रेल तक कुल 189 सैंपल भेजे गए हैं। जिनमें से 168 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 21 सैंपल रिजेक्ट हुए हैं।
बंद करा दी मशीन
निर्देश मिलने के बाद अस्पताल की सेनेटाइजिंग मशीन को बंद कराया गया है। पसीना के साथ कैमिकल रिएक्शन के कारण किसी-किसी कर्मचारी को स्किन की हल्की प्रॉबल्म हुई है, लेकिन चिंता की बात नहीं है। वैसे भी मशीन का उपयोग बंद कर दिया गया है।
डॉ. आरएस त्रिपाठी, सिविल सर्जन

Dharmendra Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned